क्रिसमस के तीन उपहार

क्रिसमस के तीन उपहार

ख्रीष्ट आगमन | पचीसवाँ दिन
बच्चो, कोई तुम्हें धोखा न दे। जो धार्मिकता का आचरण करता है, वह धर्मी है, ठीक वैसा ही जैसा वह धर्मी है। जो पाप करता है वह शैतान से है, क्योंकि शैतान आरम्भ से ही पाप करता आया है। परमेश्वर का पुत्र इस अभिप्राय से प्रकट हुआ कि वह शैतान के कार्य को नष्ट करे। . . . मेरे बच्चो, मैं तुम्हें ये बातें इसलिए लिख रहा हूँ कि तुम पाप न करो। परन्तु यदि कोई पाप करता है तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात यीशु ख्रीष्ट जो धर्मी है; वह स्वयं हमारे पापों का प्रायश्चित्त है, और हमारा ही नहीं वरन समस्त संसार के पापों का भी। (1 यूहन्ना 3:7–8; 2:1–2)

इस असाधारण स्थिति के विषय में मेरे साथ विचार करें। यदि परमेश्वर का पुत्र आपको पाप करने से रोकने हेतु आपकी सहायता के लिए—शैतान के कार्यों को नष्ट करने के लिए—और यदि वह मरने के लिए भी आया था जिससे कि, जब आप पाप करें, तो प्रकोप-शान्ति (propitiation) उपलब्ध हो, परमेश्वर के प्रकोप का हटाया जाना हो, तो जीवन जीने में इसका आपके लिए क्या तात्पर्य होगा? तीन बातें। और इनका हमारे पास होना अद्तभु है। मैं उन्हें संक्षेप में क्रिसमस के उपहार के रूप में आपको देता हूँ।

उपहार 1: जीवन जीने के लिए एक स्पष्ट उद्देश्य

इसका तात्पर्य है कि आपके पास जीवन जीने के लिए एक स्पष्ट उद्देश्य है। नकारात्मक रूप से, यह बस यही है: पाप मत करो ऐसा कुछ मत करो जो परमेश्वर को अपमानित करता है। “मैं तुम्हें ये बातें इसलिए लिख रहा हूँ कि तुम पाप न करो” (1 यूहन्ना 2:1)। “परमेश्वर का पुत्र इस अभिप्राय से प्रकट हुआ कि वह शैतान के कार्य को नष्ट करे” (1 यूहन्ना 3:8)।

यदि आप पूछेंगे, “क्या आप हमें नकारात्मक के स्थान पर सकारात्मक रीति से यह बात बता सकते हैं?” इसका उत्तर है: हाँ, इसका सम्पूर्ण सार 1 यूहन्ना 3:23 में दिया हुआ है। यूहन्ना की सम्पूर्ण पत्री का यह एक उत्तम सारांश है। यहाँ एकवचन पर ध्यान दें “आज्ञा”—“उसकी आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु ख्रीष्ट के नाम पर विश्वास करें और एक दूसरे से ठीक वैसा ही प्रेम करें जैसी कि उसने हमें आज्ञा दी है।” यूहन्ना के लिए ये दोनों बातें इतनी निकटता से जुड़ी हुई हैं कि वह उन्हें एक ही आदेश कह कर पुकारता है: यीशु पर विश्वास करो और एक दूसरे से प्रेम करो। यही तुम्हारा उद्देश्य है। यही ख्रीष्टीय जीवन का योग है। यीशु पर भरोसा करना, लोगों से उसी प्रकार से प्रेम करना है जैसा कि प्रेम करने की शिक्षा यीशु और उसके प्रेरितों ने हमें दी थी। यीशु पर भरोसा करो, लोगों से प्रेम करो। यह है पहला उपहार: जीवन जीने का एक उद्देश्य।

उपहार 2: यह आशा, कि हमारी असफलताएँ क्षमा की जायेंगी

इस दोहरे सत्य का, कि ख्रीष्ट हमारे पाप करने की क्रिया को नष्ट करने के लिए तथा हमारे पापों को क्षमा करने के लिए आया था, उसका दूसरा तात्पर्य यह है कि: हम अपने पाप पर विजय पाने में प्रगति करते हैं जब हमें आशा होती है कि हमारी असफलताओं को क्षमा कर दिया जाएगा। यदि आपके पास यह आशा नहीं है कि परमेश्वर आपकी असफलताओं को क्षमा कर देगा, तो फिर जब आप पाप से लड़ना आरम्भ करेंगे, आप हार मान जाएँगे।

