कलवरी मृत्यु के भय पर विजय प्राप्त करती है

शुभ शुक्रवार

मार्टिन लूथर ने कहा कि, पापी लोग खुली क़ब्र की ओर उलटे पैर दौड़ते हैं, वे मृत्यु का सामना करने में असमर्थ हैं परन्तु सीधा उसी की ओर स्वतः चले जा रहे हैं, वे इस विषय से अपनी दृष्टि और विचारों को भटकाने तथा पीछे हटने का भी अथक प्रयास करते हैं जब तक मृत्यु से होने वाली उनकी निश्चित भेंट नहीं हो जाती। इसके पश्चात् आकस्मात् ही सब धराशायी हो जाता है। 

और फिर भी अब, हम शुभ शुक्रवार के दिन के उत्सव को मना रहे हैं, ख्रीष्टीय होने के कारण हम वैसे भी विचित्र हैं, क्योंकि हम सांस्कृतिक रूप से अटपटी प्रथा का पालन करते हैं जहाँ न केवल हम मृत्यु को आमने-सामने देखते हैं वरन एक यातनापूर्ण घृणित मृत्यु का उत्सव भी मनाते हैं। 

यह बात यहाँ मृत्यु में दिखती है, जिसमें हम न केवल ख्रीष्ट के बलिदान को देखते हैं, परन्तु यहाँ हम संसार पर शैतान की शक्ति के अधिकार की सच्चाई को भी खोलकर रख देते हैं। 

अतः जिस प्रकार बच्चे माँस और लहू में सहभागी हैं, तो वह आप भी उसी प्रकार उनमें सहभागी हो गया, कि मृत्यु के द्वारा उसको जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली है, अर्थात् शैतान को, शक्तिहीन कर दे,” और उन्हें छुड़ा ले जो मृत्यु के भय से जीवन भर दासत्व में पड़े थे। (इब्रानियों 2:14-15)। 

शैतान अपनी इच्छानुसार मृत्यु की तलवार का प्रयोग नहीं कर सकता है। उसके हाथों के द्वारा जो हानि होती है वह सदैव परमेश्वर द्वारा सीमित रहती है ( अय्यूब 1:12 देखें)। इस कारण, शैतान जिस शक्ति का सबसे अधिक स्वतंत्रतापूर्वक उपयोग करता है वह है मृत्यु का भय । शैतान दासों का एक ऐसा स्वामी है जो शब्दों और झूठ का मायाजाल बुनता है तथा मृत्यु के भय का उपयोग करता है जिससे कि अपने दासों पर अत्याचार कर सके और उन्हें भ्रमित कर सके। उसकी शक्ति तलवार में नहीं, परन्तु उन भ्रमित करने वाले शब्दों में सबसे अधिक स्वतंत्र रूप से दिखती है जो वह हमारे कानों में फुसफुसाता है। 

शैतान ऐसे झूठी बातें हमारे कानों में फुसफुसाता है जो भजन 23 के ठीक विपरीत हैं: “जब तुम मृत्यु के घोर अन्धकार की तराई में होकर चलोगे, तो तुम बुराई के भय में रहोगे, क्योंकि तुम अकेले हो, तुम्हारा कोई मार्गदर्शक नहीं है और न ही कोई जी में जी लाने वाला है।”

परन्तु क्या यह सत्य है?

क्या यह शुक्रवार शुभ है?
हम में से कितने लोग हैं जो किसी भी दिन मृत्यु के विषय में विचार करते हैं?  

सत्य तो यह है कि हम मृत्यु के विषय में बहुत ही कम विचार करते हैं। यहाँ तक कि हम इस विषय से बचने के लिए टाल-मटोल करते हुए पीछे हटते हैं।

फिर भी, मृत्यु का भय हमारे दासत्व से कम नहीं है—आजीवन दासत्व, एक ऐसा दासत्व जो हमारे जीवन की प्रत्येक बातों को संचालित करता है, जिसमें हमारे व्यसन भी सम्मिलित हैं। 

हमारी अनेकों ऐसी इच्छाएँ हैं जो मृत्यु के भय को दबाने का प्रयत्न करती हैं? जॉन पाइपर कहते हैं, “बात यह नहीं है कि लोग मृत्यु के नियमित और सचेत भय के दास हैं,” “किन्तु वे इस भय को अनदेखा करने वाली हज़ारों विधियों के दास हैं। वे ‘मृत्यु की वास्तविकता का अस्वीकार करने’ के दास हैं। ‘तो आओ, खाएं और पिएं, क्योंकि कल तो मरना ही है’ (1 कुरिन्थियों 15:32) यह सच्ची स्वतंत्रता का विजयोल्लास नहीं है, परन्तु इस अस्वीकृति का ही दूसरा रूप है। मृत्यु एक विशाल शत्रु के रूप में धुंधली सी दिखाई पड़ती है। और हम अस्वीकृति के मायाजाल में इसके दास बनते जाते हैं” (Future Grace फ्युचर ग्रेस, 354)। 

जब हम मृत्यु की वास्तविकता को नकारते हैं, तो शैतान हमारी नश्वरता को अनदेखा करने के लिए हमारे जीवनों को व्यर्थ व्याकुलताओं तथा आनन्दमय जीवन का उपभोग करने के लिए बहकाता है। यह बातों को सुलझाता नहीं है; यह भविष्य के विषय में व्याकुल करने वाली हमारी चिन्ताओं और व्यग्रताओं को बढ़ाता है, और यह हमारी गहन असुरक्षाओं को कम किए बिना छोड़ देता है। 

