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मसीही विश्वास के जीवन में यीशु का पुनरुत्थान सबसे महत्वपूर्ण भाग है। प्रेरित पौलुस पुनरुत्थान के सन्दर्भ में लिखता है कि यीशु के पुनरुत्थान के बिना हमारा विश्वास व्यर्थ है (1 कुरिन्थियों 15:14)। इसलिए हमें पुनरुत्थान के महत्व को समझना आवश्यक है। क्यों इसके बिना हमारा विश्वास, हमारा प्रचार,
मसीही, आप कैसे जानते हैं कि जब आप कल सवेरे जागेंगे, तो आप तब भी एक विश्वासी होंगे? और प्रत्येक सवेरे जब तक कि आप यीशु से न मिलें?  बाइबलीय उत्तर है: परमेश्वर इसे अवश्य सम्भव करेगा। क्या आप इससे सहमत हैं? क्या यह आपको व्याकुल करता है, इसे
आज सवेरे मैं इन भव्य और हृदय विदारक वचनों पर ठहरा हुआ था। पौलुस रोम में बंदी है। जहाँ तक हम जानते हैं, वह कभी भी मुक्त नहीं किया गया। उसके अन्तिम पत्र का समापन इस प्रकार से होता है। विचार कीजिए और चकित होइए ! वह त्यागा हुआ
चुनाव के रहस्य का गहन अध्ययन करना यदि कोई व्यक्ति मुझसे चुनाव को समझाने के लिए कहे, तो मैं उस व्यक्ति से यह पूछने के द्वारा आरम्भ करूँगा कि वह मुझे बताए कि वह बचाया कैसे गया। मुझे बताइए कि आपका हृदय परिवर्तन कैसे हुआ था। अपने प्रश्न को
आप में से अनेक लोगों के लिए इस समय — तथा आप में से अन्य लोगों के लिए समय आने वाला है — जिसमें आज्ञाकारिता स्वप्न की समाप्ति के नाई प्रतीत होती है। आपको ऐसा लग रहा होगा कि यदि आप वह करेंगे जिसके लिए परमेश्वर का वचन या
पिछले दो हज़ार वर्षों से मसीहियत की नींव यीशु के क्रूस पर मरने और पुनः जी उठने पर टिकी हुई है। आरम्भ से ही मसीहियोंं के लिए यीशु के जी उठने की घटना एक चट्टान के समान अटल रही है। मसीही अपने आराधना के गीतों और विश्वास वचनों में
सुसमाचार क्या है?सुसमाचार क्या है? इसे मैं एक वाक्य में बताऊंगा। सुसमाचार एक संदेश है कि यीशु मसीह, वह धर्मी जन, हमारे पापों के लिए मरा और पुनः जी उठा, अपने सब शत्रुओं पर अनन्तकाल के लिए विजयी हुआ, इसीलिए जो विश्वास करते हैं उन पर अब दण्ड की
संसार के पास प्रस्तुत करने के लिए जो कुछ भी है हमें उससे बढ़कर हमारे प्रतिफल के रूप में परमेश्वर की श्रेष्ठता पर चिन्तन करने की आवश्यकता है। यदि हम ऐसा नहीं करते हैं, तो सभी लोगों के समान हम भी संसार से प्रेम करेंगे और सबके जैसा ही
पिछले दो हज़ार वर्षों से क्रूस मसीहियत का मुख्य चिन्ह रहा है। इसके बाद भी आज संसार में कुछ लोग इस बात पर संदेह करते हैं कि, ‘क्या सच में यीशु क्रूस पर मारा गया था’? इस बात को नकारने के लिए लोग विभिन्न प्रकार के विचार भी रखते
परमेश्वर में अप्रतिबन्धित (बिना किसी मांग का) प्रेम उपस्थित है, परन्तु इसका अर्थ वह नहीं है जो अधिकांश लोग सोचते हैं।  यह बचाने वाला प्रेम नहीं है जो वह सबके लिए रखता है। अन्यथा सब लोग बचाए जाएंगे, क्योंकि उन्हें किसी भी मांगों को पूरा नहीं करना होगा, यहाँ