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अन्य दस प्रेरितों के विषय में क्या कहेंगे (यहूदा को नहीं गिना गया है)? शैतान उन्हें भी फटकने जा रहा था। क्या यीशु ने उनके लिए प्रार्थना की? जी हाँ उसने किया। परन्तु उसने पिता से उसी रीति से उनके विश्वास की रक्षा करने के लिए प्रार्थना नहीं की
“सुसमाचार क्या है?” इस शीर्षक पर एक लेख लिखना? एक ख्रीष्टीय वेबसाइट के लिए थोड़ा अनावश्यक लग सकता है। क्या सभी ख्रीष्टीय लोगों को पहले से ही सुसमाचार को नहीं समझना चाहिए? हम ऐसा सोच सकते हैं, परन्तु दुख की बात है कि सुसमाचार की सबसे आधारभूत अवधारणा को
“प्रार्थना करो कि तुम प्रलोभन में न पड़ो।” यीशु अपनी व्यथा के बगीचे में घुटने टेकता है और अपने लोगों को प्रार्थना करने हेतु निर्देश देता है, केवल पाप  के विरुद्ध ही नहीं, परन्तु प्रलोभन  के विरुद्ध भी। अपने जीवन की कठिन प्रलोभन के आरम्भ में ही, वह अपने
प्रभु की सेवा करने में एक बड़ी बाधा, विशेष रूप से युवाओं में, अस्वीकृति और विरोध का भय है।  नाना प्रकार के विचार मन में आते हैं कि कैसे कुछ लोग हमारे कार्य करने या बात करने के ढंग को सम्भवतः पसन्द नहीं करेंगे। लोग असहमत हो सकते हैं
आज हमारे देश में ऐसा कोई नहीं है जो कोरोना वायरस की महामारी को लेकर चिन्तित न हो। सब के पास बात करने के लिए एक सामान्य विषय है। और हो भी क्यों न, जबकि इस महामारी ने पूरे संसार और विशेष रीति से हमारे राष्ट्र को इस कोरोना
प्रेम बाइबल के केन्द्र में है।  परमेश्वर ने हम से इतना प्रेम किया, कि उसने अपने एकलौते प्रिय  पुत्र को भेज दिया हमसे लहू के द्वारा प्रेम करने के लिए, ताकि हम भी उसी प्रकार से प्रेम करें  और इस प्रिय  पुत्र को बहुमूल्य जानें (यूहन्ना 3:16, प्रकाशितवाक्य 1:5)।
परमेश्वर में असंगतता नहीं पाई जाती है। वह प्रतिज्ञाओं, और शपथों, और अपने पुत्र के लहू के साथ स्वयं हमारी सुरक्षा के केवल एक छोर पर ही लंगर डालने का प्रयास नहीं करता है जबकि दूसरे छोर को हवा में लटकने के लिए छोड़ देता है। जो उद्धार यीशु
 (इस पद को विपदा के समय में कैसे समझ सकते हैं)  तेरे निकट हजार और तेरे दाहिने हाथ दस हजार गिरेंगे, पर वह तुझ तक नहीं पहुँचेगा। (भजन 91:7) आज संसार भर में अनेक ख्रीष्टीय (मसीही) लोग भजन 91:7 की प्रतिज्ञा के आधार पर यह आशा कर रहे हैं
2004 में जॉन पाइपर ने नीचे दिए लेख में लिखा, “परमेश्वर और ख्रीष्टीय लोग कैसे ख्रीष्ट को बहुमूल्य समझते हैं”: ब्रह्मांड और ख्रीष्टीय जीवन का जो मुख्य अनुभव है – अर्थात ख्रीष्ट को बहुमूल्य समझना – वह कलीसियाओं में निरन्तर बना रहता है। परमेश्वर ने निर्धारित कर दिया है
भविष्य के विषय में चिन्ता करना क्यों घमण्ड का एक रूप है? परमेश्वर का उत्तर कुछ इस प्रकार से सुनाई देगा (यशायाह 51:12 को आसान ढंग से व्यक्त  करते हुए):  मैं — परमेश्वर, तुम्हारा सृष्टिकर्ता — मैं वही हूँ जो तुम्हें सान्त्वना देता है, जो तुम्हारी देखभाल करने की
आज कोविड-19 से पूरे विश्व के लोग विचलित हैं। हमारे देश में भी कोरोना के आंकड़ों में वृद्धि हो रही है। चारों ओर निराशा है। आज लोग मृत्यु से भयभीत हैं, हम में से कई लोग अपने प्रियजनों को खो दिए हैं। हम आए दिन मृत्यु के समाचार को
महामारी कोविड -19 के प्रकोप ने पूरे संसार में उथल-पुथल मचा दी है। हां, इसकी संक्रामक और विनाशकारी प्रकृति को जानकर हमें इसके प्रभाव के बारे में विचार करना चाहिए। यद्यपि संकट के कारण परमेश्वर के छुटकारा पाए हुए लोगों पर घबराहट और निराशा नहीं प्रबल होनी चाहिए। हम