अनन्त जीवित आशा और उसके परिणाम!

“हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की स्तुति हो, जिसने यीशु मसीह को मृतकों में जिला उठाने के द्वारा, अपनी अपार दया के अनुसार, एक जीवित आशा के लिए हमें नया जन्म दिया..।” (1 पतरस 1:3)

आशा क्या है? आशा में हम भविष्य में उत्तम वस्तु को पाने की आस लगाए रहते हैं। यह अभी हमारे पास नहीं है, परन्तु हम अपेक्षा करते  हैं कि एक दिन भविष्य में  वह हमें प्राप्त होगी। यदि कोई अपनी आशा खो दे तो यह उस व्यक्ति के लिए सबसे अधिक अनिश्चितता, अस्थिरता और निराशा होगी। संसार में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी आशा को लेकर चलता है जो उसको इस जीवन में बढ़ने हेतु  सहायता करती  है। परन्तु यह सम्भव नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति जो आशा रखे हुए है वह सच्ची आशा हो। संसार में लोग उन वस्तुओं पर आशा रखे हुए हैं जो शीघ्र ही समाप्त हो जाती है। अतः उनके पास आशा नहीं बचती है, परन्तु वे वास्तविकता में आशाहीन हैं।

मसीहियों की आशा संसार के द्वारा प्राप्त आशा से कहीं अधिक उत्तम और स्थाई है क्योंकि वह अविनाशी, निष्कलंक और अमिट है। यह मृतक आशा नहीं है। हम इस आशा को कमा नहीं सकते हैं, यह भौतिक नहीं है और यह अस्थाई नहीं है। मसीह का हमारे लिए सिद्ध जीवन, क्रूस पर उसकी हमारे लिए मृत्यु और फिर उसका पुनरुत्थान हमारे लिए उद्धार की निश्चयता को लाता है। यह उद्धार केवल इस जीवन तक सीमित नहीं है, परन्तु यह अनन्तकाल का उद्धार है जो कभी समाप्त नहीं होगा। मसीही का पुनरुत्थान इस बात की निश्चयता है कि हम भी जो मसीह में हैं जिलाए जाएंगे। मसीह का पुनरुत्थान हम विश्वासियों को जीवित आशा देता है जो हमें निम्न बातें करने में सहायता करेंगी :   

मसीहियों की आशा संसार के द्वारा प्राप्त आशा से कहीं अधिक उत्तम और स्थाई है क्योंकि वह अविनाशी, निष्कलंक और अमिट है। यह मृतक आशा नहीं है।

हम धन्यवाद और आनन्द के साथ जीएंगे
हमारी जीवित आशा का आधार ही मसीह यीशु का पुनरुत्थान है। हमारे लिए यह बात इस जीवन को जीने के लिए एक महत्वपूर्ण सत्य है और यह सत्य हमें परमेश्वर को धन्यवाद देने में सहायता करता है। 1 पतरस 1:3 में, पतरस जीवित आशा की बात को परमेश्वर की स्तुति से आरम्भ करता है। वह कहता है, “हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की स्तुति हो।” पतरस अपने पाठकों को बताना चाह रहा है कि मसीह के मृतकों में जी उठने के द्वारा  परमेश्वर ने हमें भी एक जीवित आशा के लिए नया जन्म दिया है। यह परमेश्वर का एक उपहार है/ दान है। परमेश्वर का हमें नया जन्म देने का एक यह उद्देश्य है कि हमें जीवित आशा भी मिले। यह आशा जिसकी पतरस यहाँ बात कर रहा है – वह क्षणिक और अनिश्चित नहीं है। परन्तु यह आशा एक निश्चित आशा है, क्योंकि यह परमेश्वर का कार्य है। इसलिए जैसे पतरस परमेश्वर की स्तुति कर रहा है, धन्यवाद दे रहा है। वैसे ही हमें भी इस जीवित आशा के लिए धन्यवाद देना चाहिए। ऐसा हो ही नहीं सकता  कि परमेश्वर ने जो कार्य किया है हम उसके प्रति उसको धन्यवाद न दें। यह आनन्द किसी भी बाहरी वस्तु के कारण नहीं है परन्तु यह उस निश्चियता के कारण है जो हमारे हृदय में है। तो हमारे इस जीवन में समस्याएं, बीमारी, गरीबी, अकेलापन और दुख आदि तो आएंगे परन्तु वह हमारे सच्चे आनन्द को नहीं छीनने पाएंगे जो जीवित आशा के कारण है। पतरस स्वयं अपने पाठकों को स्तुति करने के लिए कह रहा है जबकि वे लोग दुखों का सामना कर रहे हैं। हम तो और अधिक धन्यवाद और आनन्द के साथ जी सकते हैं। रोमियों 12:12 में पौलुस कहता है कि, “आशा में आनन्दित रहो…।”

