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परमेश्वर में असंगतता नहीं पाई जाती है। वह प्रतिज्ञाओं, और शपथों, और अपने पुत्र के लहू के साथ स्वयं हमारी सुरक्षा के केवल एक छोर पर ही लंगर डालने का प्रयास नहीं करता है जबकि दूसरे छोर को हवा में लटकने के लिए छोड़ देता है। जो उद्धार यीशु
 (इस पद को विपदा के समय में कैसे समझ सकते हैं)  तेरे निकट हजार और तेरे दाहिने हाथ दस हजार गिरेंगे, पर वह तुझ तक नहीं पहुँचेगा। (भजन 91:7) आज संसार भर में अनेक ख्रीष्टीय (मसीही) लोग भजन 91:7 की प्रतिज्ञा के आधार पर यह आशा कर रहे हैं
2004 में जॉन पाइपर ने नीचे दिए लेख में लिखा, “परमेश्वर और ख्रीष्टीय लोग कैसे ख्रीष्ट को बहुमूल्य समझते हैं”: ब्रह्मांड और ख्रीष्टीय जीवन का जो मुख्य अनुभव है – अर्थात ख्रीष्ट को बहुमूल्य समझना – वह कलीसियाओं में निरन्तर बना रहता है। परमेश्वर ने निर्धारित कर दिया है
भविष्य के विषय में चिन्ता करना क्यों घमण्ड का एक रूप है? परमेश्वर का उत्तर कुछ इस प्रकार से सुनाई देगा (यशायाह 51:12 को आसान ढंग से व्यक्त  करते हुए):  मैं — परमेश्वर, तुम्हारा सृष्टिकर्ता — मैं वही हूँ जो तुम्हें सान्त्वना देता है, जो तुम्हारी देखभाल करने की
आज कोविड-19 से पूरे विश्व के लोग विचलित हैं। हमारे देश में भी कोरोना के आंकड़ों में वृद्धि हो रही है। चारों ओर निराशा है। आज लोग मृत्यु से भयभीत हैं, हम में से कई लोग अपने प्रियजनों को खो दिए हैं। हम आए दिन मृत्यु के समाचार को
महामारी कोविड -19 के प्रकोप ने पूरे संसार में उथल-पुथल मचा दी है। हां, इसकी संक्रामक और विनाशकारी प्रकृति को जानकर हमें इसके प्रभाव के बारे में विचार करना चाहिए। यद्यपि संकट के कारण परमेश्वर के छुटकारा पाए हुए लोगों पर घबराहट और निराशा नहीं प्रबल होनी चाहिए। हम

आज का सन्देश

परमेश्वर भला और करुणामय है।

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