संसार में लोग उद्धार पाने के लिए विभिन्न प्रकार से लगे हुए हैं। सामान्यतः लोग कहते हैं कि रास्ते अनेक हैं परन्तु मंज़िल एक है। फिर भी लोगों में अलग-अलग समूहों की मान्यताएं एक-दूसरे से भिन्न हैं।  इस उद्धार और उसके परिणाम के विषय में लोगों में विभिन्न विचारधाराएं हैं। कुछ लोग उद्धार का अर्थ- ज़न्नत में शारीरिक सुखों की प्राप्ति और उनका भोग करना समझते हैं। कुछ लोग संसार में जीवन और मृत्यु के चक्र से छुटकारा पाने और परमात्मा में मिल जाने को ही उद्धार समझते हैं। कुछ लोग समस्त दुःखों और इच्छाओं से छुटकारा पाना ही उद्धार समझते हैं। 

परमेश्वर का वचन बाइबल उद्धार की सच्ची समझ को प्रदान करती है।

परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल उद्धार की सच्ची समझ को प्रदान करती है और साथ ही साथ उद्धार के साधन के बारे में बताती है कि एक ही उद्धार है और उद्धार पाने का एक मार्ग है, जो कि मनुष्य के कार्यों पर आधारित नहीं है।  वह उद्धार हमारे प्रभु यीशु मसीह में विश्वास से प्राप्त होता है। आइए हम बाइबल के अनुसार देखें कि उद्धार क्या है।  

उद्धार

साधारण रूप से उद्धार शब्द का अर्थ किसी चीज़ (बोझ से) से छुटकारा पाना, मुक्त होना या बचाया जाना है। परन्तु बाइबल पापों के बोझ से छुटकारे की बात करती है – उद्धार पापों की क्षमा और पाप के दण्ड, पाप के प्रभाव और पाप की उपस्थिति से छुटकारा पाना है। उद्धार परमेश्वर के न्याय व अनन्तकाल के मृत्युदंड से बचाया जाना है। उद्धार मृत्यु के बाद अनन्तकाल का जीवन है। हम इस जीवन में मरेंगे परन्तु सर्वदा का जीवन जीने के लिए। उद्धार के बारे में जानना काफी नहीं है, परन्तु इसके साथ ही साथ उद्धार हमें इस बात जानना अति महत्वपूर्ण है कि उद्धार की आवश्यकता क्यों है। उद्धार की आवश्यकता हमें उद्धारकर्ता की शरण में जाती है।

उद्धार पापों की क्षमा और पाप के दण्ड, पाप के प्रभाव और पाप की उपस्थिति से छुटकारा पाना है।

उद्धार की आवश्यकता

बाइबल का परमेश्वर सृष्टिकर्ता, पवित्र, धर्मी और न्यायी परमेश्वर है। वह पवित्रता का सर्वश्रेष्ठ मापदण्ड है। परमेश्वर ने सब चीज को अच्छा बनाया और मनुष्य को अपने स्वरूप में बनाया, ताकि वह परमेश्वर को महिमा दे सके। मनुष्य परमेश्वर के साथ सहभागिता रखता था और उसकी आराधना करता था। परन्तु अदन की वाटिका में आदम और हव्वा की अनाज्ञाकारिता के कारण पाप ने इस संसार में प्रवेश किया और मनुष्य परमेश्वर की पवित्र उपस्थिति और सहभागिता से दूर हो गए।

परमेश्वर से दूर होने का अर्थ – अनन्तकाल की मृत्यु है। पतन के कारण आत्मिक और शारीरिक मृत्यु ने इस संसार में प्रवेश किया। रोमियों 6:23 “क्योंकि पाप की मज़दूरी तो मृत्यु है…।”  और क्योंकि सबने पाप किया इसलिए सब परमेश्वर की महिमा से रहित हैं (रोमियों 3:23)। परमेश्वर पवित्र और न्यायी है और पापी को बिना दण्ड दिए नहीं छोड़ेगा। मनुष्यों को परमेश्वर के न्याय, क्रोध और दण्ड से बचाए जाने की आवश्यकता थी। यह गंभीर बात है क्योंकि उसके हाथ से कोई नहीं बच सकता है। मनुष्य विद्रोह, शत्रुता और अन्धकार में जीवन जी रहा है।   

प्रश्न यह है कि, यदि हम परमेश्वर से जो संसार का सृष्टिकर्ता है शत्रुता करेंगे तो फिर उससे बच कर कहां जाएंगे? पापों के कारण हमारा अन्त मृत्यु ही है। तो हम कैसे उद्धार को पा सकते हैं या अनन्त मृत्यु से कैसे बच सकते हैं? इसलिए उद्धार पाने के लिए परमेश्वरीय प्रदत्त साधन पर भरोसा करें। 