आप में से कई लोग नए वर्ष में कुछ परिवर्तनों के विषय में विचार कर रहे हैं, क्योंकि आप पाप करने की पद्धति में पड़ गए हैं और उस से बाहर निकलना चाहते हैं। आप भोजन खाने की नई पद्धतियाँ चाहते हैं। मनोरंजन की नई पद्धतियाँ चाहते हैं। देने की नई पद्धतियाँ चाहते हैं। अपने जीवनसाथी से व्यवहार करने की नई पद्धतियाँ चाहते हैं। पारिवारिक प्रार्थना समय की नई पद्धतियाँ चाहते हैं। सोने और व्यायाम की नई पद्धतियाँ चाहते हैं। गवाही देने में साहस की नई पद्धतियाँ चाहते हैं। परन्तु आप संघर्ष कर रहे हैं, तथा यह विचार कर रहे हैं कि क्या इसका कोई लाभ है। जो भी हो, यह रहा आपका दूसरा क्रिसमस का उपहार: ख्रीष्ट न केवल शैतान के कार्यों को नष्ट करने के लिए आया था—हमारे पाप का किया जाना—वह युद्ध में हमारी विफलता के अनुभवों के कारण हमारे लिए एक सहायक भी बन कर आया था।

इसलिए, मैं आपसे निवेदन करता हूँ, कि यह तथ्य कि असफलता अन्त में विजयी नहीं होगी, आपको लड़ने की आशा प्रदान करने दे। परन्तु सावधान! यदि आप परमेश्वर के अनुग्रह को पाप करने के अधिकार में परिवर्तित कर देते हैं, और कहते हैं, “ठीक है, यदि मैं विफल हो सकता हूँ, और इससे कोई अन्तर नहीं पड़ता, तो पाप से लड़ने का कष्ट क्यों उठाएँ?”—यदि आप ऐसा कहते हैं, और इस बात पर विश्वास करते हैं, और इसी प्रकार कार्य करते रहते हैं, तो सम्भवतः आप का नया जन्म नहीं हुआ है और आपको काँपना चाहिए।

परन्तु यह वह स्थान नहीं है जहाँ आप में से अधिकांश लोग हैं। आप में से अधिकतर लोग अपने जीवन में पाप की पद्धति से लड़ना चाहते हैं। और परमेश्वर आपसे जो कह रहा है वह यह है: ख्रीष्ट जिसने आपकी विफलता को ढाँप दिया है उसे आपको लड़ने की आशा प्रदान करने दीजिए। “मैं तुम्हें ये बातें इसलिए लिख रहा हूँ कि तुम पाप न करो। परन्तु यदि कोई पाप करता है तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात यीशु ख्रीष्ट जो धर्मी है।”

उपहार 3: ख्रीष्ट हमारी सहायता करेगा

इस दोहरे सत्य का, कि ख्रीष्ट हमारे पाप करने को नष्ट करने के लिए तथा हमारे पापों को क्षमा करने के लिए आया था उसका तीसरा तात्पर्य यह है कि: ख्रीष्ट वास्तव में इस युद्ध में हमारी सहायता करेगा। वह वास्तव में आपकी सहायता करेगा। वह आपके पक्ष में है। वह पाप को इस कारण नष्ट करने के लिए नहीं आया क्योंकि पाप में आनन्द है। वह पाप को नष्ट करने के लिए आया था क्योंकि पाप घातक है। यह शैतान का भ्रमित करने वाला कार्य है, और यदि हम इस से युद्ध नहीं करेंगे तो यह हमें नष्ट कर देगा। वह हमारी सहायता करने आया था, हमें चोट पहुँचाने नहीं।

तो यह रहा आपका तीसरा क्रिसमस का उपहार: ख्रीष्ट आप की सहायता करेगा कि आप स्वयं के भीतर पाप पर विजय प्राप्त कर सकें । 1 यूहन्ना 4:4 कहता है, “जो तुम में है, उस से जो संसार में है, कहीं बढ़कर है।” यीशु जीवित है, यीशु सर्वशक्तिमान है, यीशु हमारे भीतर विश्वास के द्वारा निवास करता है। और यीशु हमारे पक्ष में है, हमारे विरोध में नहीं। वह नए वर्ष में पाप के साथ आप के युद्ध में आपकी सहायता करेगा। उस पर भरोसा रखें।

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