मेरी कलीसिया का उद्देश्य क्या है?

2004 में जॉन पाइपर ने नीचे दिए लेख में लिखा, “परमेश्वर और ख्रीष्टीय लोग कैसे ख्रीष्ट को बहुमूल्य समझते हैं”:

ब्रह्मांड और ख्रीष्टीय जीवन का जो मुख्य अनुभव है – अर्थात ख्रीष्ट को बहुमूल्य समझना – वह कलीसियाओं में निरन्तर बना रहता है।

परमेश्वर ने निर्धारित कर दिया है कि जब लोग “खेत में छिपे हुए धन [ख्रीष्ट]” को पाते हैं (मत्ती 13:44) और संसार-को-बहुमूल्य-जानने वालों से ख्रीष्ट-को-बहुमूल्य-जानने वालों में परिवर्तित हो जाते हैं, तो इनको बनाए रखा जाता है, दृढ़ किया जाता है, परिपक्व, परिवर्तित तथा शुद्ध और निर्देशित और संगठित किया जाता है ख्रीष्टीयों के उन जीव-समूहों में जिन्हें कलीसियाएं कहा जाता है। 

जब पौलुस कलीसिया के विषय में कहता है, “सब कुछ आत्मिक उन्नति के लिए होना चाहिए” (1 कुरिन्थियों 14:26), तो उसका अर्थ यह है कि ख्रीष्ट को बहुमूल्य जानने के अनुभव को और अधिक गहरा करें, और तीव्र तथा दृढ़ करें। और यही कलीसिया का उद्देश्य है।

कलीसिया ख्रीष्ट की दुल्हन है (इफिसियों 5:25-32)। इसलिए विश्वव्यापी कलीसिया के स्थानीय अभिव्यक्तियों (जिन्हें कलीसियाएं कहा जाता है) को अपने असीमित रीति से अनमोल पति के प्रति उचित स्नेहों को बनाए रखना है। वचन की सेवा के द्वारा (यूहन्ना 15:11) पवित्र आत्मा की सामर्थ्य में होकर (यूहन्ना 16:14), कलीसिया ख्रीष्ट को बहुमूल्य जानने के अनुभव बनाए रखती है – अपने सदस्यों के लिए तथा संसार के लिए।

इसलिए, आइए हम प्रार्थना करें तथा ख्रीष्ट के रस्सास्वादन तथा बनाए रखने एवं प्रसार करने तथा ख्रीष्ट को बहुमूल्य जानने के गहरे अनुभव के महान कारण के लिए कार्य करें। और, उस उद्देश्य हेतु, आइए उन बढ़ती हुई तथा उन्नति करती हुई कलीसियाओं से प्रेम करें जहां पर यह बना रहता है।  

टोनी रेंकी desiringgod.org के वरिष्ठ लेखक हैं, वह Ask Pastor John पॉडकास्ट के मेजबानी करता हैं और अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ फीनिक्स क्षेत्र में रहते हैं।
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