कोविड संकट के प्रति 5 सही प्रतिउत्तर

हमारे जीवनकाल में पहले कभी हमने पूरे संसार को एक महामारी—कोविड-19 से पीड़ित नहीं देखा। जब से यह आया है , लाखों लोग इसके द्वारा उत्पीड़ित हुए  हैं और अनेकों लोग मृत्यु के मुंह में चले गए हैं। इसके परिणामस्वरूप अत्यधिक लोग वर्तमान में भ्रम, चिन्ता, भय, और निराशा का अनुभव  कर रहे हैं। 

तो इस महामारी के मध्य में परमेश्वर कहाँ है? क्या परमेश्वर के वचन के पास हमारी स्थिति के लिए उत्तर है? कलीसियाओं (पास्टर और विश्वासियों) को इस दयनीय स्थिति के प्रति कैसे प्रतिउत्तर करना चाहिए?

क्योंकि हमारे पास सर्वशक्तिमान परमेश्वर है, जो आकाश और पृथ्वी का सृजनहार है, इसलिए आइए हम उस पर भरोसा रखें, हम घबराएं नहीं, पर सहायता के लिए उसे पुकारें, और यह जानें कि वह अपनी इच्छा और उद्देश्यों को पूर्ण करेगा।

प्रतिउत्तर 1: पृथ्वी पर स्वर्ग की अपेक्षा मत करो
यह स्पष्ट है कि हम लोग पतित संसार में रहते हैं जो पाप और दुख से दूषित है। उत्पत्ति 3 अध्याय में परमेश्वर के विरुद्ध मनुष्य के पाप और विद्रोह ने सम्पूर्ण सृष्टि पर एक भयानक अभिशाप ला दिया। तब से मनुष्य जाति प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकम्प, बाढ़, अकाल और कोरोना वायरस की महामारी का सामना कर रही है। 

पवित्रशास्त्र यह घोषणा करता है, “क्योंकि हम जानते हैं कि सम्पूर्ण सृष्टि मिलकर प्रसव-पीड़ा से अभी तक कराहती और तड़पती है ” (रोमियों 8:22)। पास्टर और लेखक टिम केलर बताते हैं :

सृष्टि “विनाश के दासत्व ” में है (रोमियो 8:21)। यह मृत्यु और क्षय के निरन्तर चक्र में फंस गई है। प्रकति में सब कुछ का क्षय होता है और मर जाता  है। और इसलिए प्रकृति पीड़ा और दुख का क्षेत्र है। यह “ प्रसव -पीड़ा  के रूप में कराह रही है ” (रोमियों 8:22)। चीजों के क्षय के रूप में आदि से अन्त तक निरन्तर पीड़ा होती है। इस सृष्टि में कोई भी अनुभव पीड़ा से मुक्त नहीं है। 

हमें इस वास्तविकता को क्यों जानना चाहिए? क्योंकि हम इस शापित पृथ्वी से स्वर्ग के जैसे कार्य करने की अपेक्षा नहीं कर सकते हैं, अर्थात् पाप और दुख से मुक्त। केवल जब ख्रीष्ट पुनः आएंगे तो वह पृथ्वी का नवीनीकरण करेंगे और इसे नई सृष्टि बना देंगे। परन्तु जब तक हम इस पाप-शापित ग्रह पर रहते हैं, हम इसके पीड़ादायक प्रभावों का अनुभव करते हैं। ओह! सृष्टि के पुन:स्थापना हेतु हम मसीह के पुनः आगमन के लालयित हो सकते हैं।

प्रतिउत्तर 2: सर्वसामर्थी परमेश्वर पर भरोसा रखो
यद्यपि हम पतित संसार में रह रहे हैं फिर भी हम विपत्तियों का सामना करने के लिए छोड़ नहीं दिए गए हैं। भजनकार ने इस बात को स्वीकार किया, “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट के समय तत्पर सहायक। इसलिए हम नहीं डरेंगे, चाहे पृथ्वी उलट जाए (भूकम्प आए), और पर्वत समुद्र-तल में जा पड़ें, चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और उसके उमड़ने से पर्वत कांप उठे ” (भजन संहिता 46:1-3)। 

यदि हम उपर्युक्त खण्ड को सन्दर्भित करें तो हम भजनकार के साथ कह सकते हैं, “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट के समय तत्पर सहायक है। इसलिए यद्यपि कोरोना वायरस फैल रहा है “हम डरेंगे नहीं ” बहुत गति के साथ फैल रहा है और हमारे द्वार के निकट आ रहा है। ” 

