परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया

बाइबल में कुछ ही पद यीशु के जन्म के महत्व को स्पष्ट रूप से समझाते हैं जैसा कि यूहन्ना 3:16 करता है। यह पद प्रायः मसीही बुकमार्क और कैलेंडर पर दिखाई देता है, और अधिकांश मसीही अगले वाक्य को नहीं पढ़ेंगे क्योंकि उन्होंने इस पद को मुखाग्र किया है:“क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया, कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, कि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए” (यूहन्ना 3:16)। इस सुपरिचित पद में, यहूदी शिक्षक नीकुदेमुस के साथ यीशु की बातचीत का अभिलेख करने के बाद, यूहन्ना संक्षेप में यीशु के देहधारण का उद्देश्य बताता है। यह वाक्य सुसमाचार की सत्योंं से भरा है, और यह हमें आनन्दित होने के बहुत कारण देता है। जब हम देहधारण को याद करते हैं, तो आइए हम इन सत्यों में आनन्दित हों।

आइए हम इस सत्य से आनन्दित हों कि परमेश्वर एक प्रेम करने वाला  परमेश्वर है। परमेश्वर त्रिएकता में भी प्रेम में है—अर्थात् परमेश्वर को सृष्टि में किसी और वस्तु या प्राणी की आवश्यकता नहीं है जो उससे प्रेम व्यक्त करे(1 यूहन्ना 4:8)। परन्तु वह एक अवैयक्तिक दूर रहने वाला ईश्वर नहीं हैं जिसके लिए लोग केवल रसायन और कोशिकाएं हैं। इसके विपरीत, बाइबल में, परमेश्वर स्वयं को मनुष्यों के प्रति चिन्ता करने वाले के रूप में प्रकट करता है (भजन संहिता 8:4) जो “करुणा से भरपूर”  है (निर्गमन 34:6)। मानव इतिहास में अपने लोगों के साथ परमेश्वर का व्यवहार, विशेष रूप से देहधारण, उसके प्रेम से बाहर निकला है। जब हम मसीह पर ध्यान देते है कि उसने मानव देह को लिया, तो हमें आनन्दित होना चाहिए कि परमेश्वर प्रेम करने वाला परमेश्वर है।

परमेश्वर के प्रेम की एक बहुत अद्भुत बात यह है कि परमेश्वर ने पापी मानव जाति को प्रेम दिखाने का चुनाव किया है।

आइए हम इस सच्चाई में आनन्दित हों कि परमेश्वर का प्रेम एक देने वाला  प्रेम है। परमेश्वर के प्रेम की एक बहुत अद्भुत बात यह है कि परमेश्वर ने पापी मानव जाति को प्रेम दिखाने का चुनाव किया है। जब यूहन्ना लिखता है, “परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपने एकलौता पुत्र दे दिया,” तो “ऐसा” शब्द परमेश्वर के प्रेम को प्रदर्शित करने के तरीके को दिखाता है। “परमेश्वर ने जगत को इस तरह से प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया।” परमेश्वर को अपने प्रेम को उस संसार के सामने प्रदर्शित करने की आवश्यकता नहीं है जिसने अपने सृजनहार के विरुद्ध  विद्रोह किया था, लेकिन उसने ऐसा किया। और उसने उससे बढ़कर किया—उसने देने के द्वारा  अपने प्रेम को प्रत्यक्ष रूप में प्रदर्शित किया। उसने अपना पुत्र दे दिया — उसका एकलौता पुत्र। क्या परमेश्वर हमसे प्रेम करता है या नहीं, इस के बारे में कभी कोई संदेह हो सकता है? हमें कैसे पता कि वह हमसे प्रेम करता है? उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया

अन्त में, आइए हम इस सत्य से आनन्दित हों कि परमेश्वर का प्रेम एक क्षमा करने वाला  प्रेम है। यीशु में, परमेश्वर ने न केवल जगत को एक अमूल्य उपहार दिया, परन्तु उसने मानव उद्धार के लिए एकमात्र आशा भी दी। जब से आदम और हव्वा ने अदन की वाटिका में परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता की, तब से हर मनुष्य पाप के दोष और पापी स्वभाव के साथ जन्म लेता है। हो सकता है हम उतने बुरे नहीं हैं जितना हम सम्भवतः हो सकते हैं और हम उन लोगों के जैसे बुरे नहीं हो जिनके बारे में  हम समाचारों में पढ़ते हैं, लेकिन हमारे जीवन के एक सही अवलोकन से पता चलता है कि हमारा पूरा अस्तित्व पाप से कलंकित है। हम जितना भी प्रयास कर लें, परन्तु स्वयं को शाश्वत दण्ड की सम्भावना से बचा नहीं सकते हैं। इस गम्भीर वास्तविकता को समझना, यीशु के देहधारण को लुभावना बना देता है।

