क्या सम्पूर्ण कलीसिया को सुसमाचार प्रचार का कार्य करना चाहिए ?

यीशु ने कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिए जाओ और सब जातियों के लोगों को चेले बनाओ …” ( मत्ती 28:18-20)।

आज अधिकांश ख्रीष्टीय लोग क्यों सुसमाचार का प्रचार नहीं करते है ? वे सुसमाचार का प्रचार इसलिए नहीं करते हैं क्योंकि वे डरते हैं, उन्हें मालूम नहीं है कि सुसमाचार प्रचार कैसे करें और हतोत्साहित होते हैं कि अधिकांश लोग प्रति-उत्तर नहीं देते हैं। कई विश्वासी भ्रमित हैं कि सुसमाचार प्रचार का कार्य उनका नहीं है; क्योंकि वे सोचते हैं कि सुसमाचार प्रचार का कार्य केवल पास्टर या सेमीनरी के विद्यार्थी या जो सेवकाई की तैयारी कर रहे हैं केवल उनके लिए है, या फिर उन्हें जिनको पैसा मिलता है उनके लिए है। इसलिए, इस लेख में हम इस प्रश्न का उत्तर देखने का प्रयास करेंगे, कि क्या सम्पूर्ण कलीसिया को सुसमाचार प्रचार का कार्य करना चाहिए ? 

“सुसमाचार प्रचार करना” यीशु का महान आदेश है।
सबसे पहले यह जानना महत्वपूर्ण है कि सुसमाचार प्रचार के कार्य का विचार केवल मनुष्यों द्वारा नहीं बनाया गया है। इसका आविष्कार कलीसिया ने नहीं किया है। इसके विपरीत यह मसीह की ओर से एक महान आज्ञा है। जब हम नये नियम में देखते हैं, सुसमाचार प्रचार का कार्य केवल प्ररितों तक सीमित नहीं है। यीशु ने अपने चेलों को आदेश दिया है, उसने कहा, स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिए जाओ और सब जातियों के लोगों को चेले बनाओ…… ( मत्ती 28:18-20)।

 यदि यह सत्य है कि यीशु एक सच्चा और जीवित परमेश्वर है जो हमारे पापों के लिए मर गया और वह अनन्त जीवन का एकमात्र मार्ग है; तब प्रत्येक व्यक्ति को सुसमाचार सुनने का अवसर मिलना चाहिए।

यह महान आदेश आज हम पर भी लागू होता है। जैसे बहुत सारे लोग सोचते हैं कि यीशु मसीह का महान आदेश पास्टर या सेमीनरी के विद्यार्थी या जो सेवकाई की तैयारी कर रहे है केवल उनके लिए है, लेकिन यह केवल उनके लिए ही नहीं किन्तु प्रत्येक विश्वासी के लिए है। क्योंकि यह महान आदेश ग्यारह चेलों की मृत्यु के बाद समाप्त नहीं हुआ है। क्योंकि यीशु मसीह ने इस महान आदेश में प्रतिज्ञा की है कि वह युग के अंत तक साथ रहेगा। सुसमाचार प्रचार का कार्य युग के अंत तक चलता रहेगा। पास्टर मार्क डेवर कहते हैं कि “सभी चेलों को यह सुनिश्चित करना है कि वे सुसमाचार को सभी राष्ट्रों में पहुंचाने के लिए उत्तरदायी हैं।” बाइबल बताती है कि यह कार्य सम्पूर्ण कलीसिया तथा प्रत्येक विश्वासी के लिए है (1 पतरस 2: 9)।  इस प्रकार से सुसमाचार प्रचार का कार्य समस्त कलीसिया तथा कलीसिया के सब सदस्यों का कार्य है। 

“सुसमाचार प्रचार” के प्रति आरम्भिक कलीसिया का समर्पण:
हम देखते हैं कि आरम्भिक कलीसिया के विश्वासी यीशु के महान आदेश का पालन करते हुए सुसमाचार प्रचार करने के प्रति समर्पित थे (प्रेरितों के काम 5:42; 8:25; 13:32; 14:7, 15, 21; 15:35; 16:10; 17:18)। बाइबल बताती है कि वे दृढ़ता से गवाही देकर सामरियों के बहुत से गांवो में सुसमाचार प्रचार करते हुए यरूशलेम को लौट गए (प्रेरितों के काम 8:25)। उनके उत्साह को उनके विरोधियों ने देखा। लूका हमें बताता है कि पौलुस और उनके साथियों ने संसार में उथल-पुथल मचा दी है (प्रेरितों के काम 17:6)।  हम पौलुस के जीवन में भी देखते हैं। पौलुस कहता है, इसलिए यदि मैं सुसमाचार-प्रचार करूं तो यह मेरे लिए कोई घमण्ड की बात नहीं, क्योंकि इसके लिए तो मैं विवश हूं। यदि मैं सुसमाचार-प्रचार न करूं तो मुझ पर हाय! (1कुरिन्थियों 9:16)। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं, जैसे कि बाइबल बताती है, आरम्भिक कलीसिया में परमेश्वर का वचन फैलता गया, चेलों की संख्या अत्यधिक बढ़ती गई और बहुत-से याजकों ने भी इस मत को ग्रहण कर लिया (प्रेरितों के काम 6:7) । 

