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जब आज्ञापालन दुःखदायी हो तब भी सहना

विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर अपनी दृष्टि लगाए रहें, जिसने उस आनन्द के लिए जो उसके सामने रखा था, क्रूस का दुःख सहा। (इब्रानियों 12:2)

विश्वास जो करता है वह कभी-कभी अवर्णनीय रीति से कठिन होता है।

अपनी पुस्तक मिरकल ऑन द रिवर क्वाय (Miracle on the River Kwai – क्वाई नदी पर घटित आश्चर्यकर्म) में अर्नेस्ट गॉर्डन युद्ध के उन बन्दियों के एक समूह की कहानी बताते हैं जो द्वितीय विश्व युद्ध के समय बर्मा रेल पर कार्य कर रहे थे।

हर दिन की समाप्ति पर कार्य करने वाले दल के उपकरणों को एकत्रित कर लिया जाता था। एक अवसर पर एक जपानी सिपाही चिल्लाने लगा कि एक फावड़ा कम था और उसने पूछा कि किसने उसे लिया है। वह बिगड़ने लगा और क्रोधित होने लगा, और पगलाकर आज्ञा देने लगा कि दोषी व्यक्ति सामने आए। कोई भी न हिला। वह बन्दियों पर अपनी बन्दूक तानते हुए चिल्लाया, “सब मरेंगे! सब मरेंगे!” उस क्षण एक पुरुष सामने आया और सिपाही ने अपने बन्दूक से उसको पीट-पीटकर मार डाला जबकि वह पुरुष सावधान मुद्रा में खड़ा रहा। जब वे शिविर में लौटे और उपकरणों को फिर से गिना गया तो एक भी फावड़ा कम नहीं निकला।

वह कौनसी बात है जो दूसरों के लिए मरने की इच्छा को तब भी बनाए रखेगा जब आप निर्दोष हैं? यीशु को हमारे लिए उसके प्रेम में “उस आनन्द” के द्वारा बनाए और उठाए रखा गया “जो उसके सामने रखा था।” उसने अपनी आशा एक महिमामय भविष्य के आशिष और आनन्द पर रखी, और उसी ने उसे उसके दुःख में भी प्रेम करते रहने के लिए बनाए और उठाए रखा। 

हम पर हाय, यदि हम सोचें कि हम पूर्णतः समर्पित तथा महँगी आज्ञाकारिता के लिए उस आनन्द जो हमारे सामने रखा है से बढ़कर के किसी और प्रेरणा के द्वारा प्रोत्साहित और दृढ़ किए जा सकते हैं। जब यीशु ने हमें इस महँगी आज्ञाकारिता के लिए बुलाहट दिया जिसके लिए इस जीवन में हमें त्याग करना पड़ेगा तब उसने लूका 14:14 में कहा, “तब तू आशीषित होगा, क्योंकि उनके पास कोई ऐसा साधन नहीं  कि तुझे बदला दें, परन्तु धर्मियों के जी उठने पर तुझे प्रतिफल मिलेगा।” दूसरे शब्दों में, अभी ख्रीष्ट के लिए उठाये गए अपनी सभी हानियों में दृढ़ हों जाएँ, उस आनन्द के कारण जो आपके सामने रखा है।

पतरस ने कहा कि जब यीशु ने बिना प्रतिशोध लिए दुःख उठाया, तो वह हमारे अनुसरण करने के लिए एक आदर्श रख रहा था — और इसमें यीशु के सामने रखे गए आनन्द पर उसका भरोसा सम्मिलित है। उसने अपने आप को परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया (1 पतरस 2:23) और उसने प्रतिशोध के साथ न्याय चुकाने का प्रयास नहीं किया। उसने अपनी आशा पुनरुत्थान पर और अपने पिता से पुनः मिलने तथा अपने लोगों के छुटकारे के सम्पूर्ण आनन्द पर रखी। हमें भी ऐसा ही करना चाहिए।

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जॉन पाइपर
जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।

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