किसी दूसरे स्थान पर, एक और भजनकार ने गाया, “क्योंकि वह कभी न डिगेगा, उसे सदा तक स्मरण किया जाएगा।; वह बुरे समाचारों से नहीं डरेगा, यहोवा पर भरोसा रखने के कारण उसका हृदय स्थिर है ” (भजन 112:6-7)। भयप्रद समयों में, हमारा हृदय सम्प्रभुता करने वाले प्रभु पर भरोसा करके ही विश्राम पाता है। भय और विश्वास दोनों एक साथ नहीं रहते हैं। जब हमारा विश्वास  परमेश्वर पर होता है, तो हम भयभीत नहीं होते हैं। जब हम भयभीत होते हैं, तो हम परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते हैं। इसके स्थान पर जब हम चिन्तित होते हैं, तो हम परमेश्वर से सच्चाई के साथ अपने भय और असुरक्षा को बांटते हैं, हम उससे करते  हैं कि वह हमारे विश्वास को दृढ़ करे।

जोनी एरिकसन टाडा एक लेखक, वक्ता, गायिका, और चित्रकार हैं — जो पहिएदार कुर्सी (व्हीलचेयर) से काम करती  हैं। 30 जुलाई, 1967 को, जब जोनी केवल 17 वर्ष के थी, तो उसे एक गोताखोरी दुर्घटना का सामना करना पड़ा जिसने उसे क्वाडरिप्लेजिक (गर्दन से नीचे पूरे शरीर का पूर्ण पक्षाघात) बना दिया अर्थात्  स्थायी रूप से उसे स्थानान्तरित करने या उसकी बाहों या पैरों का अनुभव करने में असमर्थ बना दिया। इसके पश्चात वह तीसरे चरण के स्तन कैंसर से पीड़ित हो गई। कोविड-19 के संकट के समय में उन्होंने लिखा :

मैं इस कोरोना वायरस के समय में व्यक्तिगत रूप से बहुत ही संकट में हूँ। मैं एक क्वाड्रिपेल्जिक की 70 वर्ष की बहुत ही नाज़ुक फेफड़े वाली वृद्ध महिला हूँ, प्रतिरक्षा तंत्र जो बहुत ही सरलता से संकट में जा सकता है। किन्तु मैं अपने आत्मविश्वास को बढ़ाती हूँ कि संसार सर्वशक्तिमान परमेश्वर का है, इसलिए ख्रीष्टीय लोग उसकी योजना और उद्देश्य में आश्वस्त हो सकते हैं। घबराहट में फंसने या दोष में फंसने का कोई भी कारण नहीं है।

इसलिए, क्योंकि हमारे पास सर्वशक्तिमान परमेश्वर है, जो आकाश और पृथ्वी का सृजनहार है, इसलिए आइए हम उस पर भरोसा रखें, हम घबराएं नहीं, पर सहायता के लिए उसे पुकारो, और यह जानो कि वह अपनी इच्छा और उद्देश्यों को पूर्ण करेगा।

प्रतिउत्तर 3: बुद्धिमान बनो और सुरक्षित रहो
पवित्रशास्त्र इंगित करता है, “विपत्ति को आते देख कर चतुर (बुद्धिमान) मनुष्य छिप जाता है, भोले-भाले (मूर्ख) आगे बढ़कर दण्ड पाते हैं ”(नीतिवचन 22:3)। हमें घबराना नहीं चाहिए, परन्तु हमें सावधान होना चाहिए और लापरवाह नहीं होना चाहिए। उपस्थित  जोखिम को न मानने के कारण बहुत से लोग कोविड को अनावश्यक रूप ग्रहण कर रहे हैं। इसलिए

  1. 20 सेकण्ड के लिए अपने हाथों को धोते रहें, विशेषकर जब आप बाहर जाते हैं और चीजों को छूते हैं।
  2. अपने चेहरे, आँखों, मुंह और नाक को छूने से बचें। वायरस को प्राप्त करने का प्राथमिक माध्यम हमारे संक्रमित अंगुलियों से हमारे चेहरे को छूना है।
  3. उच्च कोटि का अच्छा फेस मास्क पहनें।
  4. सामाजिक दूरी बनाए रखें, विशेषकर ऐसे लोगों से जिन्हें खांसी, जुकाम और ज्वर है। सार्वजनिक स्थानों, पार्टियों, और सभी प्रकार की भीड़ वाली सभाओं से बचें।

रोग नियन्त्रण और रोकथाम केन्द्र (सी. डी. सी.) के अनुसार, “बीमारी को रोकने का सबसे अच्छा माध्यम इस वायरस के सम्पर्क में आने से बचना।”

