परमेश्वर की सबसे सफल असफलता

परमेश्वर की सबसे सफल असफलता

आगमन | सोलहवाँ दिन
इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया और उसको वह नाम प्रदान किया जो सब नामों में श्रेष्ठ है, कि यीशु के नाम पर प्रत्येक घुटना टिके, चाहे वह स्वर्ग में हो या पृथ्वी पर या पृथ्वी के नीचे, और परमेश्वर पिता की महिमा के लिए प्रत्येक जीभ अंगीकार करे कि यीशु मसीह ही प्रभु है। (फिलिप्पियों 2:9–11)

क्रिसमस परमेश्वर की सबसे सफल असफलता के आरम्भ को चिह्नित करता है। उसे पराजित प्रतीत होने वाली परिस्थिति के द्वारा अपनी सामर्थ्य को प्रदर्शित करने में सदा आनन्द प्राप्त होता है। वह युक्‍तिपूर्ण विजय प्राप्त करने के लिए सुनियोजित रीति से पीछे हटता है।

पुराने नियम में, यूसुफ, जो याकूब के बारह पुत्रों में से एक था, उससे स्वप्न में महिमा और सामर्थ्य प्राप्ति की प्रतिज्ञा की गयी थी (उत्पत्ति 37:5-11)। परन्तु उस विजय को प्राप्त करने के लिए उसे मिस्र में दास बनना पड़ा। और, जैसे कि यह पर्याप्त नहीं था, जब उसकी स्थिति में उसकी खराई के कारण सुधार हुआ, तो उसे दास से भी निकृष्ट बना दिया गया: अर्थात एक बन्दी।

परन्तु यह सब योजना के अन्तर्गत था। परमेश्वर द्वारा बनाई गई योजना उसके स्वयं और उसके परिवार के भले और अन्ततः सम्पूर्ण जगत के भले के लिए! क्योंकि वहाँ कारागार में वह फिरौन के प्याऊ से मिला, जो अन्ततः उसे फिरौन के पास ले आया, जिसने उसे मिस्र पर अधिकारी नियुक्त कर दिया। और अन्ततः, उसका स्वप्न सच हो गया। उसके भाई उसके सामने झुक गए, और उसने उन्हें भुखमरी से बचाया। महिमा प्राप्ति के लिए यह कितना असम्भावित मार्ग है।

परन्तु यह परमेश्वर की रीति है—यहाँ तक ​​कि उसके पुत्र के लिए भी। उसने अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया कि दास का स्वरूप धारण कर लिया। एक दास से भी निकृष्ठ—अर्थात एक बन्दी—और उसे घात किया गया। परन्तु यूसुफ के समान, उसने अपनी खराई बनाए रखी। “इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया और उसको वह नाम प्रदान किया जो सब नामों में श्रेष्ठ है, कि यीशु के नाम पर प्रत्येक घुटना टिके , चाहे वह स्वर्ग में हो या पृथ्वी पर या पृथ्वी के नीचे” (फिलिप्पियों 2:9-10)।

और हमारे लिए भी परमेश्वर का मार्ग यही है। हमें महिमा की प्रतिज्ञा दी गयी है—जैसा कि रोमियों 8:17 में कहा गया है यदि हम उसके साथ दु:ख उठाएंगे। तो ऊपर जाने का मार्ग नीचे की ओर से जाता है। तथा आगे जाने का मार्ग पीछे की ओर से जाता है। सफलता का मार्ग परमेश्वरीय रीति से नियुक्त असफलताओं के माध्यम से ही है। वे सदा विफलता के समान दिखेंगे और प्रतीत होंगे।

परन्तु यदि यूसुफ और यीशु हमें इस क्रिसमस किसी बात की शिक्षा देते हैं, तो वह यह है: शैतान और पापी लोगों ने जिसके द्वारा बुराई करने की ठानी थी, “परमेश्वर ने उसी को भलाई के लिए ले लिया!” (उत्पत्ति 50:20)।

भयभीत सन्तो, नया साहस लो
जिन घटाओं से तुम भयभीत हो
वे करुणा से भरे हैं और खूब बरसेंगे
तुम्हारे सिर पर आशीषों के समान।4


4 विलियम कूपर, “परमेश्वर रहस्यमय रीति से कार्य करता है,” 1773।

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