कोविड-19 कैसे हमें परमेश्वर के निकट लाता है?

आज कोविड-19 से पूरे विश्व के लोग विचलित हैं। हमारे देश में भी कोरोना के आंकड़ों में वृद्धि हो रही है। चारों ओर निराशा है। आज लोग मृत्यु से भयभीत हैं, हम में से कई लोग अपने प्रियजनों को खो दिए हैं। हम आए दिन मृत्यु के समाचार को सुनते हैं। आज अनेकों ख्रीष्टीय भाई और बहन इस महामारी से संक्रमित होकर प्रभु में सो गए हैं। वास्तव में हम एक कठिन समय में जी रहे हैं। ऐसे समय में लोग परमेश्वर के बारे में अनेकों प्रश्न पूछ रहे होंगे। सम्भवतः आप भी भजनकार के जैसे परमेश्वर से पूछ रहे होंगे, हे यहोवा तू क्यों बहुत दूर खड़ा रहता है ? तू कहाँ पर है ? हे यहोवा कब तक ? किसी ने सही कहा है, “परमेश्वर हमारे सुखों में फुसफुसाता है, हमारे विवेक में बोलता है, परन्तु हमारे दुख-पीड़ा में पुकारता है: यह एक बाहरी जगत को जगाने के लिए उसका मेगाफोन है।” 

हो सकता है कि हमें अनुभव हो रहा हो कि इस महामारी में परमेश्वर हमसे दूर हो गया है। परन्तु क्या आप जानते हैं कि यह महामारी हमें परमेश्वर से दूर करने के स्थान पर परमेश्वर के निकट लाती है। कैसे यह महामारी हमें परमेश्वर के निकट लाती है? आइए इस लेख में हम देखेंगे कैसे कोविड-19 हमें परमेश्वर के निकट लाता है:

पहला, कोविड-19 के प्रति मनुष्य की असफलता हमें परमेश्वर के निकट लाती है।
कोरोना महामारी से कई अन्य देशों के साथ भारत देश भी विचलित है। सम्पूर्ण संसार इस वायरस के आगे असहाय है। आज तकनीकी और व्यवस्थाएं सब विफल हैं। कहीं ऑक्सीजन के लिए हाहाकार है तो कहीं अस्पताल में बेड के लिए मारामारी है। कोरोना की दूसरी लहर में स्थिति इतनी दयनीय होगी, इसका किसी ने अनुमान नहीं लगाया था। आज कई लोग पैसों के अभाव में अपनों को नहीं बचा पाए , तो किसी के पास पैसा और शक्ति सब था, फिर भी उपचार नहीं मिलने के कारण उनको खो दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस को नियंत्रित करने का एकमात्र उपाय पूरे संसार में सबका टीकाकरण ही है। फिर भी हम आए दिन ऐसी हृदयविदारक घटनाओं के बारे में सुनते हैं कि कैसे कोरोना के सामने आज मनुष्य असफल तथा असहाय है। यह इस सत्य को सिखाता है, कि मनुष्य कुछ भी नहीं है। मनुष्य की असहाय स्थिति और असफलता उसे परमेश्वर के निकट जाने हेतु प्रेरित करती है।

दुख या पीड़ा परमेश्वर में हमारी आशा को दृढ़ करता है और हम और अधिक परमेश्वर के पर भरोसा रखते हैं और उसकी निकटता में बढ़ते हैं।

बाइबल हमारी वास्तविकता के बारे में बताती है, अतः मनुष्य से जिसकी श्वास उसके नथनों में है, दूर ही रहो क्योंकि उसका मूल्य है ही क्या? (यशायाह 2:22)। मनुष्य तो श्वास के समान है, उसके दिन ढ़लती हुई छाया के समान है (भजन 144: 4)। वह छाया के समान ढ़ल जाता, और बना नहीं रहता ( अय्यूब 14:2)। सब धूल से बने और सब धूल में मिल जाते हैं (सभोपदेशक 3:20)। वास्तव में मनुष्य असहाय हैं। मनुष्य सीमित प्राणी है, परन्तु परमेश्वर असीमित है। यही कारण है कि परमेश्वर के वचन में लिखा है, तू सम्पूर्ण हृदय से यहोवा पर भरोसा रखना, और अपनी समझ का सहारा न लेना (नीतिवचन 3:5)। मनुष्य की दयनीय और असहाय स्थिति उसे परमेश्वर के विषय में विचार करने के लिए विवश करती है। यह तो स्पष्ट है कि न तो हम इस महामारी से बच सकते हैं और न ही इसे पूर्ण रीति से समाप्त कर सकते हैं। यह हमें कारण देता है कि हम पूर्ण रीति से परमेश्वर के पास आए। हमारी असफलता हमें परमेश्वर के निकट लाती है। 

