यीशु मसीह का देहधारण क्यों आवश्यक था?

By: मार्ग सत्य जीवन Topic: यीशु का देहधारण Series: क्रिसमस

“परमेश्वर का पुत्र मनुष्य बना ताकि मनुष्यों को परमेश्वर का पुत्र बनने के योग्य कर सके।” -सी. एस. लुईस

क्रिसमस सदियों से मसीही तथा गैर-मसीही लोगों के द्वारा संसार भर में मनाया जाता है। क्रिसमस की घटना परमेश्वर के पृथ्वी पर मनुष्य बनकर आने का वर्णन करती है। इसके विषय में परमेश्वर ने हज़ारों वर्ष पहले से ही बताना आरम्भ कर दिया था। स्वर्ग और पृथ्वी के सृष्टिकर्ता का मनुष्य की देह में आना निश्चय ही संसार की सबसे महान और सुन्दर घटना थी, क्योंकि यह सब लोगों के लिए बड़े आनन्द का सुसमाचार है। लेकिन क्रिसमस हमारे जीवन में तब तक सच्चा आनन्द नहीं लाएगा जब तक कि हम यह न जान लें और विश्वास न कर लें कि परमेश्वर यीशु मसीह के रूप में देहधारण करके क्यों आए? यीशु मसीह के देहधारण की आवश्यकता के विषय में बाइबल हमें अनेक कारण प्रदान करती है जिनमें से कुछ कारणों पर हम विचार करेंगे।

क्रिसमस की घटना परमेश्वर के पृथ्वी पर मनुष्य बनकर आने का वर्णन करती है।

परमेश्वर को सच्चाई से प्रकट करने के लिए 

इस संसार में मनुष्यों के लिए परमेश्वर से सम्बन्धित ज्ञान प्राप्त करने के दो तरीके उपलब्ध हैं। पहला, सामान्य प्रकाशन- जिसमें सृष्टि और हमारे मन या विवेक परमेश्वर से सम्बन्धित ज्ञान हम पर प्रकट करते हैं। दूसरा, विशेष प्रकाशन जिसके अंतर्गत हम परमेश्वर के वचन के द्वारा उसको सच्चाई से जान सकते हैं। 

विशेष रूप से परमेश्वर के सच्चे रूप को जानने के लिए उसके देहधारी वचन को जानना अनिवार्य है। वह वचन जो अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण था देहधारी हुआ अर्थात यीशु मसीह जो परमेश्वर का एकलौता पुत्र है। इस देहधारी वचन को जाने बिना हम परमेश्वर को सच्चाई से कभी नहीं जान सकते हैं, क्योंकि “परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा: परमेश्वर का एकलौता जो पिता की गोद में है, उसी ने उसे प्रकट किया” (यूहन्ना 1:14-18)। यदि यीशु मसीह देहधारण करके न आते तो मनुष्यों के पास परमेश्वर को जानने का कोई सच्चा मार्ग नहीं होता। अतः परमेश्वर यीशु मसीह के रूप में आज से लगभग दो हज़ार वर्ष पहले मनुष्य बनकर आया ताकि हम परमेश्वर को जानें और उसके पास पहुँच सकें। साथ ही यीशु ने स्वयं कहा कि ‘‘मार्ग सत्य और जीवन मैं ही हूँ। बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता’’’(यूहन्ना 14:6)।

हमारे पापों के बदले स्वयं को बलिदान करने के लिए  

परमेश्वर की दृष्टि में संसार का प्रत्येक व्यक्ति पापी है और प्रत्येक पाप की मज़दूरी मृत्यु है। पापों की क्षमा हेतु एक निर्दोष और सिद्ध बलिदान की आवश्यकता थी, क्योंकि “व्यवस्था के अनुसार प्रायः सब वस्तुएँ लहू के द्वारा शुद्ध की जाती हैं, और लहू बहाए बिना पापों की क्षमा है ही नहीं” (इब्रानियों 9:21)। यद्यपि परमेश्वर अपने प्रेम में होकर हमें बचाना चाहता है, परन्तु वह हमारे बदले मर नहीं सकता है, क्योंकि वह आत्मा है। फिर भी परमेश्वर ने अपने प्रेम में होकर मनुष्यों के पापों की क्षमा हेतु स्वयं एक देह को तैयार किया, क्योंकि पशुओं के लहू से मनुष्यों के पापों की क्षमा होना असम्भव है। उस देह में परमेश्वर पुत्र ने यीशु मसीह के रूप में स्वयं को एक ही बार में सदा के लिए बलिदान कर दिया ताकि विश्वास करने वाले पापी नाश न हों परन्तु अनन्त जीवन पाएं। “क्योंकि उसके लिए यह उचित था कि बहुत से पुत्रों को महिमा में लाने के लिए उनके उद्धार के कर्ता को दुःख उठाने के द्वारा सिद्ध करे” (इब्रानियों 2:10)। अतः यीशु देहधारण करके आया ताकि वह बहुतों की फिरौती के मूल्य में अपने प्राण दे सके (मरकुस 10:45)।

