स्मरण रखें, आपके पास पर्याप्त समय नहीं है

क्या ऐसा कभी आपके साथ हुआ कि आप अपने किसी निकटतम मित्र, परिवारिक सदस्य, किसी परिचित, पड़ोसी से बात करना चाह रहे हों, और बाद में आपको पता चले कि उस व्यक्ति की किसी दुर्घटना, या बिमारी से अचानक मृत्यु हो गई! आप उस व्यक्ति से सम्भवत: मिलने की योजना बनाते रहें हों परन्तु इससे पहले की आप उससे मिलें और और उससे अपने महत्वपूर्ण बातें करें, उसकी मृत्यु हो जाती है। तब आप क्या कर सकेंगे? कुछ नहीं! इसलिए आइये जब अभी हमारे पास समय है तो हम इस संक्षिप्त, अस्थायी, क्षणिक जीवन में ख्रीष्टीय होने के नाते महत्वपूर्ण काम करें। 

यदि हम वास्तव में अपने प्रियजनों से प्रेम करते हैं तो हम उनको सबसे बड़ी आवश्यकता सुसमाचार से परिचित कराएँगे!

सुसमाचार सुनाइये:  हमारे जीवन में बहुत सारे लोग हैं, जिनसे हम जुड़े हुए हैं, जिनके साथ हम रहते हैं, जिनके साथ हम स्कूल में पढ़ने जाते हैं, जिनके साथ हम काम करते हैं, जिनके साथ हम आनन्द मनाते हैं तथा उनके साथ रहना पसन्द करते हैं! हम उनको जानते हैं, किन्तु हम स्वयं को उन पर सही रीति से प्रस्तुत नहीं करते कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं। हम इस बात को जानते हैं कि यीशु बिना वे वास्तव में भयंकर स्थिति में हैं और मरने के बाद वे अनन्त काल तक हमसे दूर परमेश्वर के क्रोध के अधीन रहेंगे ( 2 थिस्स 1:9)। इस पर भी हम उनसे वास्तव में सच्चे प्रेम को नहीं दर्शाते हैं और सुसमाचार बताने में घबराते हैं कि कहीं हमारे सम्बन्ध विघटित न हो जाएँ! या यह मानकर चलते हैं कि वे विश्वास ही नहीं करेंगे! और यह सोचते हैं कि जब समय आएगा तब बताएँगे। किन्तु हम नहीं जानते कि हम कल उनको बताने के लिए जीवित होंगे या वे सुनने के लिए जीवित होंगे कि नहीं! 

यदि हम वास्तव में ख्रीष्ट के प्रेम को समझते हैं तो हम अपने शब्दों से एवं कार्यों से प्रेम को प्रकट भी करेंगे।

ख्रीष्ट के प्रेम को प्रकट करिए: ख्रीष्ट का प्रेम हमें बाध्य करता है कि हम उसके प्रेम को अपने जीवन से प्रदर्शित करें और अन्य लोगों को सुसमाचार भी बतायें। हमें प्रभु के प्रेम को अपने सम्बन्धों में प्रकट करने की आवश्यकता है। ख्रीष्ट हमारे लिए उस समय मरा जब हम पापी थे, भक्तिहीन थे, शत्रु थे, इसलिए अब हम उसके प्रेम को दूसरों पर प्रकट करेंगे। हमें मुख्य रीति से कलीसिया में दूसरों के प्रति अपने प्रेम को अपने कार्यों में प्रकट करना चाहिए तथा दूसरों के लिए अपना जीवन देना चाहिए (1 यूहन्ना 3:18, 15:13, फिलिप्पियों 2:4)। जब हम कलीसिया में हैं, या परिवार में हैं, तो अन्य विश्वासी भाईयों/बहनों को हम आज कैसे ख्रीष्ट के प्रेम को अपने शब्दों, एवं आचरण से प्रकट कर रहे हैं? जब अभी हमारे पास समय है तो अवश्य ही प्रेम में होकर हमें एक दूसरे के जीवन की चिन्ता करने की आवश्यकता है। एक-दूसरे को ख्रीष्ट के समान बनने में सहायता करना है। हमें स्वयं को जाँचने की आवश्यकता है कि हम कलीसिया में लोगों के साथ क्या केवल रविवार को ही प्रेम प्रदर्शित करते हैं, या सप्ताह के मध्य भी अपने शब्दों एवं कार्यों से प्रकट करते हैं!

यदि आप जानते हैं कि आपका जीवन कभी भी समाप्त हो जाएगा तो हम समय का महत्व समझते हुए अपने क्षणिक जीवन को केवल परमेश्वर की महिमा हेतु जीने में लगाएंगे।

समय को बहुमूल्य समझिए : हमारा जीवन भाप के समान है जो पल भर का ही है (याकूब 4:14)। और हमें नहीं पता कि हमारे पास बोलने के लिए कितना समय बचा है। हमें यह भी नहीं पता कि हमें सुनने के लिए अन्य लोगों के पास कितना समय बचा है। हमारे और आपके पास सम्भवतः किसी के लिए कहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण शब्द हो सकते हैं, परन्तु हम नहीं जानते कि कल हम उनसे महत्वपूर्ण बात कह पाएंगे कि नहीं। हो सकता है कि हम कुछ लोगों से अपने हृदय की बात कहने के लिए सोच ही रहे हों कि अन्तिम समय में मैं उससे यह बात करुँगा या मेरे अन्तिम शब्द ये होंगे, किन्तु सत्य यह है कि हम नहीं जानते कि मृत्यु हमारे द्वारा बचाए गए अन्तिम शब्द से पहले आ सकती है। इसलिए समय के महत्व को समझते हुए आइये हम अभी बुद्धिमानी के साथ जीवन जियें और दूसरों के लिए आशीष का कारण हों।

अत: हम बीती बातों को बदल नहीं सकते हैं, हो सकता है कि हम उन लोगों को स्मरण करके दुख की अनुभूति करते हैं, जिनको आपने खो दिया हो और जब वे जीवित थे, तो हम उनको सुसमाचार नहीं सुना पाएं। या ख्रीष्टीय लोग हों, जिनसे हम ख्रीष्टीय प्रेम को प्रकट कर सकते थे, हमने योजना भी बनाई हो लेकिन उनके साथ समय नहीं दे पाएँ हों, या हम लोगों के साथ समय तो दिए हों किन्तु जीवन सम्बन्धी महत्वपूर्ण विषयों पर वार्तालाप नहीं किया हो। किन्तु आज, हम जब इस बात को समझते हैं कि यीशु ने हमसे प्रेम किया है तो हम समय के महत्व को समझते हुए उसके प्रेम को दूसरों के साथ शब्दों व कार्यों में प्रकट करेंगे। इसलिए कल की प्रतीक्षा मत करिए, क्योंकि हम नहीं जानते कि कल क्या होगा!

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