दूसरे शब्दों में, इन सब बातों की जड़ में मृत्यु का भय हमारे नेटफिलिक्स मनोरंजन को संचालित करती है। 

यह हमारे प्रेम का गला घोट देता है। जॉन पाइपर लिखते हैं, मृत्यु का भय हमारे जीवन को दास बनाता है, और यह हमें डरपोक और आलसी—उबाऊ और घमण्डी बनाता है तथा  आत्म-संंरक्षण में उनका विनाश कर देता है। जैसे-जैसे मृत्यु के भय को हमारे कानों में फुसफुसाया जाता है, हम अपना ध्यान भटकाने वाली बातों हेतु अपना स्वर और ऊँचा कर देते हैं, और जैसे ही हम ऐसा करते हैं, तो हम अपने जीवन को देने में असमर्थ पाते हैं (Fifty Reasons फिफ्टी रीज़न, 97)।

ये दो विधियाँ हैं जब मृत्यु का भय शैतान का सबसे बड़ा शस्त्र, उसकी सबसे बड़ी शक्ति, हमारे निर्णयों को नियन्त्रण करने वाली उसकी सबसे बड़ी मन की चाल बन जाती है। हमारे जीवन का कोई भी भाग मृत्यु के भय से मुक्त नहीं है।

जहाँ तक सम्भव है इस विचार को साहसपूर्वक कहने के लिए, एक नीतिशात्री का  दृढ़कथन यह है कि “अन्य सभी शक्तियों को अधिक समय तक रखने और अधिकार में करने के लिए, चाहे वे थोड़े समय के लिए कितनी ही अद्भुत क्यों न हों, परमेश्वर से पृथक — मृत्यु — इस संसार में सबसे बड़ी नैतिक शक्ति है।” “ईश्वरविज्ञानीय रीति से कहें तो, इसका अर्थ यह है कि निष्ठा और दासत्व का उद्देश्य, वह सच्ची मूर्ति है जो सभी मूर्ति-पूजकों के अन्दर छिपाई गयी है, सभी प्रधानताओं और शक्तियों के ऊपर सामर्थ्य है — सभी मूर्तियों की मूर्ति है — उसे मृत्यु कहते हैं” (Ethics For Christians इथिक्स फॉर क्रिश्चयन्स, 81)। 

हम इसे इब्रानियों 2:14-18 के प्रवाह में देखते हैं —  शैतान, पाप, और मृत्यु सभी एक साथ हमारी तीन गुना दासता के लिए कार्य कर रहे हैं, परन्तु मृत्यु इन सभी के पीछे नष्ट करने वाली सामर्थ्य है, एक भय जो शैतान के द्वारा प्रयोग किया जाता है, जो हमें चला रहा है और पापपूर्ण सुख के हमारे लक्ष्यों को जीवित रखता है जैसे कि हम अनेकों भटकावों के साथ विपरीत दिशा में अपने अपराजेय शत्रु, मृत्यु को खींचते हुए उलटे पैर क़ब्र ही ओर जा रहे हैं। 

अब तक। 

एक अच्छा व्यक्ति 
आज हम रूकते हैं और उस एक व्यक्ति का उत्सव मनाते हैं जो हमारी देह और लहू में सहभागी हुआ, परन्तु मृत्यु के अधीन हमारे अत्याचार में सहभागी नहीं हुआ। और क्योंकि उसे मृत्यु का कोई भय नहीं था, इसलिए वह व्यर्थ सुख विलास द्वारा विचलित नहीं हुआ, और वह आत्म-रक्षा के द्वारा प्रेरित नहीं हुआ। मृत्यु उसकी कट्टर शत्रु थी, न कि निश्चित रूप से उसकी मृत्यु होना ही है।

यह तनावपूर्ण था, निश्चित रूप से — उसके कार्य के भार के कारण उसके आँसू बहे — परन्तु मृत्यु उसको रोक न सकी। मृत्यु उसको भ्रमित नहीं कर सकी। वह पैर घसीटते हुए पीछे की ओर वापस नहीं गया, उसने हमारे लिए मृत्यु का डटकर सामना किया। 

शुभ शुक्रवार उत्सव मनाने के लिए एक विचित्र और अद्भुत दिन है जिसे हमारी संस्कृति अत्यावश्यक पूर्वक छिपाने का प्रयास करती है। और फिर भी यह हमारे लिए क्रूस के घोर व्यथा में उसके प्रेम को देखने का श्रेष्ठ अवसर है, और इसके द्वारा यह देखना कि शैतान का अधिकार जो मनुष्य के ऊपर था वह तोड़ दिया गया है। 

आज हम मृत्यु का उत्सव मनाते हैं, एक रोग ग्रस्त ध्यानमग्नता के समान नहीं, किन्तु इस बात के प्रमाण के रूप मनाते हैं कि  हम मृत्यु के भय से स्वतंत्र कर दिए गए हैं, संसार के आजीवन  दासत्व से स्वतंत्र कर दिए गए हैं।

टोनी रेंकी desiringgod.org के वरिष्ठ शिक्षक हैं, वह Ask Pastor John पॉडकास्ट के आयोजनकर्ता तथा परमेश्वर, तकनीकि और ख्रीष्टीय जीवन (2022) के लेखक हैं। वह अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ फीनिक्स क्षेत्र में रहते हैं।

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