यीशु ख्रीष्ट (मसीह) ही प्रभु है, जो हमारे उद्धार के लिए जन्मा।

इस जगत में, प्रतिदिन हज़ारों और लाखों बच्चों का जन्म होता है और उनके जन्म दिन को अनेकों लोग अपने परिवारों, सम्बन्धियों और मित्रों के साथ मिलकर खुशी मनाते हैं। यह कोई नई और अद्भुत बात नहीं है। 

परन्तु आज हम इस लेख में, एक ऐसे बच्चे के विषय में बात करेंगे जो आज से लगभग 2021 वर्ष पूर्व एशिया महाद्वीप के मध्य-पूर्वी देश – इस्राएल के बैतलहम में जन्मा। जिसका जन्म सम्पूर्ण जगत में और सम्पूर्ण मानव इतिहास में एक अद्भुत, चौंका देने वाला, और हम सब के मन को आनन्द से प्रफुल्लित कर देने वाला है। आइए हम जानें कि – कौन है ये बालक जो लगभग दो वर्ष पूर्व जन्मा। उसका नाम क्या है जिसके जन्मोत्सव को आज भी हम हर्षोल्लास मनाते हैं?

यह बालक यीशु है।

“यीशु” नाम का अर्थ – उद्धारकर्ता या बचाने वाला है।

यीशु के जन्म से पूर्व ही स्वर्गदूत ने मरियम के मंगेतर युसुफ को बता दिया था कि “जो बालक मरियम के गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है। वह पुत्र को जन्म देगी, और तू उसका नाम यीशु रखना, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा ” (मत्ती 1:21)।

बालक यीशु का जन्म सम्पूर्ण मानव इतिहास में, समस्त समयकाल हेतु अद्भुत, महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करता है।

बालक यीशु का जन्म सम्पूर्ण मानव इतिहास में, समस्त समयकाल हेतु अद्भुत, महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करता है। यीशु ने इस संसार में बालक के रूप में देहधारी होकर उस चरनी में जन्म लिया, ताकि वह पाप, मृत्यु, और शैतान की दासता में जकड़े हुए लोगों का छुटकारा या उद्धार करे।

हमने अब तक देखा कि यह बालक एक आम बालक नहीं है, परन्तु यह बालक तो यीशु है अर्थात् हमारा उद्धारकर्ता है। यह बालक अद्भुत है। इस बालक का नाम व शीर्षक अत्यन्त ही महान हैं।

आइए, इस बालक के शीर्षकों को जानें क्योंकि उसके शीर्षक हमें उसकी सर्वश्रेष्ठ पहचान से परिचित कराएंगे। 

यह बालक प्रतिज्ञात “मसीहा ” अर्थात् ख्रीष्ट है।

हिन्दी का “मसीह” शब्द इब्रानी भाषा के “मसायाह” शब्द से आता है, जिसका भावार्थ मस्सा किया हुआ जन अर्थात् अभिषिक्त जन। हिन्दी का “ख्रीष्ट” शब्द यूनानी भाषा के “ख्रिष्टॉस” तथा अंग्रेजी के “क्राइस्ट” शब्द से आता है जिसका अर्थ अभिषिक्त जन या मस्सा किया हुआ जन ही है।

मसीहा का विचार सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र बाइबल में विशिष्ट है। “मसीहा” वह परमेश्वर का अभिषिक्त सामर्थी राजा या जन है, जो अपने लोगों को छुड़ाएगा और शान्ति को स्थापित करेगा। परमेश्वर ने अपनी अनन्त योजना में होकर हज़ारों वर्ष पूर्व अपने लोगों का उनके पापों की दासता से छुटकारा करने अर्थात् उद्धार करने के प्रतिज्ञा की थी जिसका पूर्तिकरण यीशु ख्रीष्ट में होता है।

मसीहा की प्रतिज्ञा उत्पत्ति 3 से लेकर सम्पूर्ण पुराने नियम में पाया जाता है। मानव इतिहास में महान पतन के पश्चात परमेश्वर ने लोगों का उद्धार व शान्ति, समस्त बातों की पुनर्स्थापना एक मसीहा के द्वारा स्थापित किया जाना नियुक्त किया। इसलिए बाइबल का प्रथम भाग (पुराना नियम) भविष्य में आने वाले मसीहा की ओर इंगित करता है। भूतपूर्व परमेश्वर के लोगों ने उस आने वाले मसीहा की प्रतिक्षा करते हुए जीवन जिया। हम बड़े ही सौभाग्यशाली हैं कि मसीहा हमारे लिए यीशु के रूप में इस संसार में आ गया।

संसार का सृजनहार परमेश्वर, मसीहाई राजा या अभिषिक्त जन,समस्त ब्रह्माण्ड का प्रभु, त्रिएक परमेश्वर का द्वितीय जन परमेश्वर पुत्र एक मसीहा बनकर चरनी में आ गया ताकि हमें और आप को पाप और मृत्यु से छुड़ा ले। यह मसीहा दुख उठाने वाला दास बनकर हमारे लिए जिया, दुःख उठाया और उस कलवरी क्रूस पर हमारे लिए बलिदान हो गया (यशायाह 53:2-12, फिलिप्पियों 2:6-11)। ताकि हमारे और आप के पापों के दण्ड को चुका दे और पाप तथा अनन्त मृत्यु की दासता से छुड़ा ले। वह हमारे स्थान पर क्रूस के ऊपर बलिदान हो गया, मारा गया, गाड़ा गया और तीसरे दिन मृतकों में जी उठा और स्वर्ग पर उठा लिया गया और आज वह स्वर्ग के सिंहासन पर विराजमान है, वह समस्त सृष्टि पर प्रभुता करता है।

