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डिज़ाइरिंग गॉड

जब वह नगर के निकट पहुंच रहा था तो वह शान्त प्रतीत हो रहा था। उसके मृतक मित्र की बहन उससे बाहर आकर मिली। उसने उसे सत्य और अनुग्रह के साथ सान्त्वना दी। परन्तु फिर उसने दूसरी बहन को देखा, जो प्रत्यक्ष रूप से अधिक भावुक थी। और फिर
ख्रीष्ट जन्मोत्सव के आकर्षण का हमारे ऊपर एक विचित्र प्रभाव है, यहां तक कि अविश्वसियों और धर्मनिरपेक्ष प्रतीत होते हुए लोगों पर भी। इस उत्सव काल में एक प्रकार का आकर्षण पाया जाता है, एक प्रकार की “भावना” या “मोह” जो शीतकालीन संक्रांति उत्सव को आज भी पाश्चात्य देशों
यह संसार के इतिहास में वह सबसे भयानक दिन था।  कोई भी घटना कभी भी इतना अधिक दु:खद नहीं रही है, और न ही भविष्य की कोई  घटना कभी इसके जैसी होगी। न कोई अकस्मात आक्रमण, न कोई राजनीतिक हत्या, न कोई वित्तीय पतन, न कोई सैन्य चढ़ाई, न
मसीह के अनेकों मुकुट यीशु मसीह किसी भी अन्य राजा से भिन्न राजा है। मानवीय राजाओं की अपनी सामर्थ्य और निर्बलताएं होती हैं, उनके विशेष गुण और दोष, विशेष गौरवपूर्ण बातें जिनके लिए उन्हें स्मरण किया जाता है और अपरिहार्य अपर्याप्तताएं जिन्हें वे भूल जाना चाहते हैं। फिर भी
घमण्ड को भेदने हेतु परमेश्वर का न भानेवाला उपहार  क्या मैं दीन हूँ?  इस प्रश्न का उत्तर देना कठिन है। पहली बात, दीन लोग स्वयं के विषय में सोचने में अधिक समय नहीं व्यतीत करते हैं, विशेष रीति से अपनी दीनता के बारे में। परन्तु पूछे जाने के लिए
सुनना सबसे आसान कार्यों में से एक है जिसे आप कभी करेंगे, और सबसे कठिन कार्य भी है।  एक अर्थ में, सुनना आसान है — या श्रुति  सरल है। यह पहल करने और शक्ति की मांग नहीं करता है जो बोलने में आवश्यक होती है। यही कारण है कि
“प्रार्थना करो कि तुम प्रलोभन में न पड़ो।” यीशु अपनी व्यथा के बगीचे में घुटने टेकता है और अपने लोगों को प्रार्थना करने हेतु निर्देश देता है, केवल पाप  के विरुद्ध ही नहीं, परन्तु प्रलोभन  के विरुद्ध भी। अपने जीवन की कठिन प्रलोभन के आरम्भ में ही, वह अपने
प्रेम बाइबल के केन्द्र में है।  परमेश्वर ने हम से इतना प्रेम किया, कि उसने अपने एकलौते प्रिय  पुत्र को भेज दिया हमसे लहू के द्वारा प्रेम करने के लिए, ताकि हम भी उसी प्रकार से प्रेम करें  और इस प्रिय  पुत्र को बहुमूल्य जानें (यूहन्ना 3:16, प्रकाशितवाक्य 1:5)।
2004 में जॉन पाइपर ने नीचे दिए लेख में लिखा, “परमेश्वर और ख्रीष्टीय लोग कैसे ख्रीष्ट को बहुमूल्य समझते हैं”: ब्रह्मांड और ख्रीष्टीय जीवन का जो मुख्य अनुभव है – अर्थात ख्रीष्ट को बहुमूल्य समझना – वह कलीसियाओं में निरन्तर बना रहता है। परमेश्वर ने निर्धारित कर दिया है
यीशु के पुनरुत्थान दिवस की मुख्य बात यह है कि हमें …रिक्त स्थान…  मिलता है। आप इस वाक्य के रिक्त स्थान को कैसे पूर्ण करेंगे? …हम धर्मी ठहराया जाना मिलता है। …हमें ख्रीष्ट में नया जीवन मिलता है। …हमें अविनाशी भौतिक देह की प्रतिज्ञा मिलती है। …हमें अनन्त आनन्द
मैं चाहता हूँ कि विश्वासी ख्रीष्ट में परमेश्वर के द्वारा प्रेम किए जाने का जितना अधिक सम्भव हो उतना आनन्द लें। और मैं चाहता हूँ कि इस रीति से हम से प्रेम करने के लिए जितना अधिक सम्भव हो उतना परमेश्वर की बड़ाई हो। इसी कारण अपनी मृत्यु के
सबसे आधारभूत प्रार्थना, जो हम बाइबल पढ़ने के लिए कर सकते हैं, वह यह है कि परमेश्वर हमें इस पुस्तक को पढ़ने की अभिलाषा दे। केवल इच्छा  ही नहीं — यह तो द्वितीय उत्तम बात है — परन्तु अभिलाषा  प्रथम उत्तम बात है।  यही  प्रेरित पतरस ने कहा कि
मार्टिन लूथर, जॉन कैल्विन, और उलरिख़ ज़्विंग्ली जैसे प्रथम महान धर्मसुधारकों ने कभी भी अपनी शिक्षाओं को उन पाँच संक्षिप्त वाक्यांशों में सारांशित नहीं किया जिन्हें हम अब पाँच सोला  के नाम से जानते हैं। जैसे जैसे समय बीतता गया ये सोला  रोमी कैथोलिक कलीसिया के साथ हुए विवाद
मसीही किस अर्थ के अनुसार परमेश्वर या मसीह या अपनी बुलाहट के योग्य  हैं? और किस अर्थ के अनुसार हम अयोग्य  हैं? एक ओर तो, यीशु और पौलुस दोनों सिखाते हैं कि हमें यीशु और उसकी बुलाहट के योग्य  होना चाहिए।  यीशु: यीशु कहता है कि “पर सरदीस में
मसीही, आप कैसे जानते हैं कि जब आप कल सवेरे जागेंगे, तो आप तब भी एक विश्वासी होंगे? और प्रत्येक सवेरे जब तक कि आप यीशु से न मिलें?  बाइबलीय उत्तर है: परमेश्वर इसे अवश्य सम्भव करेगा। क्या आप इससे सहमत हैं? क्या यह आपको व्याकुल करता है, इसे