नये वर्ष के लिए बाइबल हमारे जीवन में बहुत ही आवश्यक है।

नये वर्ष को लेकर संसार के लोग अलग-अलग प्रकार से तैयारी कर चुके हैं और बहुत सारे संकल्प भी बना चुके हैं। सम्भवत: इस नये साल के लिए आपने सुची भी बना ली होगी कि आपको कौन कौन सी चीजों की आवश्यकता है। हम अपने शरीर के लिए तो बहुत कुछ करते है, चिंतित रहते हैं और योजनायें बनाते हैं। हम अपना प्राण के लिए क्या करते है? क्या आपकी सुची तथा योजनाओं में बाइबल है ?  यह सच है कि बाइबल हमारे जीवन के लिए बहुत ही आवश्यक है और लाभदायक है। क्योंकि यह हमारे लिए आत्मिक विटामिन है। इसमें कोई संदेह नहीं कि बाइबल दुनिया के इतिहास में सबसे ज्यादा प्रभावशाली पुस्तक है, जो कभी लिखी गयी है। एक ऐसी पुस्तक है जिसे हमें प्राथमिकता देना है और उसके साथ चिपक के रहना है वह है बाइबल। क्योंकि यह पुस्तक सब पुस्तकों से अलग है। यह एक अनोखी और अदभुत पुस्तक है, जो परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है (2 तीमुथियुस 3:16)। यह पुस्तक बहुत सारे जीवनों में प्रभाव डालती है। आज भी यह अनेकों के जीवन में परिवर्तन और आशा को लेकर आती है। इसलिए इस लेख में हम कुछ कारणों को देखेंगे कि क्यों बाइबल हमारे जीवन के लिए बहुत ही आवश्यक है । 

 हम अपने शरीर के लिए तो बहुत कुछ करते है, चिंतित रहते हैं और योजनायें बनाते हैं। हम अपने प्राण के लिए क्या करते है? क्या आपकी सूची तथा योजनाओं में बाइबल है ?

क्योंकि बाइबल के द्वारा परमेश्वर हमसे बात करता है।
बाइबल क्यों हमारे जीवन के लिए बहुत ही आवश्यक है? क्योंकि बाइबल के द्वारा परमेश्वर हमसे बात करता है। बाइबल का परमेश्वर बात करने वाला परमेश्वर है। बाइबल के आरम्भ में ही देखते हैं कि परमेश्वर बात करता है। तब परमेश्वर ने कहा, “उजियाला हो” और उजियाला हो गया (उत्पत्ति 1:3)। इब्रानियों का लेखक कहता है, प्राचीन काल में परमेश्वर ने नबियों के द्वारा पूर्वजों से बार बार तथा अनेक प्रकार से बाते करके, इन अंतिम दिनों में हमसे अपने पुत्र के द्वारा बातें की हैं (इब्रानियों 1:1-2)। परमेश्वर कैसे बात करता है? परमेश्वर अपने वचन के द्वारा अपने लोगों से बात करता है। क्या यह अद्भुत नहीं है! जब भी हम बाइबल को खोलते हैं, परमेश्वर हमसे बात करता है। इसलिए अन्य पुस्तकों की अपेक्षा बाइबल को प्राथमिकता देना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर की सुनने के लिए। परमेश्वर ने हमें बाइबल दिया है, क्योंकि वह हमसे इतना प्रेम करता है, कि हमें बतायें कि वह क्या सोचता है और हमें बतायें कि हम कैसे जीएं। यह कितनी सौभाग्य की बात है कि दुनिया को बनाने वाले परमेश्वर हमसे बात करता है, और वह अपनी सम्पूर्ण इच्छा को बाइबल में प्रकट किया है। यदि हम परमेश्वर की आवाज़ को सुनना चाहते हैं, यदि हम चाहते हैं कि परमेश्वर हमसे बात करें तो हमारे लिए आवश्यक है कि हम अपनी बाइबल को खोलकर पढ़े। क्योंकि बाइबल के द्वारा परमेश्वर हमसे बात करता है।

क्योंकि बाइबल हमें सत्य बताती है।
बाइबल हमारे जीवन के लिए बहुत ही आवश्यक है क्योंकि बाइबल के द्वारा न केवल परमेश्वर हमसे बात करता है, बल्कि यह हमें सत्य बताती है। बाइबल में लिखा है, परमेश्वर जो झूठ नहीं बोल सकता (तीतुस 1:2)। दाऊद कहता है, यहोवा की विधियाँ सत्य हैं, और पूर्णत: धर्ममय हैं (भजन संहिता 19:9)। भजनकार कहता है, तेरा संपूर्ण वचन सत्य ही है (भजन संहिता 119:160)। यीशु मसीह अपनी महायाजकीय प्रार्थना में कहा, सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर- तेरा वचन सत्य है ( यूहन्ना 17:17)।

