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डिज़ाइरिंग गॉड

मैं चाहता हूँ कि विश्वासी ख्रीष्ट में परमेश्वर के द्वारा प्रेम किए जाने का जितना अधिक सम्भव हो उतना आनन्द लें। और मैं चाहता हूँ कि इस रीति से हम से प्रेम करने के लिए जितना अधिक सम्भव हो उतना परमेश्वर की बड़ाई हो। इसी कारण अपनी मृत्यु के
सबसे आधारभूत प्रार्थना, जो हम बाइबल पढ़ने के लिए कर सकते हैं, वह यह है कि परमेश्वर हमें इस पुस्तक को पढ़ने की अभिलाषा दे। केवल इच्छा  ही नहीं — यह तो द्वितीय उत्तम बात है — परन्तु अभिलाषा  प्रथम उत्तम बात है।  यही  प्रेरित पतरस ने कहा कि
मसीही किस अर्थ के अनुसार परमेश्वर या मसीह या अपनी बुलाहट के योग्य  हैं? और किस अर्थ के अनुसार हम अयोग्य  हैं? एक ओर तो, यीशु और पौलुस दोनों सिखाते हैं कि हमें यीशु और उसकी बुलाहट के योग्य  होना चाहिए।  यीशु: यीशु कहता है कि “पर सरदीस में
मसीही, आप कैसे जानते हैं कि जब आप कल सवेरे जागेंगे, तो आप तब भी एक विश्वासी होंगे? और प्रत्येक सवेरे जब तक कि आप यीशु से न मिलें?  बाइबलीय उत्तर है: परमेश्वर इसे अवश्य सम्भव करेगा। क्या आप इससे सहमत हैं? क्या यह आपको व्याकुल करता है, इसे
चुनाव के रहस्य का गहन अध्ययन करना यदि कोई व्यक्ति मुझसे चुनाव को समझाने के लिए कहे, तो मैं उस व्यक्ति से यह पूछने के द्वारा आरम्भ करूँगा कि वह मुझे बताए कि वह बचाया कैसे गया। मुझे बताइए कि आपका हृदय परिवर्तन कैसे हुआ था। अपने प्रश्न को
आप में से अनेक लोगों के लिए इस समय — तथा आप में से अन्य लोगों के लिए समय आने वाला है — जिसमें आज्ञाकारिता स्वप्न की समाप्ति के नाई प्रतीत होती है। आपको ऐसा लग रहा होगा कि यदि आप वह करेंगे जिसके लिए परमेश्वर का वचन या
सुसमाचार क्या है?सुसमाचार क्या है? इसे मैं एक वाक्य में बताऊंगा। सुसमाचार एक संदेश है कि यीशु मसीह, वह धर्मी जन, हमारे पापों के लिए मरा और पुनः जी उठा, अपने सब शत्रुओं पर अनन्तकाल के लिए विजयी हुआ, इसीलिए जो विश्वास करते हैं उन पर अब दण्ड की
संसार के पास प्रस्तुत करने के लिए जो कुछ भी है हमें उससे बढ़कर हमारे प्रतिफल के रूप में परमेश्वर की श्रेष्ठता पर चिन्तन करने की आवश्यकता है। यदि हम ऐसा नहीं करते हैं, तो सभी लोगों के समान हम भी संसार से प्रेम करेंगे और सबके जैसा ही
परमेश्वर में अप्रतिबन्धित (बिना किसी मांग का) प्रेम उपस्थित है, परन्तु इसका अर्थ वह नहीं है जो अधिकांश लोग सोचते हैं।  यह बचाने वाला प्रेम नहीं है जो वह सबके लिए रखता है। अन्यथा सब लोग बचाए जाएंगे, क्योंकि उन्हें किसी भी मांगों को पूरा नहीं करना होगा, यहाँ
प्रेम के अस्थायी मूल्य पर ध्यान मत दीजिए, और परमेश्वर की असीम श्रेष्ठ प्रतिज्ञाओं पर भरोसा रखने से संकुचाएं नहीं। यदि आप पीछे हटते हैं, तो आप केवल प्रतिज्ञाओं को ही नहीं खोएंगे, वरन आप नाश हो जाएंगे। नरक दांव पर लगा है चाहे हम पीछे हटें या दृढ़ता
जब पौलुस शरीर के कार्यों को “आत्मा के द्वारा” (रोमियों 8:13) घात करने के लिए कहता है, मैं उसे इस प्रकार समझता हूँ कि हमें आत्मा के अस्त्र-शस्त्र में से एक हथियार का उपयोग करना चाहिए जो घात करने के कार्य में आता है; अर्थात, तलवार, “जो परमेश्वर का
यीशु की मृत्यु पापों को उठाती है। यह मसीहियत का मुख्य केन्द्र है, और सुसमाचार का केन्द्र है, और संसार में परमेश्वर के उद्धार के महान कार्य का केन्द्र है। जब मसीह मरा तो उसने पापों को उठा लिया। उसने स्वयं के पापों को नहीं उठाया। उसने उन पापों
आपके मन में एक अस्पष्ट, दोष बोध होना कि आप घटिया व्यक्ति हैं तथा पाप के प्रति कायल होना, दोनों बातें एक ही समान नहीं हैं। भीतर से सड़ाहट का आभास करना और पश्चाताप करना, दोनों एक जैसे नहीं हैं।  आज की सुबह मैंने प्रार्थना करना आरम्भ किया, और
हम कदाचित ही अपने कष्टों केअति छोटे  कारणों को जानते हैं, परन्तु बाइबल हमें विश्वास को बनाए रखने वाले बड़े  कारण अवश्य देती है।  भला यह होगा कि इनमें से कुछ को स्मरण रखने का कोई उपाय हो, ताकि जब हम एकाएक पीड़ित हों, या दूसरों के दुख में
“कड़वाहट” प्रायः क्रोध और द्वेष से सम्बन्ध रखती है। परन्तु क्या इब्रानियों 12:15 में इसका यही अर्थ है: “ध्यान रखो कि कोई परमेश्वर के अनुग्रह से वंचित न रह जाए, या कोई कड़वी जड़  फूटकर कष्ट का कारण न बने, जिससे कि बहुत से लोग अशुद्ध हो जाएं”? मुझे