उसने मुझसे प्रेम किया और स्वयं को मेरे लिए दे दिया

मैं चाहता हूँ कि विश्वासी ख्रीष्ट में परमेश्वर के द्वारा प्रेम किए जाने का जितना अधिक सम्भव हो उतना आनन्द लें। और मैं चाहता हूँ कि इस रीति से हम से प्रेम करने के लिए जितना अधिक सम्भव हो उतना परमेश्वर की बड़ाई हो। इसी कारण अपनी मृत्यु के द्वारा यीशु ने जो हमारे लिए पूरा किया वह मेरे लिए यह महत्व रखता है।

ख्रीष्ट की मृत्यु के विषय में सोचने की एक सामान्य रीति है जो उसके प्रेम के प्रति हमारे अनुभव को कम करता है। इसमें यह सोचना सम्मिलित है कि ख्रीष्ट की मृत्यु ने मेरे लिए  मानव जाति में किसी और की तुलना में अधिक प्रेम को व्यक्त नहीं किया है। यदि आप यीशु की मृत्यु में अपने लिए परमेश्वर के प्रेम के विषय में इस रीति से सोचते हैं, तो जितना महानता से परमेश्वर ने आपसे प्रेम किया है वास्तव में उतना प्रेम किये जाने का आनन्द आप नहीं ले पाएंगे।

परमेश्वर द्वारा विशेष रीति से प्रेम किए जाने का आभास
मुझे जिज्ञासा होती है यह जानने के लिए कि क्या आपने कभी इफिसियों 2:4-5 के कारण परमेश्वर के द्वारा विशेष रीति से प्रेम किये जाने का अनुभव किया है? “परमेश्वर ने जो दया का धनी, अपने उस महान प्रेम के कारण जिस से उसने हमसे प्रेम किया, जबकि हम अपने अपराधों के कारण मरे हुए थे उसने हमें ख्रीष्ट  के साथ जीवित किया।”

इफिसियों 2:4–5 में छह बातें सामने आती हैं।

  1. वह वाक्यांश महान प्रेम
    “अपने उस महान प्रेम  के कारण जिस से उसने हमसे प्रेम किया।” यह वाक्यांश नये नियम में केवल यहीं उपयोग किया गया है। इस वाक्यांश को अपने मन में बस जाने दीजिए। परमेश्वर एक “महान प्रेम” से अपने लोगों को प्रेम करता है। निश्चित रूप से पौलुस इसे लिखता है, ताकि हम बहुतायत से प्रेम किए जाने का आनन्द लें। 
  1. इस प्रेम की अनोखी महानता “हमें जिलाने हेतु” परमेश्वर को प्रेरित करती है। 
    “अपने उस महान प्रेम के कारण जिससे उसने हमसे प्रेम किया,. . . परमेश्वर ने हमें जीवित किया। ” उसका महान प्रेम हमारे जीवन का कारण  है। हमारे जीवन ने हमारे लिए उसके प्रेम की महानता को उत्पन्न नहीं किया है। यह तो इसके विपरीत है। उसके प्रेम की महानता ने हमें जीवित किया है।

3. इससे पहले कि उसने हमें जीवित किया, हम “मरे हुए” थे। 
“यद्यपि जब हम अपने अपराधों में मरे हुए थे, [परमेश्वर] ने हमें जीवित किया।” जीवित  मृतक जैसी भी कोई वस्तु होती है। यीशु ने कहा, “मुर्दों को अपने मुर्दे दफ़न करने दे” (लूका 9:60)। इससे पहले कि परमेश्वर ने हमें जीवित किया, हम जीवित  मृतक थे। 

“आपने कुछ भी नहीं किया परमेश्वर को प्रेरित करने के लिए कि वह आपको जीवित करे। मृतक होने का अर्थ यही है।”

हम श्वास ले सकते थे और सोच सकते थे और आभास कर सकते थे और इच्छा कर सकते थे। परन्तु हम आत्मिक रूप से मरे  हुए  थे। हम ख्रीष्ट की महिमा के प्रति अन्धे थे (2 कुरिन्थियों 4:3-4), हमारा हृदय उसकी व्यवस्था के प्रति कठोर था और हम उसके अधीन नहीं हो सकते थे (इफिसियों 4:18, रोमियों 8:7-8), और हम आत्मिक बातों को परखने में असमर्थ थे (1 कुरिन्थियों 2:14)। केवल परमेश्वर ही इस मृत्यवस्था पर विजय पा सकता था ताकि हम ख्रीष्ट की महिमा को देख सकें और विश्वास कर सकें (2 कुरिन्थियों 4:6)। यही तो उसने किया जब उसने “हमें जीवित किया” (इफिसियों 2:5)। 

4. परमेश्वर प्रत्येक को जीवित नहीं करता है। 
आपको विश्वास में लाने के लिए, जो आपके साथ हुआ, वह सभी के साथ नहीं हुआ है। और स्मरण रखें, आप जीवित किए जाने के योग्य नहीं हैं। आप मरे हुए थे। आप “अन्य लोगों के समान स्वभाव से ही क्रोध की [सन्तान] थे” (इफिसियों 2:3)। आपने कुछ भी नहीं किया परमेश्वर को प्रेरित करने के लिए कि वह आपको जीवित करे। मृतक होने का अर्थ यही है। 

5. इसलिए, परमेश्वर का आपके लिए महान प्रेम  वास्तव में आपके  लिए है, विशिष्ठ रीति से आपके लिए। 
यह हर किसी के लिए एक सामान्य प्रेम नहीं है। अन्यथा, हर कोई आत्मिक रूप से जीवित होता। उसने विशेष रूप से आपको  जीवित करने के लिए चुना। किसी अन्य की अपेक्षा आप इसके अधिक योग्य पात्र नहीं थे। किन्तु अगाध कारणों से, उसने विशेष रूप से आप पर अपना महान प्रेम स्थापित किया। 