बाइबल परमेश्वर के बारे में सत्य बताती है, जैसे परमेश्वर कौन है, परमेश्वर पवित्र है, संप्रभु है, न्यायी है, इत्यादि। बाइबल हमारे जीवन के बारे में सत्य बताती है, जैसे हम कौन है? हम कहाँ से आये हैं? और हम कहाँ जा रहे हैं ? मरने के बाद के जीवन के बारे में सत्य बताती है। बाइबल सुसमाचार के बारे में सत्य बताती है। पापों से छुटकारा के बारे में बताती है। स्वर्ग के बारे में सत्य, नरक के बारे में सत्य, न्याय के बारे में सत्य बताती है। अंत के दिन के बारे में सत्य बताती है। जितना हमारे जीवन के लिए आवश्यक है, बाइबल हमें सबकुछ सत्य बताती है।

यदि हम चाहते हैं कि परमेश्वर हमसे बात करें तो हमारे लिए आवश्यक है कि हम अपनी बाइबल को खोलकर पढ़े।

डेविड मेथिस कहते हैं, कि हम बिना बाइबल के सच्चा सुसमाचार, वास्तविक यीशु मसीह, सच्चा परमेश्वर को जल्दी से खो सकते हैं। यह सच है कि हम बिना बाइबल के सच्चा परमेश्वर,के बारे में सत्य को नहीं जान सकते है। क्योंकि परमेश्वर ने अपने आपको बाइबल में प्रकट किया है। यदि आप परमेश्वर को जानना चाहते हैं, यदि आप सत्य को जानना चाहते हैं, तो अवश्य आप बाइबल को पढ़े।  इस संसार में बहुत सारे झूठ है। बिना बाइबल के हम सत्य को जान नहीं सकते हैं। 

क्योंकि बाइबल हमारे जीवन में सच्चा परिवर्तन लेकर आती है।
बाइबल हमारे जीवन के लिए बहुत ही आवश्यक है क्योंकि परमेश्वर का सत्य तथा उसका वचन हमें परिवर्तित करता है। यह परिवर्तन कैसा होता है? यह धर्म परिवर्तन नहीं होता है, बल्कि यह मन में परिवर्तन होता है। बाइबल बताती है, अपने मन के नए हो जाने से तुम परिवर्तित हो जाओ ( रोमियों 12:2)। हमारा मन कैसे परिवर्तन होता है ? परमेश्वर का वचन एक दर्पण के समान है जो हमारे पापों का दिखाता है। जब हम बाइबल पढ़ते है, तब हमारे पाप उजागर होते हैं। वचन हमारे मन को कायल करता है। वचन हमारे मनों को कचोटता है। क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, प्रबल और किसी भी दोधारी तलवार से तेज़ है। वह प्राण और आत्मा, जोड़ों और गूदे, दोनों को आर पार बेधता और मन के विचारों तथा भावनाओं को परखता है ( इब्रानियों 4:12)। वचन हमें पवित्र बनाता है (यूहन्ना 17:17)। वचन पाप से दूर करता है (भजन संहिता 119:11)। पतरस कहता है, तुमने परमेश्वर के जीवित तथा अटल वचन के द्वारा नया जन्म प्राप्त किया है (1 पतरस 1:23)। पौलुस कहता है, विश्वास सुनने से और सुनना मसीह के वचन के द्वारा होता है (रोमियों 10:17)।

कलीसिया इतिहास में हम देखते हैं कि जब उस समय कलीसिया में बहुत भ्रष्टाचार था और कलीसिया में बहुत सारी गड़बड़ी चल रही थी। क्योंकि उस समय में बाइबल को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी। परन्तु समाज सुधारकों जैसे, मार्टिन लूथर, जाॅन कैल्विन ने बाइबल तथा परमेश्वर का वचन के द्वारा ख्रीष्टीय समाज में एक जागृति तथा बड़ा परिवर्तन को लेकर आये। आज भी अनेकों के जीवन में बाइबल परिवर्तन लेकर आती है। मेरे जीवन में भी बाइबल  परिवर्तन लाई है।

इसलिए पौलुस अपनी सेवकाई के अंत में तीमुथियुस को विशेष निर्देश देता है, वह कहता है, बचपन ही से पवित्र शास्त्र तेरा जाना हुआ है जो मसीह यीशु में विश्वास के द्वारा तुझे उद्धार पाने के लिए बूद्धि दे सकता है। संपूर्ण पवित्रशाश्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और शिक्षा, ताड़ना, सुधार और धार्मिकता की शिक्षा के लिए उपयोगी है, जिससे कि परमेश्वर का भक्त प्रत्येक भले कार्य के लिए कुशल और तत्पर हो जाए (2 तीमुथियुस 3:16-17)। परमेश्वर का वचन ही हमें परिवर्तन करता है। किसी प्रभु के दास ने सही कहा है, “बहुत सारी पुस्तकें हैं जो हमें जानकारी देती है, ऐसी ओर पुस्तकें हैं जो समाज में जागृती लेकर आती है, परन्तु बाइबल ही जीवन को परिवर्तित करती है।” 

