पास्टर जॉन से पूछें
 अपने जीवन को व्यर्थ न गँवाने हेतु तीन चरण 
<a href="" >जॉन पाइपर के साथ साक्षात्कार</a>

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

श्रुति लेख (Audio Transcript)

हम में से प्रत्येक जन चाहता है कि उसका जीवन अर्थपूर्ण हो।  हम सब के लिए यह सोचना महत्वपूर्ण है कि हम अपने जीवन को व्यर्थ में कैसे न गँवाएँ? इस विषय में बात करते हुए पास्टर जॉन तीन चरण देते हैं।

यहोवा का सहारा लें

नीतिवचन 3:5-6, “तू सम्पूर्ण हृदय से यहोवा पर भरोसा रखना, और अपनी समझ का सहारा न लेना। उसी को स्मरण करके अपने सब कार्य करना, तब वह तेरे लिए सीधा मार्ग निकालेगा।”

परमेश्वर नहीं चाहता है कि हम — मार्ग से हटकर अनाज्ञाकारिता में या व्यर्थ जीवन में या ऐसी किसी भी बात में भटक जाएँ जो परमेश्वर का अपमान करे।

मेरी माँ इस पद को सम्भवतः सबसे अधिक तब उद्धरित करती थीं जब वह मुझे मेरे महाविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई के समय पत्रों को भेजती थीं। कभी-कभी तो वह बिना लिखे ही नीतिवचन 3:5-6 को सम्मिलित कर लेती थीं। और मैं सोचता हूँ वह इसलिए ऐसा करती थीं क्योंकि इस पद का मुख्य लक्ष्य है हमें सीधे मार्ग पर चलने हेतु प्रेरित करना।

अर्थात्, वह नहीं चाहती थीं कि मैं — और मैं नहीं चाहता हूँ कि आप, और परमेश्वर नहीं चाहता है कि हम — मार्ग से हटकर अनाज्ञाकारिता में या व्यर्थ जीवन में या ऐसी किसी भी बात में भटक जाएँ जो परमेश्वर का अपमान करे। यही लक्ष्य है। वह आपके मार्ग को सीधा बनाएगा: आज्ञाकारिता हेतु सीधा, चिरस्थायी आनन्द हेतु सीधा और परमेश्वर का आदर करने वाले जीवन हेतु सीधा। और वह कहता है कि इसे पाने के लिए तीन चरण हैं-

1. परमेश्वर पर भरोसा करें

पहला, अपने सम्पूर्ण हृदय से प्रभु पर भरोसा रखें।

इसलिए, अपने जीवन के प्रत्येक चरण में परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर भरोसा रखें। अपने जीवन को ऐसा बनाएँ जो प्रत्येक क्षण में भले, पवित्र, दयालु, प्रेमी, सब कुछ प्रदान करने वाले, सर्व-सन्तुष्टिदायक परमेश्वर पर भरोसा करता है। 

2. आत्म-निर्भरता का परित्याग करें

फिर, दूसरे चरण में, वह कहता है, “अपनी समझ का सहारा न लेना,” जिसका मेरे अनुसार अर्थ है कि स्वयं पर निर्भर न होने का सचेत चुनाव करना।

“यदि आप परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं, आत्म-निर्भरता का परित्याग करते हैं, और उसे जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में सम्मिलित करते हैं, तो वह आपके मार्ग को सीधा बनाएगा।”  

अपने आप से केवल इतना कहें: तुम स्वयं में अपर्याप्त हो। हे मस्तिष्क, तू अपने आप पर्याप्त बुद्धि नहीं ला सकता। आपको आत्म-निर्भरता से मुड़ना होगा। निश्चय ही, इसका अर्थ यह नहीं है कि आप नहीं सोचेंगे और योजना नहीं बनाएँगे। इसका सीधा सा अर्थ यह है कि आप इन सब पर भरोसा नहीं रखेंगे।

“युद्ध के दिन के लिए घोड़ा तो तैयार किया जाता है, परन्तु विजय यहोवा ही से है” (नीतिवचन 20:31)। इसलिए, हमारे योजना बनाने और सोचने तथा अपने मस्तिष्क का उपयोग करने के मध्य में ही, हम किसी और पर निर्भर हो रहे हैं। हम अपने स्वयं के संसाधनों पर निर्भर नहीं हो रहे हैं।

यदि आप पर भरोसा रखें, आत्म-निर्भरता का परित्याग करें, प्रत्येक परिस्थिति में उसको लाएँ, तो वह हमारे मार्गों को सीधा बनाएगा।

3. परमेश्वर को स्मरण करें

इसके बाद तीसरा चरण यह है: अपने सब मार्गों में उसी को स्मरण करना — इब्रानी भाषा के अनुसार अपने सब मार्गों में उसे जानें

इसलिए, आप जीवन के प्रत्येक मोड़ पर, प्रत्येक उस नये चुनाव में जिसे आपको करना है, प्रत्येक उस नए वार्तालाप में जिसमें आप सम्मिलित हैं, आप परमेश्वर को एक सन्देश भेज रहे हैं: परमेश्वर, मैं आपको यहाँ स्मरण करता हूँ। मैं आपको यहाँ जानता हूँ। मैं आपको यहाँ आमन्त्रित कर रहा हूँ। यहाँ आप ही निर्णायक हैं। यहाँ मुझे आपकी आवश्यकता है।

यदि हम उनका अनुसरण करें: उस पर भरोसा रखें, आत्म-निर्भरता का परित्याग करें, प्रत्येक परिस्थिति में उसको लाएँ, तो वह हमारे मार्गों को सीधा बनाएगा। वह हमें हमारे जीवन को व्यर्थ में गँवाने से या पाप के मार्ग में स्वयं को और दूसरों को नष्ट होने से रोकेगा और हमें अनन्त आनन्द में ले जाएगा। 

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