उद्धार का साधन

हमारे उद्धार का एकमात्र मार्ग परमेश्वर का पुत्र यीशु मसीह है। परमेश्वर ने हमारे लिए स्वयं उद्धार का मार्ग निकाला है। त्रिएक परमेश्वर ने अपनी भली योजना में होकार इस कार्य को किया। जब हम निर्बल ही थे… मसीह भक्तिहीनों के लिए मरा; जब हम पापी ही थे मसीह हमारे लिए मरा; जब हम शत्रु ही थे हमारा मेल परमेश्वर के साथ उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हुआ… (रोमियों 5:6,8,10)। यह पद हमें स्पष्ट रीति से बताते हैं कि हम ने अपने उद्धार के लिए कुछ नहीं किया बल्कि वास्तविकता यह है कि हम अपने उद्धार के लिए कुछ करने में सक्षम ही नहीं थे। 

परमेश्वर पिता ने अपने प्रेम के कारण अपने एकलौते पुत्र प्रभु यीशु मसीह को इस संसार में भेज दिया। वह देहधारण करके इस इस संसार में आ गया, ताकि वह हमें परमेश्वर के निकट उसकी उपस्थिति में पुन: लाए (यूहन्ना 3:16)। यीशु मसीह जब इस संसार में थे तो उन्होंने सब मनुष्यों के समान परमेश्वर के प्रति विद्रोह में जीवन नहीं जीया परन्तु 24 घण्टे सातों दिन हमारे लिए आज्ञाकारिता, पवित्रता, और धार्मिकता का जीवन जीया। उन्होंने हमारे लिए इस पृथ्वी पर उन सब कार्यों को किया जिसे हम करने में असक्षम थे। 

परन्तु यीशु मसीह ने क्रूस पर अपनी मृत्यु के द्वारा हमारे हिस्से की शर्मनाक, शापित, और दर्दनाक मृत्यु को ले लिया। उसने हमारे बदले में परमेश्वर के अनन्त प्रकोप को  सहा और अपने आपको बलिदान कर दिया ताकि हमें सेंतमेंत में उद्धार दे। हमारे उद्धार के लिए एक बड़ी कीमत चुकाई गई है। 1 पतरस 1:18-19 में लिखा है कि, “… तुम्हारा छुटकारा सोने या चांदी जैसे नाशवान वस्तुओं से नहीं, परन्तु निर्दोष और निष्कलंक मेमने, अर्थात् मसीह के बहुमूल्य लहू के द्वारा हुआ है”। 

यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा हमारे पास एक अनन्त जीवित आशा है कि हम मरेंगे नहीं, परन्तु अनन्तकाल तक परमेश्वर के साथ होंगे और उसकी महिमा करेंगे।

न सिर्फ़ उसकी क्रूस पर मृत्यु हुई परन्तु वह तीसरे दिन मृतकों में से जी उठने द्वार मृत्यु को हरा दिया। अब यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा हमारे पास एक अनन्त जीवित आशा है कि हम मरेंगे नहीं, परन्तु अनन्तकाल तक परमेश्वर के साथ होंगे और उसकी महिमा करेंगे। अतः अब मसीह में, हमारे लिए सेंतमेंत में उद्धार दे दिया है और अब हमारी पहुंच परमेश्वर तक है। त्रिएक परमेश्वर ही हमारे उद्धार का साधन है।   

हम जो यीशु मसीह पर विश्वास करते हैं, हमारा उद्धार यीशु मसीह में हो गया है – हमारे पापों का दण्ड यीशु मसीह ने चुका दिया है। चाहे वह भूत, वर्तमान, और भविष्य के समस्त पापों के दण्ड की कीमत को यीशु मसीह ने क्रूस पर चुका दिया। वर्तमान में हम दिन-प्रतिदिन पाप के प्रभाव से बचाए जा रहे हैं। एक दिन हम भविष्य में पाप की उपस्थिति से छुटकारा पा जाएंगे और हम परमेश्वर की उपस्थिति में अनंतकाल के लिए होंगे। इसलिए मसीह में, सुसमाचार के द्वारा प्राप्त उद्धार के कारण हम और अधिक परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ हों और उसके लिए जीवन जीएं। 

मसीह में, सुसमाचार के द्वारा प्राप्त उद्धार के कारण हम और अधिक परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ हों और उसके लिए जीवन जीएं। 

यदि आप उद्धार को पाना चाहते हैं? यदि आप अपने पापों की क्षमा को प्राप्त करके परमेश्वर की उपस्थिति में रहना चाहते हैं? तो प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कीजिए, क्योंकि वही एकमात्र उद्धार का साधन है।