क्योंकि बाइबल हमें सच्चा आनन्द प्रदान करती है।  
बाइबल इसलिए हमारे जीवन के लिए बहुत ही आवश्यक है क्योंकि यह हमें सच्चा आनन्द प्रदान करती है। यह एक आनन्दित जीवन जीने का रहस्य है। इस बात को हम पहला भजन में देखते है। वह तो यहोवा की व्यवस्था से आनन्दित होता है (भजन संहिता 1:2)। भजनकार कहता है, यहोवा का उपदेश सही हैं, जो हृदय को आनन्दित कर देते हैं (भजन संहिता 19:8)। वह आगे परमेश्वर का वचन के बारे में कहता है, वे सोने से हां बहुत से ताए हुए सोने से भी अधिक मनभावने हैं; वे तो मधु से, यहां तक कि टपकने वाले छत्ते से भी मधुर है ( भजन संहिता 19: 10)। हम संसार में गलत जगह पें आनन्द को ढ़ूढ़ते है। संसार हमें आकर्षित करता है। संसार कहता है, यह ले लो, वह ले लो, पैसा कमालो, नौकरी करलो, शादी करलो, मकान बनालो, तो तुम आनन्दित होगें। सच्चाई तो यह है कि हम परमेश्वर के बिना आनन्दित नहीं होगें।

यिर्मयाह भविष्यवक्ता कहता है कि, तेरे वचन मेरे हृदय के लिए आनन्द और हर्ष के कारण बने हैं (  यिर्मयाह 15: 16)। जाॅन पाइपर कहते है, “कोई भी मनुष्य हमारे प्राण को उस प्रकार सांत्वना नहीं दे सकता है जिस प्रकार से परमेश्वर देता है। उसकी सांत्वना अटल है। यह सांत्वना केवल उसके वचन अर्थात बाइबल ही से आती है।” 

प्रियों स्मरण रखें, बाइबल ही हमें सच्चा आनन्द प्रदान करती है। यह संसार कभी भी हमें सच्चा आनन्द दे नहीं सकता है। 

 वास्तव में आज हमारे लिए एक बात आवश्यक है जिसे हमें प्राथमिकता देना चाहिए वह है बाइबल। हमें इस पुस्तक से प्रेम करना है।

यीशु ख्रीष्ट हमारे लिये सबसे अच्छा उदाहरण है। 
यीशु के जीवन में देखते हैं कि उसने अपने जीवन काल में बाइबल को प्राथमिकता दी। बाइबल हमें बताती है, कि जब उसकी परीक्षा हुई, उस समय यीशु ख्रीष्ट वचन का उद्धरण कर रहे हैं। यहां तक कि मृत्यु के समय में भी यीशु ख्रीष्ट ने वचन का उद्धरण किये हेैं। उसका जीवन वचन से भरा हुआ था। वह हमारे लिए आदर्श है।

प्रियों, इसलिए बाइबल को पढ़िए, अध्ययन कीजिए, मनन कीजिए, मुखाग्र कीजिए, संचय कीजिए, वचन को सुव्यवस्थित तरीके से पढ़े, वचन के साथ चिपक के रहिए। कलीसिया में  प्रति रविवार को वचन की भूख के साथ आइये। एक दूसरे के साथ बाइबल पढ़िए। परमेश्वर ने मूसा की मृत्यु के पश्चात यहोशू से कहा, व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे मुंह से कभी दूर न हो, परन्तु इस पर दिन-रात ध्यान करते रहना जिस से तू उसमें लिखी हुई बातों के अनुसार आचरण करने के लिए सावधान रह सके। तब तू अपने मार्ग को सफल बना सकेगा और सफलता प्राप्त करेगा (यहोशू 1: 8)। यीशु ने मरियम की सराहना की, जो प्रभु के पावों के समीप बैठ कर उसके वचन सुन रही थी, यीशु ने कहा “वास्तव में एक ही बात आवश्यक है, और मरियम ने उस उत्तम भाग को चुन लिया है जो उस से छीना न जाएगा” (लूका 10:42)। वास्तव में आज हमारे लिए एक बात आवश्यक है जिसे हमें प्राथमिकता देना चाहिए वह है बाइबल। हमें इस पुस्तक से प्रेम करना है। यह हमारे लिए बहुत ही आवश्यक है। 

यदि आज आप एक ख्रीष्टीय हैं, तो मसीह के वचन को अपने हृदयों में बहुतायत से बसने दें (कुलुस्सियों 3:16)। याद रखें, हम बिना बाइबल के ख्रीष्टीय जीवन में आगे बढ़ नहीं सकते हैं। किसी ने सही कहा है, “दो अच्छी आँखें होने का सबसे बड़ा विशेषाधिकार यह है कि हम परमेश्वर के वचन को पढ़ सकते हैं।” यदि आज आप एक ख्रीष्टीय नहीं है, तो मेरा आप से निवेदन है कि आप इन सत्यों पर विचार करें और बाइबल को अवश्य पढ़े। क्या आप सत्य को जानना चाहते हैं? बाइबल के पास आइए, क्योंकि बाइबल सत्य बताती है। यीशु ने कहा, तुम सत्य को जानोगे और सत्य तुम को स्वतंत्र करेगा (यूहन्ना 8: 32)। 

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