स्मरण रखें, यह मूर्खता है कि केवल प्रभु पर भरोसा रखें और लापरवाह रहें। यह भी मूर्खता है कि सावधान रहें और प्रभु पर भरोसा न रखें।

आइए हम जानें कि कोविड से अधिक, पाप एक प्राणघातक बीमारी है। कोविड से छुटकारा पाने से अधिक, लोगों को आवश्यकता है कि ख्रीष्ट उन्हें उनके पाप से छुड़ाए।

प्रतिउत्तर 4: आशाहीन लोगों को सुसमाचार का प्रचार करें 
परमेश्वर का वचन दृढ़तापूर्वक कहता है, “क्योंकि पाप की मज़दूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु ख्रीष्ट यीशु में अनन्त जीवन है ” (रोमियों 6:23)। परमेश्वर के प्रिय सन्तान होने कारण हम कितने धन्य हैं, कि हमारे पास ख्रीष्ट यीशु में अनन्त जीवन की आशा है! परन्तु हमारे आस-पास के लोगों को ख्रीष्ट रहित और आशा रहित जीवनों को व्यतीत करते हुए देखना कितना दुखद है!

अपनी सुरक्षा पर विचार करना अच्छा है, परन्तु आइए हम अविश्वासियों की आशारहित स्थिति के प्रति दृष्टिहीन न हो जाएं। जब पौलुस और सिलास को बुरी तरह  से पीटा गया और बन्दीगृह में डाल दिया गया, तो वे अपने स्वयं की  पीड़ित में चिंतामग्न नहीं थे। इसके स्थान पर, अपने शारीरिक पीड़ा और वेदना में, व बन्दियों और बन्दीगृह के अध्यक्ष के समक्ष ख्रीष्ट के सुसमाचार के गवाह बन गए। उनकी साहसिक साक्षी ने बन्दीगृह के अध्यक्ष और उसके परिवार को प्रभु में आने के लिए प्रेरित किया। (प्रेरितों के काम 16:16-34)।

आइए हम जानें कि कोविड से अधिक, पाप एक प्राणघातक बीमारी है। कोविड से छुटकारा पाने से अधिक, लोगों को आवश्यकता है कि ख्रीष्ट उन्हें उनके पाप से छुड़ाए। इसलिए जब मृत्यु हमारे चारों ओर घूम रही है, तो क्या यह समय नहीं है कि हम अपना मुंहों को खोलें और साहस के साथ ख्रीष्ट के सुसमाचार का प्रचार करें? सुनें कि चार्ल्स स्पर्जन (1834-1892) ने हैजे की महामारी के समयकाल में सक्रिय रूप से सुसमाचार का प्रचार किया :

यदि कभी ऐसा समय आता है जब मन संवेदनशील होता है, यह तब होता है जब मृत्यु हमारे आस-पास होती है। मैं स्मरण करता हूँ , जब में पहली बार लंदन आया था, तो लोग किस प्रकार उत्सुकतापूर्वक सुसमाचार सुनते थे, क्योंकि हैजा बहुत भयंकर रीति से प्रबल था । तब थोड़ा उपहास हो रहा था…पूरे दिन, और कभी-कभी रात भर, मैं घर-घर गया और देखा कि पुरुष और स्त्रियां मर रहे हैं, और ओह, वे मुझे देखकर कितना आनन्दित थे ! जब बहुत से लोग उनके घरों में प्रवेश करने से भयभीत  थे कि कहीं उन्हें प्राणघातक बीमारी पकड़ न ले, हम वे लोग थे  जिन लोगों को ऐसी बात के बारे में कोई भय नहीं था, हमने पाया कि लोगों ने हमें बहुत ही आनन्द के साथ सुना जब हमने ख्रीष्ट और ईश्वरीय बातों की बात की।

इसलिए यह समय हमारे लिए चुप रहने का नहीं है। वायरस हर स्थान पर बढ़ रहा है और बहुत से लोगों के जीवनों को ले रहा है। आइए हम भले कार्यों को करें जो हम कर सकते हैं और विश्वासयोग्यता के साथ ख्रीष्ट के सुसमाचार का प्रचार करें, यह भरोसा करते हुए कि परमेश्वर लोगों को नया आत्मिक जन्म दे और उन्हें अपने अनन्त राज्य में लाए। 

