मैं आत्मा से कैसे भर सकता हूं?

मैं आत्मा से कैसे भर सकता हूं?

पूर्व काल में जो कुछ लिखा गया था वह हमारी ही शिक्षा के लिए लिखा गया था जिस से धैर्य एवं पवित्रशास्त्र के प्रोत्साहन द्वारा हम आशा रखें (रोमियों 15:4)।

हम पवित्र आत्मा से कैसे भर सकते हैं? हम अपनी कलीसिया पर और स्वयं पर पवित्र आत्मा के उण्डेले जाने का अनुभव कैसे कर सकते हैं जो हमें अपराजेय आनन्द से भर देता है और हमें स्वतंत्र करता है, और हमें सशक्त बनाता है, हमारे निकट लोगों से वास्तविक रीति से प्रेम करने के लिए ताकि वे मसीह के लिए जीते जाएं? 

उत्तर: परमेश्वर की अतुल्य, आशा प्रदान करने वाली प्रतिज्ञाओं पर रात दिन मनन करें। जैसा कि रोमियों 15:4 हमें दिखाता है, कि कैसे पौलुस ने अपने हृदय को आशा, आनन्द और प्रेम से परिपूर्ण रखा। “पूर्वकाल में जो कुछ लिखा गया था वह हमारी ही शिक्षा के लिए लिखा गया था जिस से धैर्य एवं पवित्रशास्त्र के प्रोत्साहन द्वारा हम आशा रखें।”

आशा की पूर्ण निश्चयता परमेश्वर के वचन की प्रतिज्ञाओं पर मनन करने से आती है। और यह नौ पदों के पश्चात आने वाले उस वाक्य का खण्डन नहीं करती है जो कहता है कि पवित्र आत्मा हमें आशा देता है (रोमियों 15:13)। ऐसा इसलिए है क्योंकि पवित्र आत्मा पवित्रशास्त्र का ईश्वरीय लेखक है। उसका वचन उसके कार्य का साधन है। यह विरोधाभास नहीं है कि वह हमें अपने स्वयं के वचन की प्रतिज्ञा से भरने के द्वारा आशा से भरता है। 

आशा कोई अस्पष्ट भावना नहीं है जो एकाएक उत्पन्न होती है, पेट की पीड़ा की नाई। आशा यह आत्मविश्वास है कि आत्मा के वचन के द्वारा जो अद्भुत भविष्य की प्रतिज्ञा हमसे की गयी है वह वास्तव में सच होने जा रही है। इसलिए आत्मा से भरे जाने के लिए उसके वचन से भरा जाना आवश्यक है। आत्मा के सामर्थ्य को प्राप्त करने का एकमात्र साधन है उसके वचन की प्रतिज्ञाओं पर विश्वास करना। 

क्योंकि यह वचन की प्रतिज्ञा है जो हमें आशा से भर देती है, और आशा हमें आनन्द से भर देती है, और आनन्द अपने पड़ोसी से प्रेम करने की सामर्थ्य और स्वतंत्रता में उमड़ पड़ता है। और यह आत्मा की परिपूर्णता है।

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