मेरी ओर फिर कर मुझ पर अनुग्रह कर, अपने सेवक को अपना सामर्थ्य प्रदान कर। (भजन 86:16)
प्रार्थना करने वाले भजनकार निरन्तर भविष्य-के-अनुग्रह के लिए याचना करते रहते हैं। प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति हेतु इसके लिए बारम्बार प्रार्थना करते हैं। वे प्रत्येक आपदा के लिए हमें भविष्य-के-अनुग्रह पर दैनिक निर्भरता का सुन्दर उदाहरण देते हैं।
- वे अनुग्रह के लिए पुकारते हैं जब उनको सहायता की आवश्यकता होती है: “हे यहोवा, सुन: मुझ पर अनुग्रह कर। हे यहोवा, तू मेरा सहायक हो” (भजन 30:10)।
- जब वे निर्बल हैं: “मेरी ओर फिर कर मुझ पर अनुग्रह कर, अपने सेवक को अपना सामर्थ्य प्रदान कर” (भजन 86:16)।
- जब उनको चंगाई की आवश्यकता होती है: “हे यहोवा मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं मुर्झा गया हूँ। हे यहोवा, मुझे चंगा कर” (भजन 6:2)।
- जब वे शत्रुओं द्वारा उत्पीड़ित होते हैं: “हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर! मेरी पीड़ा को देख जो मेरे बैरी मुझे देते हैं” (भजन 9:13)।
- जब वे अकेले हैं: “हे यहोवा, मेरी ओर फिर और मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं अकेला और पीड़ित हूँ” (भजन 25:16)।
- जब वे शोक मना रहे हैं: “हे यहोवा मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं संकट में पड़ा हूँ: मेरी आँखे शोक से घुली जाती हैं” (भजन 31:9)।
- जब उन्होंने पाप किया है: “हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर; मुझे चंगा कर, क्योंकि मैंने तेरे विरुद्ध पाप किया है” (भजन 41:4)।
- जब वे इस बात की लालसा करते हैं कि परमेश्वर का नाम जातियों के मध्य ऊँचा किया जाए: “परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हमको आशिष दे . . . कि तेरी गति पृथ्वी पर प्रकट हो” (भजन 67:1-2)।
निश्चय ही प्रार्थना विश्वासी के प्राण और भविष्य-के-अनुग्रह की प्रतिज्ञा के मध्य विश्वास की महान् कड़ी है। यदि परमेश्वर का उद्देश्य था कि सेवा प्रार्थना द्वारा बनी रहे, तो सेवा भविष्य-के-अनुग्रह पर विश्वास के द्वारा बनी रहनी चाहिए।