प्रेम का बाइबलीय ईश्वरविज्ञान

प्रेम बाइबल के केन्द्र में है। 

परमेश्वर ने हम से इतना प्रेम किया, कि उसने अपने एकलौते प्रिय  पुत्र को भेज दिया हमसे लहू के द्वारा प्रेम करने के लिए, ताकि हम भी उसी प्रकार से प्रेम करें  और इस प्रिय  पुत्र को बहुमूल्य जानें (यूहन्ना 3:16, प्रकाशितवाक्य 1:5)।

किन्तु यह पूरी कहानी को नहीं बताता है। क्रूस पर, ख्रीष्ट ने प्रेम  का आरम्भ किया हमारे प्रेम – रहित पाप को तोड़ने के लिए, हमें नए हृदय का दान देने के लिए, और हमें प्रेम -दाता बनाने के लिए (1 यूहन्ना 4:19)। पवित्र आत्मा हम में परमेश्वर के प्रेम  को उण्डेलता है (रोमियों 5:5, गलातियों 5:22)।

इस प्रकार के प्रेम में एक पूर्ण त्रिएकतावादी स्वाद पाया जाता है, जिसकी प्राचीन जड़ें पुराने नियम में गहराई तक खुदी हुई हैं। और इस विषय को विकसित करने वाले एक विद्वान जेसन डेरोशी, बैतलहम कॉलेज और सेमिनरी मिनियापोलिस में पुराने नियम के एसोसिएट प्रोफेसर हैं।  

डेरोशी एक परिवर्तनात्मक नई पुस्तक के सम्पादक हैं: पुराने नियम के लेखक किस बात की वास्तव में चिंता करते थे: यीशु की बाइबल का एक सर्वेक्षण (व्हाट द ओल्ड टेस्टामेंट ऑथर्स रियली केयर अबाउट: ए सर्वे ऑफ जीसस’ बाइबल), पूर्ण-रंगीन, विशिष्ट रीति से ख्रीष्ट-केन्द्रित और ख्रीष्टीय दृष्टिकोण से पुराने नियम के कथासूत्र का सचित्र सर्वेक्षण (लूका 24:44)।

मन–प्राण–शक्ति से प्रेम
डेरोशी ने व्यवस्थाविवरण पर टिप्पणी लिखा, वह पुस्तक जिसमें वह अच्छी रीति से प्रवीण हैं, और हाल ही में मैंने उनसे प्रेम पर एक संक्षिप्त बाइबलीय ईश्वरविज्ञान के लिए पूछा व्यवस्थाविवरण और प्रसिद्ध शेमा से आरम्भ होते हुए, जिसमें लिखा है: “हे इस्राएल सुन! यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है। तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, अपने सारे प्राण, तथा अपनी सारी शक्ति  से प्रेम कर” (व्यवस्थाविवरण 6:4-5)।

सारा प्रेम परमेश्वर से आरम्भ होता है, डेरोशी ने मुझे बताया, “क्योंकि वह हमें बुलाता है कि हम उससे प्रेम करें, वहीं हम अनन्तकाल के लिए सर्वाधिक आनन्द को जानते हैं। परमेश्वर हमसे प्रेम करता है उससे प्रेम करने हेतु बुलाहट देने के द्वारा।” और यह बुलाहट है एक व्यापक प्रेम हेतु, उससे प्रेम करने के लिए अपने मन  और प्राण अपनी अभिलाषाओं, अपनी इच्छा, और अपनी सब प्रेरणाओं से।

“परन्तु इससे भी बढ़कर,” डेरोशी ने कहा, “यह ऐसा प्रेम है जिसमें सम्मिलित है हमारे सभी कार्य, हमारे शब्द, हम दूसरों के साथ कैसे व्यवहार करते हैं, हमारी धारणा, वह सब जो हमारे अस्तित्व से जुड़ा हुआ है।” परमेश्वर के प्रति हमारा प्रेम सर्व-व्यापक है; इसमें परमेश्वर से अपनी सम्पूर्ण शक्ति  से प्रेम करना पाया जाता है (वस्तुतः, हमारे सब-कुछ  के द्वारा), जिसमें हमारी सम्पूर्ण सामर्थ्य, धन, संसाधन, प्रत्येक वस्तुएं सम्मिलित हैं: “हमारी कार, हमारी पत्नी, हमारा सोशल मीडिया, हमारे कपड़े, हमारे बच्चे, हमारे घर। परमेश्वर के लिए प्रेम सम्पूर्ण हृदय के साथ है, जीवन-दायक है, सामुदायिक रूप से अपनाने वाला है। जहां कहीं हम जाते हैं, जो कुछ भी हम करते हैं वह कहता है: ‘मेरे जीवन में यहोवा प्रथम है!’”

हृदय का प्रतिस्थापन
परन्तु एक ऐसा प्रेम जो हमारे होंठों और हृदयों और बटुओं और स्मार्टफोन से व्यक्त होता है उसके लिए एक मौलिक हृदय परिवर्तन की आवश्यकता होती है। यह बात सदैव सत्य रही है (व्यवस्थाविवरण 10:16)। परमेश्वर से प्रेम करना और अपने पड़ोसी से प्रेम करना, जैसा कि व्यवस्था की आज्ञा है, इसके लिए नये हृदयों की आवश्यकता है। पुराने नियम में, यह आने वाली नई वाचा की प्रतिज्ञा है। (यहेजकेल 11:19-20, 36:26)।

प्रत्येक अनन्त प्रेम के लिए सुसमाचार आवश्यक है। डेरोशी ने कहा कि “हमारा सारा प्रेम लहू के द्वारा मोल लिया गया प्रेम है।” ख्रीष्ट में मेरा आनन्द, मेरी प्रसन्नता उन सब बात में जो परमेश्वर ने मेरे लिए सुरक्षित रखी है, यही अब मुझे परिभाषित करती है। मैं इस संसार में परमेश्वर की महानता की बड़ाई करने के लिए हूँ जो प्रेम में मुझे दिखाई गई है। और मेरे द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय, मेरे प्रत्येक अनुभव, परमेश्वर से प्रेम करने के विषय में है जो कि पड़ोसी के प्रति प्रेम में उमड़ता है। परमेश्वर में मेरा आनन्द और सन्तुष्टि ही, अपने पड़ोसी से बिना मूल्य की चिन्ता किए, आत्म-त्यागपूर्ण रीति से प्रेम करने के लिए ईंधन है।”

टोनी रेंकी desiringgod.org के वरिष्ठ लेखक हैं, वह Ask Pastor John पॉडकास्ट के मेजबानी करता हैं और अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ फीनिक्स क्षेत्र में रहते हैं।
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