संसार का सृजनहार परमेश्वर, मसीहाई राजा या अभिषिक्त जन,समस्त ब्रह्माण्ड का प्रभु, त्रिएक परमेश्वर का द्वितीय जन परमेश्वर पुत्र एक मसीहा बनकर चरनी में आ गया ताकि हमें और आप को पाप और मृत्यु से छुड़ा ले।

यह बालक समस्त ब्रह्माण्ड का “प्रभु ” है।

“प्रभु” का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जिसके पास प्रभुता हो, जिसके पास समस्त अधिकार हो, जो सब कुछ पर शासन करता हो, जो सब कुछ को नियंत्रित करता हो, ऐसे जन को प्रभु कहा जाता है। ऐसी प्रभुता व अधिकार केवल स्वयं त्रिएक परमेश्वर के पास है, जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का सृजनहार और पालनहार है।

दो हज़ार वर्ष पूर्व जन्मा यह बालक कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है, परन्तु त्रिएक परमेश्वर का द्वितीय जन है। वह स्वयं परमेश्वर है, जिसके पास प्रभुता है। जिसकी प्रतिज्ञा यशायाह नबी के द्वारा बालक यीशु के जन्म से लगभग 700 वर्ष पूर्व की गई थी – “हमारे लिए एक बालक उत्पन्न होगा, हमें एक पुत्र दिया जाएगा; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्भुत करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। उसकी प्रभुता की बढ़ती का और उसकी शान्ति का अन्त न होगा। ” (यशायाह 9:6-7)।  

यह बालक यहूदा के कुल से निकलने वाला शासक अर्थात् प्रभु है (मीका 5:2)।

यह बालक राजा दाऊद की नगरी में जन्मा, दाऊद की सन्तान ही नहीं है, परन्तु यह राजा दाऊद का प्रभु है अर्थात् वह दाऊद का परमेश्वर है। (मत्ती 1:1, लूका 2:11, मरकुस 12:35-37, भजन संहिता 110:1)।

यह बालक दानिय्येल 7:13-14 में पाया जाने वाला मनुष्य का पुत्र है जिसे प्रभुता, महिमा और राज्य दिया गया है। जिसका प्रभुत्व व सिंहासन सनातनकाल तक अटल है और जिसका राज्य अभिनाशी है (दानिय्येल 7:13-14, 2 शमूएल 7:14)।

जब सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का प्रभु परमेश्वर देहधारण करके एक बालक (यीशु) रूप में जन्मा, तो स्वर्गदूतों के द्वारा स्तुति की गई और आनन्द मनाया गया। स्वर्गदूतों ने इस बात का सन्देश दिया और पुष्टि की, कि “दाऊद के नगर में तुम्हारे लिए उद्धारकर्ता जन्मा है और यही मसीह प्रभु  है” (लूका 2:11)। एक बालक के रूप में जन्मे प्रभु की महिमा और स्तुति स्वर्गदूतों ने और चरवाहों ने की। यह बालक यीशु न केवल स्वर्ग के सिंहासन को छोड़कर पृथ्वी पर देहधारी हुआ, परन्तु उसने हमारे स्थान पर सिद्ध जीवन जिया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु वरन क्रूस की मृत्यु भी सह ली (फिलिप्पियों 2:8)। वह हमारा मारा गया, गाड़ा गया और तीसरे दिन मृतकों में से जी उठा।

हमारा प्रभु परमेश्वर (यीशु) स्वयं प्रतिज्ञात मसीहा के रूप में देहधारी होकर चरनी में आ गया है, ताकि वह हम लोगों का पापों से उद्धार करे।

वास्तव में, यह बालक यीशु ही हमारा प्रभु और मसीह है – “परमेश्वर पिता ने उसे (यीशु ख्रीष्ट को) वह नाम प्रदान किया जो सब नामों में श्रेष्ठ है, कि यीशु के नाम पर प्रत्येक घुटना टिके, चाहे वह स्वर्ग में हो या पृथ्वी पर  या पृथ्वी के नीचे, और परमेश्वर पिता की महिमा के लिए प्रत्येक जीभ अंगीकार करे कि यीशु मसीह ही प्रभु है” (फिलिप्पयों 2:9-11)।

इसलिए प्रिय भाई-बहनो, हमारे लिए ख्रीष्ट-जन्मोत्सव हर्षोल्लास की बात है कि हमारा प्रभु परमेश्वर (यीशु) स्वयं प्रतिज्ञात मसीहा के रूप में देहधारी होकर चरनी में आ गया है, ताकि वह हम लोगों का पापों से उद्धार करे और जो बैठे हैं अंधेरे वो आकर रोशनी देखें। इसलिए मैं आप से विनती करना चाहूंगा कि यीशु के पास आइए, अपने घुटने टेकें और उसकी महिमा करें और अंगीकार करें कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

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