यीशु में, परमेश्वर ने न केवल जगत को एक अमूल्य उपहार दिया, परन्तु उसने मानव उद्धार के लिए एकमात्र आशा भी दी।

देहधारण में, परमेश्वर का अनन्त पुत्र, मानव देह में पृथ्वी पर आया। पैदा होने के बाद, उसने पाप रहित जीवन जिया और फिर पापियों के स्थान पर क्रूस पर मरने के द्वारा पाप के दण्ड को लिया। यूहन्ना 3:16 में, यीशु के जीवन, मृत्यु और पुनरुत्थान के प्रत्यक्षदर्शी होने के बाद, प्रेरित यूहन्ना बताता है कि परमेश्वर ने यीशु को इसलिए दिया कि “… जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो परन्तु अनन्त जीवन पाए।” हम इसलिए आनन्दित हो सकते हैं कि परमेश्वर प्रेमी  है और उसका प्रेम देता  है क्योंकि परमेश्वर के देने वाले प्रेम का अर्थ है कि हमें क्षमा प्राप्त हो सकती है। नाश होने के बजाय, हम यीशु के जीवन, मृत्यु और पुनरुत्थान के कारण अनन्त जीवन प्राप्त कर सकते हैं।

यह पवित्रशास्त्र में लिखित और कलीसिया के द्वारा घोषित किया गया सुसमाचार है —कि परमेश्वर के प्रेमपूर्ण उपहार पर विश्वास करना पापी लोगों को क्षमा करने और पवित्र परमेश्वर के साथ संगति में वापस आने का एकमात्र तरीका है। यह क्रिसमस का संदेश है। यह ईस्टर का संदेश है। यह वर्ष के हर एक  दिन के लिए बाइबल का संदेश है।

क्या आप इस अद्भुत सुसमाचार को मानते हैं? क्या आप मानते हैं कि आप एक पापी हैं जो अपने आप को नाश होने की निश्चित सम्भावना से बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकते हैं? क्या आपने अपने एकलौते पुत्र को देने  में परमेश्वर के अद्भुत प्रेम की गहराई पर मनन किया है? क्या आपने उन दावों की जांच की है जो बाइबल यीशु के बारे में करती है? क्या आप समझते हैं कि परमेश्वर के साथ अनन्तकाल बिताने के लिए यीशु पर विश्वास करना आपकी एकमात्र आशा है? यदि आप परमेश्वर के प्रेम के इस सुसमाचार को जानना और समझना चाहते हैं, तो कृपया अपने शहर के एक चर्च/ कलीसिया से संपर्क करें।

मसीही, क्या आप  इस सुसमाचार पर विश्वास करते हैं? क्या आप इस बात में आनन्दित होते हैं कि परमेश्वर ने अपने पुत्र को देने के द्वारा आपको क्या दिया है? क्या आप जीवन की सभी स्थितियों में सुसमाचार को थामे रहते हैं? क्या आप भूल जाते हैं कि आप यीशु के कारण मिली क्षमा के लायक नहीं हैं? क्या आपका जीवन प्रेम के द्वारा चिन्हित है? क्या परमेश्वर का प्रेम जिसे आपने अनुभव किया है, आपके आस-पास के लोगों के जीवन में डाला जा रहा है? क्या आपका क्रिसमस “उत्सव” अयोग्य पापियों के लिए परमेश्वर के प्रेम को प्रदर्शित करता है? क्या आप अपने मित्रों और परिवार से इतना प्रेम करते हैं कि उनको एकमात्र सुसमाचार बताएं जो उन्हें विनाश से अनन्त जीवन तक ले जा सके?

काश इस पद के सत्य हमारे मनों से कभी दूर न हो। और काश हम हमेशा आनन्द मनाएं क्योंकि “परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया, कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, कि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।” हाल्लेलूयाह!