दूसरा, कोविड-19 के ऊपर परमेश्वर की सम्प्रभुता हमें परमेश्वर के निकट लाती है।
आज इस महामारी के समय में कई लोग पूछ रहे होंगे कि परमेश्वर कैसा है और कहाँ है। बाइबल बताती है कि वह सम्प्रभु परमेश्वर है, और वह स्वर्ग पर विराजमान है। यह बात हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित करती है। बाइबल का परमेश्वर सम्प्रभु परमेश्वर है। इसका अर्थ यह है कि परमेश्वर का अधिकार सब लोगों के ऊपर और सब वस्तुओं पर है। वह सब बातों पर नियंत्रण करता है। वह सारी सृष्टि पर प्रभुता करता है। परमेश्वर का वचन बताता है, जो कुछ यहोवा चाहता है, उसे वह आकाश में और पृथ्वी पर, समुद्र-तलों में करता है (भजन 135: 6)। उसके पास सम्पूर्ण सृष्टि पर अधिकार है। उसके पास न केवल पृथ्वी के ऊपर अधिकार है, परन्तु स्वर्ग के ऊपर भी उसका अधिकार है (मत्ती 28:18)। उसका अधिकार प्रकृति के ऊपर (मरकुस 4:39), मृत्यु के ऊपर, बीमारी के ऊपर, दुष्ट आत्मा के ऊपर, पापों को क्षमा करने का अधिकार है। परमेश्वर को जब हम जानते हैं तब हम उसके निकट सहायता के लिए जाते हैं।

स्मरण रखें, वह सम्प्रभु परमेश्वर है। यीशु मसीह का अधिकार कोरोना वायरस के ऊपर भी है। वह कोई साधारण मनुष्य नहीं है, कोई बाबा नहीं है, वह केवल कोई गुरु नहीं है। बाइबल हमें बताती है, उसके पास  प्रत्येक चीजों के ऊपर अधिकार है और  वह अपने अधिकार में होकर सब चीजों को नियंत्रित करता है। वह आज भी जीवित है, स्वर्ग पर विराजमान है और वहां से वह पूरे संसार के ऊपर प्रभुता करता है। यह बात हमें सांत्वना देती है। भजनकार कहता है,परमेश्वर हमारा शरणस्थानऔर बल है, संकट के समय तत्पर सहायक। इसलिए हम नहीं डरेंगे, चाहे पृथ्वी उलट जाए ”( भजन संहिता 46:1-2 )। 

तीसरा, कोविड-19 का पीड़ादायक अनुभव हमें परमेश्वर के निकट लाता है। 
कोविड़ -19 हमारे लिए एक पीड़ादायक अनुभव हो सकता है। लेकिन यह अनुभव हमें परमेश्वर के निकट लेकर आता है। बाइबल बताती है, “भले ही तुम्हें अभी कुछ समय के लिए विभिन्न परीक्षाओं के द्वारा दुख उठाना पड़ा हो कि तुम्हारा विश्वास-जो आग में ताए हुए नश्वर सोने से भी अधिक बहुमूल्य है-परखा जाकर यीशु ख्रीष्ट के प्रकट होने पर प्रशंसा, महिमा, और आदर का कारण ठहरे ” (1 पतरस 1:6-7)।  हमारे दुख या पीड़ा हमारे विश्वास को दृढ़ करती है। हमारे दुख या पीड़ा आग में सोने के सदृश हैं। जिस प्रकार से आग सोने को शुद्ध करती है, आग सोने को चमकाती है, उसी प्रकार से दुख या पीड़ा परमेश्वर में हमारी आशा को दृढ़ करता है और हम और अधिक परमेश्वर के पर भरोसा रखते हैं और उसकी निकटता में बढ़ते हैं।

