अनादिकाल के प्राचीन का जन्म

अनादिकाल के प्राचीन का जन्म

ख्रीष्ट आगमन | इक्कीसवाँ दिन
इसलिए पिलातुस ने उससे कहा, “तो क्या तू राजा है?” यीशु ने उत्तर दिया, “तू ठीक कहता है कि मैं राजा हूँ। मैंने इसीलिए जन्म लिया और इसलिए इस संसार में आया हूँ कि सत्य की साक्षी दूँ। प्रत्येक वह जो सत्य का है मेरी वाणी सुनता है।”
(यूहन्ना 18:37)

यूहन्ना 18:37 क्रिसमस का एक महान खण्ड है, भले ही यह पृथ्वी पर यीशु के जीवन के अन्त के समय से आता है, न कि आरम्भ से।

ध्यान दें: यीशु न केवल यह कहता है कि उसने जन्म लिया है वरन यह भी कि वह इस “संसार में आया है।” उसके जन्म की विशिष्टता यह है कि उसके जन्म के समय उसकी उत्पत्ति नहीं हुई थी। वह अस्तित्व में था इससे पहले कि वह एक चरनी
में जन्म लेता। नासरत के पुरुष यीशु का व्यक्तितत्त्व, उसका चरित्र, उसका व्यक्तित्व उसके जन्म से पूर्व ही अस्तित्व में था।

इस रहस्य का वर्णन करने के लिए ईश्वरविज्ञानीय शब्द सृजन नहीं, वरन देहधारण है। व्यक्ति, न कि शरीर के रूप में, परन्तु यीशु का आवश्यक व्यक्तितत्त्व उसके मनुष्य के रूप में जन्म से पहले ही अस्तित्व में था। उसका जन्म एक नए व्यक्ति के अस्तित्व में आने के लिए नहीं था, वरन इस संसार में एक अनन्त प्राचीन व्यक्ति के आने के लिए था। यीशु के जन्म से 700 वर्ष पूर्व, मीका 5:2 इसे इस प्रकार बताता है।

परन्तु हे बैतलहम एप्राता,
      यद्यपि तू यहूदा के कुलों में बहुत छोटा है,
फिर भी मेरे लिए तुझ में से
      एक पुरुष निकलेगा जो इस्राएल पर प्रभुता करेगा,
उसका निकलना प्राचीनकाल से,
      वरन अनादिकाल से है।

यीशु के जन्म का रहस्य मात्र यह नहीं है कि उसका जन्म एक कुंवारी से हुआ था। वह आश्चर्यकर्म परमेश्वर द्वारा इस कारण किया गया कि इससे बड़ा आश्चर्यकर्म देखा जा सके; अर्थात, क्रिसमस पर जो बालक उत्पन्न हुआ वह एक ऐसा व्यक्ति था जो “प्राचीनकाल से वरन अनादिकाल से” अस्तित्व में था।

और, इस कारण, उसका जन्म उद्देश्यपूर्ण था। जन्म लेने से पूर्व उसने जन्म लेने के विषय में विचार किया था। उसने अपने पिता के साथ मिल कर एक योजना बनाई थी। और उस महान योजना के एक भाग के विषय में उसने अपने जीवन के अन्तिम घंटों में पृथ्वी पर वर्णन किया: “मैंने इसीलिए जन्म लिया और इसलिए इस संसार में आया हूँ—कि सत्य की साक्षी दूँ। प्रत्येक जो सत्य का है मेरी वाणी सुनता है” (यूहन्ना 18:37)।

वह अनन्त सत्य था। उसने केवल सत्य बोला। उसने प्रेम के सबसे बड़े सत्य को दर्शाया। और वह अपने अनन्त परिवार में उन सभी को इकट्ठा कर रहा है जिन्होंने सत्य से जन्म लिया है। यह अनादिकाल के समय से योजना थी।

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