आज संसार में अनेक प्रकार के सन्देश सुनाई देते हैं। कुछ सन्देश हमें सफलता का मार्ग बताते हैं, कुछ धन कमाने के उपाय, और कुछ बेहतर जीवन जीने की सलाह देते हैं। परन्तु इन सबके बीच एक ऐसा सन्देश है जो मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है। यही सन्देश है—सुसमाचार।
“सुसमाचार” शब्द का अर्थ है “शुभ समाचार” या “अच्छी खबर”। परन्तु यह कोई साधारण अच्छी खबर नहीं है। यह परमेश्वर की ओर से मनुष्य के लिए उद्धार का सन्देश है। यह बताता है कि पापी मनुष्य परमेश्वर के साथ कैसे मेल-मिलाप कर सकता है।
मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या क्या है?
अधिकाँश लोग सोचते हैं कि उनकी सबसे बड़ी समस्या गरीबी, बीमारी, अकेलापन या जीवन की कठिन परिस्थितियाँ हैं। यद्यपि ये वास्तविक समस्याएँ हैं, परन्तु बाइबल बताती है कि मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या पाप है। रोमियों 3:23 कहता है: “इसलिये कि सबने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं।”
पाप केवल गलत कार्य करना नहीं है। यह परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह है। हमने परमेश्वर को वह आदर नहीं दिया जिसके वह योग्य हैं। हमने अपनी इच्छा को उसकी इच्छा से अधिक महत्व दिया है। परिणामस्वरूप हम परमेश्वर से अलग हो गए हैं।
परमेश्वर कौन है?
सुसमाचार को समझने के लिए हमें पहले यह समझना होगा कि परमेश्वर कौन है। परमेश्वर पवित्र, धर्मी, प्रेमी और न्यायी है। वह पाप को अनदेखा नहीं कर सकता। क्योंकि परमेश्वर न्यायी है, इसलिए पाप का दण्ड आवश्यक है। बाइबल कहती है: “पाप की मजदूरी तो मृत्यु है।” (रोमियों 6:23) यह मृत्यु केवल शारीरिक मृत्यु नहीं है वरन् परमेश्वर से अनन्तकालीन पृथक्करण भी है।
यीशु ख्रीष्ट कौन हैं?
सुसमाचार का केन्द्र यीशु ख्रीष्ट हैं। यीशु केवल एक महान शिक्षक और भविष्यद्वक्ता ही नहीं थे। वे परमेश्वर के पुत्र हैं जो मनुष्य बनकर इस संसार में आए। उन्होंने पूर्णतः पापरहित जीवन जिया और वह आज्ञाकारिता पूरी की जिसे हम कभी पूरा नहीं कर सकते थे। जहाँ हम असफल हुए, वहाँ यीशु पूर्ण सिद्ध हुए।
क्रूस पर क्या हुआ?
सुसमाचार का सबसे महत्वपूर्ण भाग ख्रीष्ट का क्रूस है। जब यीशु क्रूस पर मरे, तब उन्होंने अपने लोगों के पापों का दण्ड अपने ऊपर ले लिया। उन्होंने वह न्याय सहा जिसके हम योग्य थे। 2 कुरिन्थियों 5:21 कहता है: “जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, जिससे कि हम उसमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएँ।” क्रूस पर परमेश्वर का न्याय और प्रेम दोनों प्रकट हुए। न्याय इसलिए कि पाप का दण्ड दिया गया, और प्रेम इसलिए कि वह दण्ड हमारे स्थान पर ख्रीष्ट ने सहा।
पुनरुत्थान क्यों महत्वपूर्ण है?
यदि यीशु केवल मर गए होते, तो सुसमाचार अधूरा रहता। परन्तु तीसरे दिन वे मृतकों में से जी उठे। पुनरुत्थान इस बात का प्रमाण है कि:
- यीशु वास्तव में परमेश्वर के पुत्र हैं।
- उनका बलिदान स्वीकार किया गया।
- पाप और मृत्यु पर विजय प्राप्त हो चुकी है।
- विश्वासियों को अनन्त जीवन का आश्वासन है।
इसी कारण ख्रीष्टीय विश्वास जीवित आशा पर आधारित है।
सुसमाचार के प्रति हमारा प्रतिउत्तर क्या होना चाहिए?
सुसमाचार केवल जानकारी नहीं है जिसे हम सुनकर आगे बढ़ जाएँ। यह एक ऐसा सन्देश है जो उत्तर माँगता है। बाइबल हमें दो बातों के लिए बुलाती है:
1. पश्चाताप करो : पश्चाताप का अर्थ केवल दुःख का आभास करना नहीं है, वरन् पाप से फिरकर परमेश्वर की ओर मुड़ना है।
2. यीशु में विश्वास करो: हमें अपने उद्धार के लिए स्वयं पर नहीं, वरन् केवल यीशु ख्रीष्ट के व्यक्ति और उनके क्रूस पर किए गए कार्य पर भरोसा करना है। इफिसियों 2:8-9 कहता है: “क्योंकि अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, विश्वास के द्वारा; और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है।”
सुसमाचार आज आपके लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
सुसमाचार केवल अविश्वासियों के लिए नहीं है। विश्वासी को भी प्रतिदिन सुसमाचार की आवश्यकता है। सुसमाचार हमें स्मरण दिलाता है कि:
- हमारा उद्धार हमारे कार्यों पर आधारित नहीं है।
- परमेश्वर का प्रेम अटल है।
- ख्रीष्ट ने हमारे लिए सब कुछ पूरा कर दिया है।
- हमारे पास अनन्त जीवन की आशा है।
जब हम सुसमाचार को समझते हैं, तो हमारा जीवन, हमारी आराधना, हमारी सेवकाई और हमारे सम्बन्ध सब परिवर्तित हो जाते हैं। सब कुछ सुसमाचार केन्द्रित होता है।
निष्कर्ष
सुसमाचार संसार की सबसे महान और सबसे आवश्यक सन्देश है। यह बताता है कि पवित्र परमेश्वर ने पापी मनुष्यों के उद्धार के लिए अपने पुत्र यीशु ख्रीष्ट को भेजा। ख्रीष्ट हमारे पापों के लिए मरे, गाड़े गए और तीसरे दिन जी उठे। अब जो कोई पश्चाताप करता और उन पर विश्वास करता है, वह अनन्त जीवन प्राप्त करता है।
यदि आपने अभी तक इस सन्देश पर विश्वास नहीं किया है, तो आज ही ख्रीष्ट की ओर फिरिए और उस विश्वास कीजिए। यदि आप पहले से विश्वासी हैं, तो प्रतिदिन सुसमाचार की सच्चाइयों में आनन्दित रहिए। सुसमाचार के लिए प्रभु को धन्यवाद दीजिए।
अनुशंसित पुस्तक
यदि आप सुसमाचार को और अधिक स्पष्टता तथा गहराई से समझना चाहते हैं, तो ग्रेग गिल्बर्ट द्वारा लिखित पुस्तक “सुसमाचार क्या है?” अवश्य पढ़ें। यह पुस्तक सरल, बाइबलीय और अत्यन्त व्यावहारिक ढंग से सुसमाचार के मूल सन्देश को समझाती है।




