यीशु ख्रीष्ट का जन्म कुवाँरी से ही क्यों हुआ?

बाइबल बताती है कि यीशु का जन्म कुवाँरी मरियम से हुआ था। किन्तु आप सोच सकते हैं कि कुवाँरी स्त्री से जन्म होना असम्भव बात है। और यदि यह विवादात्मक बात है तो फिर बाइबल इसके विषय में क्यों बात करती है। आइए देखें कि यीशु के कुवाँरी से जन्म लेने के विषय में कुछ महत्वपूर्ण बातों को जानना हमारे लिए क्यों आवश्यक है? 

यीशु को कुवाँरी से जन्म लेना आवश्यक था, जिससे कि यह स्पष्ट हो सके कि यीशु परमेश्वर की ओर से आया न कि किसी मनुष्य के द्वारा।

यह परमेश्वर का अलौकिक कार्य था

परमेश्वर का पुत्र होने के कारण यीशु को कुवाँरी से जन्म लेना आवश्यक था, जिससे कि यह स्पष्ट हो सके कि यीशु परमेश्वर की ओर से आया न कि किसी मनुष्य के द्वारा। बिना किसी पुरुष के बीज के एक कुवाँरी का गर्भधारण परमेश्वर के अलौकिक कार्य द्वारा ही सम्भव है। यद्यपि मानवीय दृष्टि से किसी कुवाँरी से बच्चे का जन्म होना असम्भव प्रतीत होता है ,परन्तु परमेश्वर के लिए कोई भी कार्य असम्भव नहीं है। परमेश्वर सारा, हन्ना और इलीशिबा जैसी स्त्रियों को बच्चे देने के द्वारा यह संकेत देता है कि आने वाले उद्धारकर्ता का जन्म कुवाँरी से होगा जो कि मानवीय दृष्टि से असम्भव है। इसीलिए मरियम ने स्वर्गदूत से पूछा कि यह कैसे हो सकता है?… तब उसने कहा परमेश्वर के लिए कुछ भी असम्भव नहीं है (लूका 1:34-37)।

यह यीशु की वास्तविकता का प्रदर्शन था

यीशु का कुवाँरी से जन्म लेना उसकी पहचान को दिखाता है। यह दिखाता है कि यीशु त्रिएक परमेश्वर का द्वितीय जन परमेश्वर पुत्र है। कुवाँरी से जन्म लेना यह दिखाता है वह किसी मानवीय पिता के द्वारा नहीं जन्मा है। और यह बात यीशु के बपतिस्मा के समय स्वयं परमेश्वर पिता ने यह कहकर प्रकट किया कि “तू मेरा प्रिय पुत्र है, मैं तुझ से अत्यन्त प्रसन्न हूँ” (लूका 3:22)। इसके साथ ही कुँवारी मरियम से जन्म लेना यीशु के सच्चे मनुष्यत्व को भी दिखाता है। यद्यपि यीशु किसी मनुष्य के बीज से नहीं जन्मा फिर भी वह सामान्य शिशुओं के समान ही एक स्त्री से जन्मा था। उसका सम्पूर्ण मानव जीवन एक साधारण मनुष्य के ही समान था जो उसके मनुष्य होने का प्रमाण देता है। 

मानवीय दृष्टि से किसी कुवाँरी से बच्चे का जन्म होना असम्भव प्रतीत होता है ,परन्तु परमेश्वर के लिए कोई भी कार्य असम्भव नहीं है।

यह यीशु के पाप रहित होने का प्रमाण था

यीशु हमारे ही समान मनुष्य बनकर अवश्य आया था किन्तु हममें और उसमें एक मानवीय भिन्नता यह है कि हम पापी हैं और वह निष्पाप है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि पहले पुरुष (आदम) ने पाप किया और अब उससे जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति पापी है। और हम सब पाप के साथ माता के गर्भ में पड़े हैं (भजन 51:5)। किन्तु यीशु किसी मनुष्य की ओर नहीं परन्तु मात्र कुवाँरी स्त्री से जन्मा है। और मात्र कुवाँरी जन्म होने के कारण वह पूर्ण रीति से मानवीय पाप से अलग है। वह पाप के साथ माता के गर्भ में नहीं पड़ा इसलिए वह पाप रहित है। और इसीलिए निष्पाप यीशु हमारे पापों के बदले में प्रायश्चित्त कर सकता है (इब्रानियों 7:26-27)। 

यह हमारे उद्धार के लिए आवश्यक था

परमेश्वर ने पापों की क्षमा के लिए पाप के तुरन्त बाद ही इस बात कि प्रतिज्ञा की थी वह एक दिन स्त्री के वंश को भेजेगा (उत्पत्ति 3:15)। और जब समय पूरा हुआ तब परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा जो स्त्री से उत्पन्न हुआ जिससे कि वह मूल्य चुकाकर हमें व्यवस्था के दण्ड से छुड़ा ले (गलातियों 4:4-5)। इतना ही नहीं परमेश्वर यीशु के रूप में इसलिए भी आया ताकि वह मनुष्यों के साथ रह सके। और बात यशायाह नबी के द्वारा कही गई भविष्यवाणी को भी पूरा करती है कि “देखो, एक कुवाँरी गर्भवती होगी, वह एक पुत्र को जन्म देगी” (यशायाह 7:14) और वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा (मत्ती 1:21)।

यीशु का कुवाँरी से जन्म लेना निश्चय ही परमेश्वर के अलौकिक कार्य को दिखाता है। साथ ही यह यीशु की वास्तविकता को भी प्रकट करता है कि वह सच में परमेश्वर और सच में मनुष्य है, जो हमारे पापों के लिए कुवाँरी स्त्री से व्यवस्था के अधीन जन्मा जिससे कि हमें व्यवस्था के दण्ड से छुड़ा ले। उसने हमारे पापों का प्रायश्चित्त हेतु केवल निष्पाप रीति से जन्म ही नहीं लिया ,परन्तु उसने स्वयं को बलिदान कर दिया और मृतकों में से जी उठने के द्वारा परमेश्वर का पुत्र घोषित हुआ। अतः इस क्रिसमस परमेश्वर से प्रार्थना कीजिए कि यीशु उद्धारकर्ता के रूप में आपके हृदय में जन्म ले अन्यथा ख्रीष्ट जन्मोत्सव आपके लिए अधूरा है। 

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