आने वाले प्रकोप से स्वर्ग का विश्राम

परमेश्वर के लिए यह न्यायसंगत है कि जो तुम्हें क्लेश देते हैं, उन्हें बदले में क्लेश दे, और तुम क्लेश पाने वालों को . . . उस समय विश्राम दे जब प्रभु यीशु अपने सामर्थी दूतों के साथ, स्वर्ग से धधकती आग में प्रकट होगा, और जो परमेश्वर को नहीं जानते तथा जो हमारे प्रभु यीशु के सुसमाचार को नहीं मानते, उन्हें वह दण्ड दे। (2 थिस्सलुनीकियों 1:6-8)

एक ऐसा समय आएगा जब परमेश्वर का धैर्य समाप्त हो जाएगा। जब परमेश्वर अपने लोगों को नियुक्त समय तक दुःख उठाते हुए देख चुका होगा, और वध किए जाने वाले लोगों की गिनती पूरी हो जाएगी (प्रकाशितवाक्य 6:11), तब स्वर्ग से एक धर्मी और पवित्र प्रतिशोध आएगा।

ध्यान दें कि उसके लोगों को क्लेश देने वालों पर परमेश्वर के प्रतिशोध को हम “विश्राम” के रूप में अनुभव करेंगे। “परमेश्वर के लिए यह न्यायसंगत है कि जो तुम्हें क्लेश देते हैं, उन्हें बदले में क्लेश दे, और तुम क्लेश पाने वालों को उस समय विश्राम दो।” दूसरे शब्दों में, हमें “क्लेश देने वालों” का न्याय हमारे प्रति अनुग्रह का एक रूप है।

सम्भवतः अनुग्रह के रूप में न्याय का सबसे उत्कृष्ट चित्र प्रकाशितवाक्य 18 में बाबुल के विनाश का चित्र है। उसके विनाश पर स्वर्ग से एक उच्च वाणी पुकारती है, “हे स्वर्ग और हे पवित्र लोगो, प्रेरितो और नबियो, उस पर आनन्द करो, क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे पक्ष में और उसके विरोध में निर्णय दिया है!” (प्रकाशितवाक्य 18:20)। फिर एक बड़े जनसमूह को यह कहते हुए सुना गया, “हल्लिलूयाह! उद्धार, महिमा और सामर्थ्य हमारे परमेश्वर ही के हैं, क्योंकि उसके निर्णय सच्चे और धर्ममय हैं, क्योंकि उसने उस बड़ी वेश्या को जो अपने व्यभिचार से संसार को भ्रष्ट करती है, न्याय किया है और अपने दासों के लहू का बदला उस से ले लिया है” (प्रकाशितवाक्य 19:1-2)।

जब परमेश्वर का धीरज अन्ततः समाप्त होगा, और इस युग का अन्त होगा, और परमेश्वर के शत्रुओं पर न्याय आएगा, तब पवित्र लोग परमेश्वर के न्याय को अनुचित नहीं समझेंगे।

इसका अर्थ यह है कि अपश्चात्तापी लोगों का अन्तिम विनाश परमेश्वर के लोगों द्वारा दुःख के रूप में अनुभव नहीं किया जाएगा।

अन्य लोगों की पश्चात्ताप नहीं करने की इच्छा पवित्र लोगों के स्नेहों को बन्धक नहीं बना पाएगी। नरक के लिए यह असम्भव है कि वह स्वर्ग को दुःखी कर पाए। परमेश्वर के न्याय को स्वीकृति प्राप्त होगी, और पवित्र लोग एक महान् अनुग्रह के रूप में सत्य के प्रमाणित होने का अनुभव करेंगे।

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जॉन पाइपर
जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।

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