प्रतिउत्तर 5: कभी भी मरने के लिए तैयार रहें
पृथ्वी पर हमारा जीवन क्या है? परमेश्वर का वचन उत्तर देता है, “आपका जीवन क्या है? क्योंकि तुम तो भाप के समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है और फिर अदृश्य हो जाती है ”(याकूब 4:14)। हम अनिश्चितताओं के संसार में रहते हैं। हमारा भौतिक जीवन क्षणिक है। मृत्यु का होना निश्चित है। और हमें किसी भी समय मृत्यु का सामना करने के लिए तत्पर रहना चाहिए।

यदि हम मर जाते हैं तो हमें घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हमारे प्रिय प्रभु ने कहा, कि “पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूँ। जो मुझ पर विश्वास करता है यदि मर भी जाए फिर भी जीएगा…क्या आप इस पर विश्वास करते हैं? ” (यूहन्ना 11:25-26) क्या आप वास्तव में ख्रीष्ट के वचनों पर विश्वास करते हैं? क्या प्रभु ने यह नहीं कहा, “आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरा वचन कभी नहीं टलेगा? ” (लूका 21:33)। 

स्मरण रखें कि प्रभु के पास “मृत्यु और अधोलोक की कुंजियां ” हैं (प्रकाशितवाक्य 1:18)। यदि हमारा प्रभु पृथ्वी पर जीवन देता है, तो  हम जीते हैं, और यदि वह हमें अपने घर बुला ले, तो कोई भी हमें रोक नहीं सकता है। जॉन चार्ल्स राइल (1816-1900) ने ठीक ही कहा था, “संसार की समस्त शक्तियाँ मेरे जीवन को तब तक नहीं छीन सकती, जब तक कि परमेश्वर अनुमति न दे। पृथ्वी के सारे  चिकित्सक इसे जीवित नहीं रख सकते, जब परमेश्वर मुझे बुला ले । ”

19वीं शताब्दी के कालावधि में, लाखों लोग हैजा की महामारी के कारण मर गए। चार्ल्स एच. स्पर्जन की गवाही पर विचार कीजिए जो एक स्त्री के बारे में थी जो हैजा से मर रही थी :

मैं घर गया, और शीघ्र ही एक युवा स्त्री को देखने के लिए मुझे फिर से बुला लिया  गया। वह अन्तिम चरम स्थिति में भी थी,  परन्तु यह एक उचित, अच्छा दृश्य था। वह गा रही थी — यद्यपि उसे पता था कि वह मर रही है — और अपने पास के लोगों से बात कर रही थी, अपने भाइयों और बहनों से स्वर्ग में मिलने की बात कह रही थी, अपने पिता से विदाई ले रही थी, और पूरे समय मुस्करा रही  थी जैसे कि यह उसके विवाह का दिन था। वह प्रसन्न थी और धन्य थी कौन है वह व्यक्ति जो मरने से नहीं डरता? मैं तुमसे बताता हूँ वह व्यक्ति जो विश्वासी है ।

सम्भवतः हम इस जावन स्त्री के  सदृश मृत्यु का सामना साहस के साथ कर सकें? जो लोग ख्रीष्ट में हैं, उनके लिए पृथ्वी पर उनकी मृत्यु स्वर्ग में उनका जन्मदिन है। एक ख्रीष्टीय के लिए, मृत्यु पदावनति के प्रति एक निराशा नहीं है, परन्तु यह महिमा के लिए एक पदोन्नति है। एक विश्वासी मृत्यु के द्वारा अपने निकट और प्रिय लोगों से दूर हो सकता है, परन्तु वह सबसे प्रिय के सबसे निकट जाता है, जिसके द्वारा और जिसके लिए वह बनाया गया था।

इसलिए, प्रिय विश्वासियों ख्रीष्ट में हृदय को लगाएं। क्योंकि ख्रीष्ट हमारे पापों के लिए मर गया और मृतकों में से जी उठा, हम जो जी उठे उद्धारकर्ता और सर्वोच्च प्रभु में विश्वास करते हैं, वे कभी भी मरने के लिए तत्पर रह सकते हैं और परमेश्वर की अनन्त महिमा में प्रवेश कर सकते हैं। प्रिय पाठकों, यदि आपने वास्तव में अपने पापों से पश्चाताप नहीं किया है और प्रभु यीशु ख्रीष्ट पर विश्वास नहीं किया है, तो क्यों न अभी ऐसा करें और ख्रीष्ट में परमेश्वर का अनन्त जीवन का निःशुल्क उपहार प्राप्त करें?


यह लेख ‘एक्विप इण्डियन चर्चस’ पर प्रकाशित लेख से अनुवादित किया गया है, जिसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं: https: //equipindianchurches.com/blog/5-wise-responses-to-the-covid-crisis/