हमारे जीवन हेतु आदर्श उदाहरण रखने के लिए

परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप और समानता में रचा था ताकि वह परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करते हुए उसकी महिमा के लिए जीवन जी सके। लेकिन मनुष्य अपने पापों और अपराधों के कारण परमेश्वर की इच्छानुसार जीवन व्यतीत करने में असफल हो गया (रोमियों 3:10-18)। सम्पूर्ण मानव इतिहास में एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं हुआ (यीशु को छोड़कर) जो दूसरों के लिए अपने जीवन के द्वारा सिद्ध और पवित्र जीवन का उदाहरण रख सके। परमेश्वर ने अपने प्रेम में होकर अपने एकलौते पुत्र यीशु मसीह को इस संसार में भेजा ताकि वह मनुष्यों के मध्य रहकर अपने जीवन से एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करे। ऐसा आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करने लिए उसे सब बातों में (पाप को छोड़कर) हमारे समान बनना, परीक्षा की दशा में दुख उठाना, सब बातों में हमारे ही समान परखा जाना, परन्तु फिर भी निष्पाप निकलना अनिवार्य था। अतः इस आदर्श उदाहरण को प्रस्तुत करने के लिए यीशु मसीह ने देहधारण करके मनुष्यों के मध्य निवास किया था। इसीलिए पतरस विश्वासियों से कहता है कि “तुम इसी अभिप्राय से बुलाए गए हो, क्योंकि मसीह ने भी तुम्हारे लिए दुख सहा और तुम्हारे लिए एक आदर्श रखा कि तुम भी उसके पद-चिन्हों पर चलो” (1पतरस 2:21-25)। 

आदर्श उदाहरण को प्रस्तुत करने के लिए यीशु मसीह ने देहधारण करके मनुष्यों के मध्य निवास किया था।

यीशु मसीह के देहधारण का अर्थ हमारे के लिए

यीशु मसीह जो परमेश्वर के स्वरूप में होते हुए भी अपने आपको ऐसा शून्य कर दिया कि दास का स्वरूप धारण करके मनुष्य बन गया। उसने अपने आपको इतना दीन किया कि मृत्यु वरन् क्रूस की दर्दनाक, शर्मनाक और शापित मृत्यु को सह लिया ताकि हम सब परमेश्वर के प्रकोप से बच सकें। यदि आप यीशु के पीछे चल रहे हैं तो उसके जैसे स्वभाव में बढ़ते जाएं। और यदि आज आपने परमेश्वर के देहधारण के अर्थ को समझा है तो मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप यीशु को अपने हृदय में पहला स्थान दें। क्रिसमस का सच्चा आनन्द खाना-पीना, घूमना और मित्रों या सम्बन्धियों से मिलना नहीं है, परन्तु आपके हृदय में यीशु का आना है। जार्ज व्हाइटफील्ड ने कहा “यीशु एक व्यक्ति में परमेश्वर और मनुष्य था, कि परमेश्वर और मनुष्य पुनः एक साथ प्रसन्न हो सकें”। प्रिय मित्रों, यीशु के सामने अपने पापों को मान लें आज से उसके पीछे चलें, क्योंकि अब वह परमेश्वर के दाहिने हाथ विराजमान है जो एक दिन हम सबका न्याय करने के लिए आएगा। उस दिन यीशु के नाम पर प्रत्येक घुटना झुकेगा और प्रत्येक जीभ अंगीकार करेगी कि यीशु मसीह ही प्रभु है, परन्तु बहुत सारे लोग उसके राज्य से बाहर रहेंगे। यदि आप परमेश्वर के राज्य में स्थान पाना चाहते हैं तो अभी अपने पापों से पश्चाताप करके यीशु पर विश्वास कीजिए।

परमेश्वर के राज्य में स्थान पाना चाहते हैं तो अभी अपने पापों से पश्चाताप करके यीशु पर विश्वास कीजिए।

मार्ग सत्य जीवन सत्य वचन चर्च की सेवकाई है, जो हिन्दी कलीसिया के अगुवों तथा विश्वासियों की आत्मिक उन्नति तथा बाइबल के ज्ञान की बढ़ोत्तरी के लिए मुफ्त में संसाधन उपलब्ध कराती है।

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