हम यहाँ पर आगे की ओर देखेंगे  
जीवित आशा हमारी सहायता करेगी कि हम इस संसार में रहते हुए भविष्य की ओर देखें। जीवित आशा हमारी दृष्टि संसार और संसार की वस्तुओं से हटा कर उन बातों की ओर लगने में सहायता करती है जो अटल हैं, जो सत्य हैं और जो आत्मिक हैं। विश्वासी लोग जीवित आशा को और साथ में संसार की आशा दोनों को एक साथ लेकर नहीं चलते हैं। जीवित आशा हमारी सहायता करती है कि हम उन बातों की खोज में रहें जो आत्मिक हैं। यद्यपि इस संसार में रहते हुए हमें यहाँ की वस्तुओं की आवश्यकता पड़ती है, परन्तु हम उन वस्तुओं में न तो अपना मन लगाएंगे और न ही उनमें अपनी आशा को रखेंगे। एक विश्वासी याद रखेगा कि वह इस जग में यात्री के समान हैं। हम यात्रा कर रहे हैं उस देश में जाने के लिए जो परमेश्वर ने हमारे लिए रखा है। और इस यात्रा में, हमें मसीह में प्राप्त जीवित आशा ही है जो अग्रसर होने  में सहायता करती है। इफिसियों 2:12 में लिखा है कि एक समय था कि हम आशाहीन थे परन्तु अब हमारे पास मसीह के पुनरुत्थान के कारण दृढ़ आशा है। हमारी जीवित आशा हमारे विचारों, शब्दों और कार्यों पर प्रभाव डालती है। साथ ही हम इस आशा को परमेश्वर के वचन में पाते हैं तो हम और भी अधिक उसके वचन में समय व्यतीत करने के लिए प्रेरित होते हैं।।

मसीही का पुनरुत्थान इस बात की निश्चयता है कि हम भी जो मसीह में हैं जिलाए जाएंगे। मसीह का पुनरुत्थान हम विश्वासियों को जीवित आशा देता है।

हम एक दिन मसीह के साथ होंगे
हमारी आशा मृतक नहीं है, क्योंकि हमारी आशा का आधार स्वयं मसीह का पुनरुत्थान है। 1 कुरिन्थियों 15:17 में लिखा है कि, “यदि मसीह जिलाया नहीं गया तो हमारा विश्वास करना व्यर्थ है।” इसलिए क्योंकि मसीह जीवित है हमारे पास जीवित आशा है। साथ ही साथ हमारी आशा उत्तराधिकार को प्राप्त करना है (1 पतरस 1:4)। और यह उत्तराधिकार अविनाशी है। हमारे पास जो आशा है कि हम एक दिन मसीह के साथ होंगे वह मसीह के पुनरुत्थान के कारण पूरी होगी जो कि और भी अधिक महिमानवित होगी। जब हम स्वर्ग में मसीह के साथ होंगे। परमेश्वर ने मसीह में हमें न केवल उद्धार दिया है, जीवित आशा दी है, परन्तु उसने प्रतिज्ञा की है कि वह अन्तकाल तक हमें बनाए रखेगा कि हम उस जीवित आशा में प्रवेश करें (1 पतरस 1:5; फिलिप्पियों 1:6)। जीवित आशा भूतकाल में हमारे प्रभु यीशु मसीह की मृत्यु व पुनरुत्थान में स्थाई रूप से स्थापित की गई है, और वर्तमान में मसीह के पुनरुत्थान में बनी हुई है और यह हमें भविष्य की ओर ले जाती है, जिसमें हमारा भी पुनरुत्थान होगा और हम उसके राज्य में प्रवेश करेंगे। यह केवल मसीह के पुनरुत्थान के कारण ही हो होगा।

मसीहियों की जीवित आशा अटल है, क्योंकि वह मसीह में हैं, “यह आशा मानो हमारे प्राण के लिए लंगर है – ऐसी आशा जो निश्चित और दृढ़ है, और परदे के भीतर तक पहुँचती है, जहाँ यीशु ने हमारे लिए अग्रदूत बनकर और मलिकिसिदक की रीति पर सदा के लिए महायाजक होकर प्रवेश किया है” (इब्रानियों 6:19-20)। यीशु मसीह ही हमारा उद्धार और जीवित आशा है। इसलिए प्रिय भाई-बहनो, मसीह में अपनी जीवित आशा को थामे रहिए।