जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।
नम्रता आरम्भ होती है जब हम परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं। इसके बाद, क्योंकि हम उस पर भरोसा रखते हैं, इसलिए हम अपने मार्ग को उसे सौंप देते हैं। हम अपनी चिन्ताओं, अपनी कुंठाओं, अपनी योजनाओं, अपने सम्बन्धों, अपनी आजीविका, और अपने स्वास्थ्य को उस पर डाल देते हैं। 
मैं चाहता हूँ कि विश्वासी ख्रीष्ट में परमेश्वर के द्वारा प्रेम किए जाने का जितना अधिक सम्भव हो उतना आनन्द लें। और मैं चाहता हूँ कि इस रीति से हम से प्रेम करने के लिए जितना अधिक सम्भव हो उतना परमेश्वर की बड़ाई हो। इसी कारण अपनी मृत्यु के
दाऊद यहाँ पर यौन संयम के लिए प्रार्थना क्यों नहीं कर रहा है? वह ऐसे पुरुषों के लिए क्यों नहीं प्रार्थना कर रहा है जो उसे उत्तरदायी बनाए रखेंगे? वह संरक्षित आंखों और यौन-मुक्त विचारों के लिए प्रार्थना क्यों नहीं कर रहा है? अंगीकार और पश्चाताप के इस भजन
सबसे आधारभूत प्रार्थना, जो हम बाइबल पढ़ने के लिए कर सकते हैं, वह यह है कि परमेश्वर हमें इस पुस्तक को पढ़ने की अभिलाषा दे। केवल इच्छा  ही नहीं — यह तो द्वितीय उत्तम बात है — परन्तु अभिलाषा  प्रथम उत्तम बात है।  यही  प्रेरित पतरस ने कहा कि
अपने शत्रुओं के लिए प्रार्थना करना प्रेम करने की विभिन्न रीतियों में से सबसे गहन रीति है, क्योंकि इसका अर्थ यह है कि आप वास्तव में चाहते हैं कि उनके साथ कुछ भला हो।  आप बिना किसी वास्तविक इच्छा के भी अपने शत्रुओं के लिए कुछ अच्छा कर सकते
मार्टिन लूथर, जॉन कैल्विन, और उलरिख़ ज़्विंग्ली जैसे प्रथम महान धर्मसुधारकों ने कभी भी अपनी शिक्षाओं को उन पाँच संक्षिप्त वाक्यांशों में सारांशित नहीं किया जिन्हें हम अब पाँच सोला  के नाम से जानते हैं। जैसे जैसे समय बीतता गया ये सोला  रोमी कैथोलिक कलीसिया के साथ हुए विवाद
कल्पना कीजिए कि आप पूर्णतः लकवाग्रस्त हैं और बात करने के अतिरिक्त आप अपने लिए कुछ भी नहीं कर सकते हैं। और कल्पना कीजिए कि एक बलवान और भरोसेमन्द मित्र ने आपके साथ रहने और जो कुछ भी आप चाहते हैं उसे करने की प्रतिज्ञा की है। यदि एक
मसीही किस अर्थ के अनुसार परमेश्वर या मसीह या अपनी बुलाहट के योग्य  हैं? और किस अर्थ के अनुसार हम अयोग्य  हैं? एक ओर तो, यीशु और पौलुस दोनों सिखाते हैं कि हमें यीशु और उसकी बुलाहट के योग्य  होना चाहिए।  यीशु: यीशु कहता है कि “पर सरदीस में
हम पवित्र आत्मा से कैसे भर सकते हैं? हम अपनी कलीसिया पर और स्वयं पर पवित्र आत्मा के उण्डेले जाने का अनुभव कैसे कर सकते हैं जो हमें अपराजेय आनन्द से भर देता है और हमें स्वतंत्र करता है, और हमें सशक्त बनाता है, हमारे निकट लोगों से वास्तविक