आज के समय में बच्चों के पास कहानियों की कमी नहीं है। वे हर दिन वीडियो देखते हैं, चित्रों से भरी पुस्तकें पढ़ते हैं और अनेक प्रकार की बातें सीखते हैं। परन्तु एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है—क्या वे उन कहानियों को भी सुन रहे हैं जो केवल उनका मनोरंजन नहीं करतीं, किन्तु उनके हृदय, सोच और विश्वास को भी आकार देती हैं? ख्रीष्टीय माता-पिता होने के नाते हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे केवल अच्छे अंक प्राप्त न करें, किन्तु परमेश्वर को भी जानें, उसकी सच्चाई को समझें और ऐसा जीवन जीना सीखें जो परमेश्वर को प्रसन्न करे। परन्तु बच्चों को बाइबल की गहरी शिक्षाएँ सरल और रोचक तरीके से कैसे समझाई जाएँ? यहीं पर यीशु के दृष्टान्त विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
यीशु ने जब लोगों को शिक्षा दी, तो उसने केवल आदेश नहीं दिए—उसने दृष्टान्त सुनाए। दृष्टान्त एक ऐसी कहानी होती है जिसके माध्यम से किसी आत्मिक सत्य को सरल, यादगार और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।
यीशु ने खेत, बीज, चरवाहे, परिवार, मजदूर और दैनिक जीवन की साधारण घटनाओं को लेकर परमेश्वर के राज्य की महान सच्चाइयों को समझाया। उसकी कहानियाँ इतनी सरल थीं कि बच्चे भी उन्हें समझ सकते थे, और इतनी गहरी थीं कि बड़े लोग भी जीवन भर उनसे सीखते रहें।
यद्यपि ये दृष्टान्त सुनने में सरल थे, परन्तु उनमें जीवन बदल देने वाले सत्य छिपे थे। कभी यीशु ख्रीष्ट किसान और बीज की बात करता था, कभी खोई हुई भेड़ की, और कभी ऐसे पिता की जो अपने खोए हुए पुत्र का स्वागत करता है। यही कारण है कि आज भी यीशु के दृष्टान्त बच्चों और परिवारों के लिए उतने ही प्रभावशाली हैं जितने वे दो हजार वर्ष पहले थे।
इन्हीं चिरस्थायी शिक्षाओं को आज के बच्चों तक पहुँचाने के उद्देश्य से यीशु के दृष्टान्त: लघु कथाएँ, चिर स्थायी सत्य “मार्ग सत्य जीवन” सेवकाई के द्वारा उपलब्ध कराया गया है
“यीशु के दृष्टान्त: लघु कथाएँ, चिर स्थायी सत्य” ऐसी ही एक पुस्तक बनने का प्रयास करती है। यह बच्चों को केवल कहानियाँ नहीं सुनाती, वरन् उन्हें यीशु की शिक्षाओं के निकट ले जाती है। यह पुस्तक बच्चों के विचारों, विश्वास और जीवन को आकार देने में सहायता करती हैं।
यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे बाइबल को केवल जानें नहीं, वरन् उसे समझें और उसके विषय में विचार करें, तो यह पुस्तक आपके परिवार के लिए एक सुन्दर और उपयोगी संसाधन हो सकती है।
अपने बच्चों के साथ पढ़िए। प्रश्न पूछिए। उनसे बातचीत कीजिए। और साथ मिलकर उन सत्यों को सीखिए जिन्हें यीशु ने दृष्टान्तों के माध्यम से प्रकट किया।