क्योंकि यीशु ने महान आदेश दिया है कि जाओ और सब जातियों के लोगों को चेले बनाओ… और हमने देखा है कि इस आदेश का पालन कलीसियाई इतिहास में आरम्भिक कलीसिया ने नियमित रीति से समर्पण के साथ किया है, इसलिए वर्तमान में स्थानीय कलीसिया को भी सुमसाचार प्रचार के प्रति समर्पित होना चाहिए। 

“सुसमाचार प्रचार” के प्रति हमारी वर्तमान स्थानीय कलीसिया का समर्पण :
सुसमाचार के प्रचार के लिए स्थानीय कलीसिया की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसलिए स्थानीय कलीसिया को सुसमाचार प्रचार का माध्यम बनायें। जोनाथन लीमैन कहते हैं कि “महान आदेश पूरी कलीसिया को दिया गया एक उत्तरदायित्व है जिसे पूरी कलीसिया द्वारा पूरा किया जाना है। प्रत्येक सदस्य के पास करने के लिए एक कार्य है, आप भी इसमें सम्मिलित हैं।” यदि यह सत्य है कि यीशु एक सच्चा और जीवित परमेश्वर है जो हमारे पापों के लिए मर गया और वह अनन्त जीवन का एकमात्र मार्ग है; तब प्रत्येक व्यक्ति को सुसमाचार सुनने का अवसर मिलना चाहिए। आईये हम लोगों को यीशु के विषय में बताने के लिए प्रार्थना करें। यह एक प्रार्थना है जिसका उत्तर देना परमेश्वर पसंद करते हैं। जिसके साथ आप सुसमाचार बांट रहे हैं, उनको कलीसिया में आमंन्रित करें। अपने घरों को खोलने के द्वारा लोगों की पहुनाई करें। लोगों से वास्तविक प्रेम करें।

सुसमाचार प्रचार करने का अर्थ यह है कि हमें अपने जीवन में सब कुछ देने की आवश्यकता है जैसे, हमारा पैसे, हमारा समय, हमारी ऊर्जा, हमारी रचनात्मकता, हमारा प्रयास, हमारा खून, हमारा पसीना, हमारे आँसू, हमारी प्रतिभाएं, हमारा कौशल आदि। हम सबका उतरदायित्व है कि हम कलीसिया के भीतर और बाहर सुसमाचार का प्रचार करें।

आज लोग पापों में खोये हुए हैं। आज बहुत सारे लोग सत्य को नहीं जानते हैं, वे भटक रहे हैं, वे नाश हो रहे हैं। जीवन की सच्चाई के बारे में उन्हें मालूम नहीं है। हमें सुसमाचार के सत्य को अंधकार के संसार में लेकर जाना है और घोषणा करना है, जहां उस सत्य की वास्तविकता के विषय में किसी को कुछ पता नहीं है। बाइबल बताती है कि सुसमाचार विश्वव्यापी है (यूहन्ना 3:16)। किसी ने सही कहा है, ‘सुसमाचार किसी की निजी सम्पत्ति नहीं है बल्कि यह सार्वजनिक है जो सबके लिए है।’

स्मरण रखें, सुसमाचार प्रचार का कार्य हम इस पृथ्वी पर ही करेंगे। हमारे पास एक ही संदेश है। क्या यह हमारे लिए अदभुत नहीं है! आज हम कैसे सुसमाचार प्रचार कर रहे हैं? पिछली बार कब आपने किसी को सुसमाचार सुनाया था ? हमारे पास वही पुराना सुसमाचार है, जिसमें परमेश्वर की सामर्थ है (रोमियो 1:16)। सुसमाचार यह है कि पवित्रशास्त्र के अनुसार मसीह हमारे पापों के लिए मरा, और गाड़ा गया, तथा पवित्रशास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा (1 कुरिन्थियों 15:1-4)। इसलिए मेरे प्रियों, सुसमाचार प्रचार करते रहिये। सुसमाचार को थामे रहिए। इस कार्य में लगे रहिये। यद्यपि लोग सुसमाचार सुनने के लिए तैयार न हों, फिर भी प्रचार करते रहिये।


1.  Mark Dever, The Gospel & Personal Evangelism (Wheaton, Illinois: Crossway, 2007).

2. Mark Dever, Understanding the Great Commission (Lucknow: For The Truth Press, 2021).