6. उसने किसी के साथ अन्याय नहीं किया है। क्योंकि कोई भी उद्धार के योग्य नहीं है। 
कोई भी जीवित किए जाने के योग्य पात्र नहीं है। हम सभी ने पाप किया है और मृत्यु के योग्य हैं (रोमियों 3:23; 6:23)। वह हम सभी को हमारे विद्रोह की मृत्यु के वश में छोड़ सकता था, फिर भी वह अन्याय न होता। 

परन्तु यदि आपने उसके क्रूस के ज्ञान को देखा है, और उसकी प्रतिज्ञाओं पर भरोसा किया है, और उसकी महिमा को संजोया है, तो उसने आपको जीवित किया है। कई अन्य लोगों के विपरीत, जो आप ही के समान मृतक थे, आपसे अत्यधिक प्रेम किया गया  है। 

नई वाचा का विशेष प्रेम 
अब यहाँ पर ख्रीष्ट की मृत्यु के साथ संयोजन है। जब यीशु मरा, तो उसने हमारे लिए हमारी मृत्यवस्था को हटाया जाना सुनिश्चित किया, और हमारे लिए जीवन और विश्वास के उपहार को मोल लिया। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर का महान प्रेम हमें जीवित कर सका, क्योंकि ख्रीष्ट में उसी महान प्रेम ने हमारे सभी पापों का दण्ड और हमारे सभी धार्मिकता का प्रावधान किया। 

हम यह जानते हैं क्योंकि यीशु ने अन्तिम भोज में कहा था कि “यह प्याला जो तुम्हारे लिए उण्डेला गया है मेरे लहू में एक नई वाचा है (लूका 22:20)। यीशु का लहू वह मूल्य है जो परमेश्वर ने नई वाचा को स्थापित करने के लिए चुकाया था। और नई वाचा, के केन्द्र में, यीशु के लहू से, मृतक पापियों के लिए परमेश्वर मांस के हृदयों को सुनिश्चित कर रहा है।

“ख्रीष्ट ने आपके लिए आप के मृतकों में से जी उठने की सम्भावना को नहीं क्रय किया है। उसने आपके पुनरुत्थान को क्रय किया है।”

“मैं एक नई वाचा बाँधूँगा…..मैं उनके अधर्म को क्षमा करूँगा और उनके पापों को फिर स्मरण न करूँगा” (यिर्मयाह 31:31,34)। “मैं उनके शरीर में से पत्थर का हृदय निकालकर उन्हें मांस का हृदय दूंगा” (यहेजकेल 11:19)। “मैं अपना आत्मा तुम में डालूंगा और तुम्हें अपनी विधियों पर चलाउँगा” (यहेजकेल 36:27)। 

यीशु ने सक्रियण को क्रय किया है यह वह है जो यीशु ने हमारे लिए मोल लिया जब वह मरा। और यही परमेश्वर के महान प्रेम ने हमारे लिए किया जब उसने हमें ख्रीष्ट यीशु में जीवित किया। इसलिए, यीशु की मृत्यु में परमेश्वर का विशिष्ट उद्देश्य सभी के लिए एक समान नहीं था। परमेश्वर का महान प्रेम, जो यीशु की मृत्यु में आपके लिए दर्शाया गया था, वह आपके विश्वास को क्रय करने हेतु था जब आप मरे हुए थे। 

उसने केवल आपके जीवन की सम्भावना को ही मोल नहीं लिया जिसका कि आप तब सक्रियण करेंगे। मृतक लोगों का सक्रियण नहीं होता है। उसने जो मोल लिया है वह सक्रियण था। ख्रीष्ट ने आपके लिए आपको मृतकों में से जी उठाने की सम्भावना को ही मोल नहीं लिया है। उसने आपका पुनरुत्थान मोल लिया है। विशेष रूप से आपके लिए एक महान प्रेम के कारण। 

अपने लिए उसके प्रेम की महानता का अनुभव कीजिए
इसलिए जब इफिसियों 2:4-5 कहता है, “अपने उस महान प्रेम  के कारण जिस से उसने हमसे प्रेम किया,” और लूका 22:20 कहता है कि यीशु का लहू नई वाचा की स्थापना करता है, और यहेजकेल 11:19 कहता है नई वाचा में परमेश्वर मांस का हृदय देता है, हम जानते हैं कि यीशु के लहू का बहाया जाना महान प्रेम  की अभिव्यक्ति थी जिसने हमें जीवित किया। 

ख्रीष्ट की मृत्यु जो भी है या जो भी करती है, वह इससे कम नहीं है। और यही मैं चाहता हूँ कि प्रत्येक विश्वासी इसका आनन्द उठाए। आपके लिए परमेश्वर का महान प्रेम  वैसा नहीं है, जैसा कि सम्पूर्ण मानव जाति के लिए उसका प्रेम है। आपके प्रति परमेश्वर का जो प्रेम है उसने आपको जीवित करने के लिए परमेश्वर को तब प्रेरित किया जब आप स्वयं को जीवित करने के लिए कुछ भी नहीं कर सकते थे। और उसी प्रेम ने परमेश्वर को प्रेरित किया उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा आपके जीवन को मोल लेने के लिए। 

इसलिए, जब हम प्रेरित पौलुस के साथ कहते हैं कि, “उसने मुझसे प्रेम किया और मेरे लिए अपने आप को दे दिया” (गलातियों 2:20), तो आप इन शब्दों की महानता का आभास कीजिए, क्योंकि “उसने मुझसे प्रेम किया।” उसने मुझसे प्रेम किया। 

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।
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