भले ही यह दुख, संकट हमारे लिए पीड़ादायक और असहनीय हो, परन्तु यह हमारी भलाई के लिए है। बाइबल बताती है, “जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं उनके लिए वह सब बातों के द्वारा भलाई को उत्पन्न करता है ”(रोमियों 8:28)।  भजनकार कहता है, “मुझ पर जो क्लेश आया वह मेरे लिए भला ही हुआ कि मैं तेरी विधियों को सीख सकूं ” (भजन संहिता 119:71)।  याकूब कहता है, “यह जानते हुए कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है ” (याकूब 1:3)।  पौलुस कहता है, “परन्तु हम अपने क्लेशों में भी आनन्दित होते हैं, क्योंकि यह जानते हैं कि क्लेश में धैर्य उत्पन्न होता है, तथा धैर्य से खरा चरित्र, और खरे चरित्र से आशा उत्पन्न होती है ” (रोमियों 5:3-4)।

अंत में, कोविड -19 की अनिश्चितता हमें परमेश्वर के निकट लाती है। 
यह महामारी हमें स्मरण दिलाती है, कि हमारा जीवन क्षणभंगुर, अस्थायी और अनिश्चित है। इस संसार में कोई आशा नहीं। कोरोना वायरस की अनिश्चितता और उसके रूप को  देखते हुए संसार के लोग भयभीत है और चिंतित हैं। वास्तव में इस संसार में कोई स्थायी, निश्चित, आशा नहीं है। इन सब बातों के मध्य में बाइबल बताती है कि हमारे पास एक जीवित आशा है (1 पतरस 1:3)। उस आशा में हमारा उद्धार हुआ है ( रोमियों 8: 24 )। यीशु ख्रीष्ट हम को लेने के लिए आएंगे। जहां पर कोई महामारी नहीं होगी, न कोई वायरस होगा। प्रभु यीशु ख्रीष्ट ने हमारे लिए एक स्थान तैयार किया है। हम यीशु के साथ हमेशा रहेंगे। इस संसार में पल भर का क्लेश उस आशा के सामने कुछ नहीं है (रोमियों 8:18)। 

प्रियों, इस महामारी के समय में स्मरण करें कि कैसे यीशु ने हमें परमेश्वर के निकट लाने के लिए लगभग दो हज़ार वर्ष पूर्व मनुष्य बनकर इस संसार में आ गया। बाइबल बताती है, स्मरण करो कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्य जाति थे, मसीह से अलग थे, इस्राएल की प्रजा कहलाए जाने से वंचित थे, और आशाहीन तथा संसार में परमेश्वर रहित थे। परन्तु अब ख्रीष्ट के लहू के द्वारा उसमें समीप लाए गए हो (इफिसियों 2: 11-13)। 

कोविड -19 से भी प्राणघातक वायरस पाप रूपी वायरस है, उससे हमें बचाने के लिए ख्रीष्ट यीशु इस संसार में आ गए। उसने एक सिद्ध धार्मिकता का जीवन जिया। हम पापियों के बदले में, हमारे स्थान पर, प्रभु यीशु ख्रीष्ट क्रूस पर मारे गए, गाड़े गए, और तीसरे दिन मृतकों में से जी उठे। यदि हम अपने पापों से पश्चाताप करते हैं और प्रभु यीशु ख्रीष्ट पर विश्वास करते हैं, तो हमारे सारे पाप क्षमा हो जाते हैं। हमें अनन्त जीवन मिलता है और हमारे पास एक आशा है कि हम मरेंगे और फिर से जी उठेंगे, और हम यीशु के साथ सर्वदा रहेंगे। उस दिन वह हमारे आँसुओं को पोंछ डालेगा। वहाँ कोई महामारी न होगी, उसकी उपस्थिति में आनन्द ही आनन्द होगा। स्मरण रखें, यीशु का क्रूस हमें परमेश्वर के निकट लाता है। एक दिन हम परमेश्वर के साथ सदा काल के लिए रहेंगे। पौलुस कहता है, हम पूर्णत: साहस रखते हैं तथा देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं ( 2 कुरिन्थियों 5: 8 ) ।