पापी इच्छा का कैसे विरोध करें?
<a href="" >जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

विश्वास ही से मूसा ने बड़े हो जाने पर फ़िरौन की बेटी का पुत्र कहलाना अस्वीकार कर दिया। उसने पाप के क्षणिक सुख भोगने की अपेक्षा, परमेश्वर की प्रजा के साथ दुख भोगना ही अच्छा समझा। उसने ख्रीष्ट के कारण निन्दित होने को मिस्र के धन के भण्डारों की अपेक्षा बढ़कर समझा, क्योंकि वह प्रतिफल पाने की आस लगाए था। (इब्रानियों 11:24-26)

या, यदि इसकी आवश्यक बातों का निचोड़ निकालें तो: “विश्वास ही से मूसा ने. . . पाप के साथ क्षणिक सुख भोगने की अपेक्षा, परमेश्वर की प्रजा के साथ दुख भोगना ही अच्छा समझा. . .क्योंकि वह प्रतिफल पाने की आस लगाए था” (इब्रानियों 11:24-26)। 

विश्वास “क्षणिक सुख” से सन्तुष्ट नहीं होता है। यह आनन्द के लिए भूखा है। ऐसा आनन्द जो बना रहता है। और परमेश्वर का वचन कहता है, “तेरी उपस्थिति में आनन्द की भरपूरी है; तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है” (भजन 16:11)। इसलिए, विश्वास पाप के कपटपूर्ण सुखों की ओर भटक नहीं जाएगा। यह सर्वाधिक आनन्द की खोज में इतनी सरलता से पराजय स्वीकार नहीं करेगा। 

परमेश्वर के वचन की भूमिका है विश्वास की उस भूख को तृप्त करना जो परमेश्वर के लिए है। और ऐसा करने में यह मेरे हृदय को वासना के कपटपूर्ण स्वाद से हटा देता है।

सबसे पहले, वासना मेरे साथ छल करती है और मुझे यह आभास दिलाती है कि यदि मैं पवित्रता के मार्ग का अनुसरण करूँगा, तो मैं वास्तव में किसी बड़ी सन्तुष्टि से चूक जाऊँगा। किन्तु तभी मैं आत्मा की तलवार उठाता हूँ और लड़ना आरम्भ कर देता हूँ।

  • मैंने यह पढ़ा है कि वासना की तुलना में अपनी आँख निकाल देना उत्तम है (मत्ती 5:29)। 
  • मैंने यह पढ़ा है कि यदि मैं उन बातों के विषय में सोचता हूँ जो पवित्र, मनोहर और उत्तम हैं, तो परमेश्वर की शान्ति मेरे साथ बनी रहेगी (फिलिप्पियों 4:8-9)। 
  • मैंने यह पढ़ा है कि शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है (रोमियों 8:6)। 
  • मैंने पढ़ा है कि शारीरिक वासना आत्मा के विरुद्ध युद्ध करती है (1 पतरस 2:11), और इस जीवन के सुख-विलास आत्मा के जीवन को दबा देते हैं (लूका 8:14)। 
  • परन्तु सबसे अच्छी बात जो मैंने पढ़ी वह यह है कि जो खरी चाल चलते हैं उनसे परमेश्वर कोई अच्छी वस्तु रख न छोड़ेगा (भजन 84:11), और जिनके हृदय शुद्ध हैं वे परमेश्वर को देखेंगे (मत्ती 5:8)। 

जब मैं प्रार्थना करता हूँ कि मेरा विश्वास परमेश्वर के जीवन और शान्ति से तृप्त हो, तो आत्मा की तलवार बाहर से लुभावनी दिखने वाली वासना के विष की मीठी परत को काटती है। मैं उसकी वास्तविकता को पहचान लेता हूँ। और परमेश्वर के अनुग्रह से इसकी लुभाने वाली सामर्थ्य तोड़ दी जाती है।

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