मजूसियों का मसीहा

मजूसियों का मसीहा

आगमन | सातवाँ दिन
राजा हेरोदेस के दिनों में जब यहूदिया के बैतलहम में यीशु का जन्म हुआ, तो देखो, पूर्व दिशा से ज्योतिषी यरूशलेम में पहुंचकर पूछने लगे, “यहूदियों का राजा जिसका जन्म हुआ कहां है?” (मत्ती 2:1–2)

लूका के विपरीत, मत्ती हमें यीशु से मिलने आने वाले चरवाहों के विषय में नहीं बताता है। वह तुरन्त ही विदेशियों—अन्यजातियों, गैर-यहूदियों—पर ध्यान केन्द्रित करता है जो यीशु की आराधना करने के लिए पूर्व से आ रहे हैं।

इसलिए, मत्ती यीशु को अपने सुसमाचार के प्रारम्भ में और अन्त में न केवल यहूदियों के लिए वरन सभी राष्ट्रों के लिए एक सम्प्रभु मसीहा के रूप में चित्रित करता है।

यहाँ उसके पहले उपासक दरबार के जादूगर, या ज्योतिषी, या ज्ञानी पुरुष हैं जो इस्राएल के नहीं वरन पूर्व से थे—सम्भवतः बेबीलोन से। वे लोग अन्यजाति थे। और पुराने नियम के अनुष्ठानिक नियमों के अनुसार, वे अशुद्ध थे।

और मत्ती के अन्त में, यीशु के अन्तिम शब्द हैं, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिए जाओ और सब जातियों के लोगों को चेले बनाओ”(मत्ती 28:18-19)।

इसने न केवल हमारे जैसे अन्यजातियों के लिए द्वार खोला कि हम मसीहा में आनन्द मनाएं; परन्तु इसने इस बात का भी प्रमाण जोड़ा कि वह ही मसीहा था क्योंकि बारम्बार की गई भविष्यवाणियों में से एक यह थी कि वास्तव में, सभी राष्ट्र और राजा उसको संसार का शासक मानते हुए उसके निकट आएंगे। उदाहरण के लिए, यशायाह 60:3: 

“देश-देश के लोग तेरे प्रकाश की ओर तथा राजा तेरे आरोहण के प्रताप की ओर आएंगे।”

इसलिए, मत्ती यीशु के मसीहाईपन के लिए प्रमाण जोड़ता है और  दिखाता है कि वह मसीहा है—एक राजा, और प्रतिज्ञा की पूर्ति करने वाला—सभी राष्ट्रों के लिए, मात्र इस्राएल के लिए नहीं।

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