एक ऐसा मित्र जो कभी नहीं छोड़ता

हममें से बहुतों के पास बहुत अच्छे मित्र होंगे जो हमारे सुख-दुख में काम आते हैं, जिनके साथ हम अपना हृदय खोलते हैं और जो हमारे साथ प्रत्येक परिस्थिति में खड़े होते हैं! प्राय: जब मित्रता दिवस (फ्रेन्डशिप डे) आता है तो लोग अपने मित्रों को स्मरण करते हैं और अपने मित्रों को उनकी मित्रता के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। कुछ अपने उन मित्रों को स्मरण करके दुखी भी होते हैं जिनके अपने अच्छे मित्र किसी छोटी सी बात पर सदा के लिए मुँह मुड़कर, सम्बन्ध तोड़कर दूर हो जाते हैं। कुछ अपने उन मित्रों की उपस्थिति और उनके साथ बिताए गए पलों को याद करते हैं जो इस संसार से किसी दुर्घटना, बिमारी या अन्य रीति से इस संसार से जा चुके है। तथा बहुत से लोग हैं जो अपने मित्रों के साथ अपनी मित्रता का आनन्द लेते हैं, साथ में समय व्यतीत करते हैं और मित्रता को जीवनपर्यन्त निभाने के वादे करते हैं।

परन्तु रुकिए और विचार कीजिए, इन सब के होते हुए भी हमें एक उत्तम मित्र की आवश्यकता है, यदि वह हमारा मित्र नहीं है तो हम भयंकर स्थिति में हैं: वह है परमेश्वर पिता का एकलौता पुत्र यीशु! आइये देखें कि कैसे वह हमारा उत्तम मित्र है! उसने क्या किया है! और कब तक वह अपनी मित्रता निभाएगा!

उसने हमें अपना मित्र बनाया।  

जब हम भटके थे, जब हम पवित्रता से दूर थे, जब हम अभक्त थे, जब हम उसके शत्रु थे, तब वह पवित्र होते हुए इस पापी संसार में देहधारण करके आया, दुख उठाया, पीड़ा सही और हमारे बदले में, हमें मिलने वाले दण्ड, मृत्यु को सह लिया और क्रूस पर मरने के लिए स्वयं को दे दिया! क्या हम ऐसा मित्र कहीं पा सकते हैं? उसके जैसा मित्र हम कभी भी नहीं पा सकते! उसके जैसा मित्र हमें कहीं भी नहीं मिलेगा! वह हमारा सच्चा मित्र है जो हमारी भलाई के लिए स्वयं बलिदान हो गया, ताकि हम अनन्त काल के लिए उसकी मित्रता का अनुभव करें। यीशु पापियों का मित्र है! उसने पिता की इच्छा को हम पर प्रकट किया (यूहन्ना 14:26), और हमारे सहायक के रूप में पवित्र आत्मा को दिया है (यूहन्ना 16:12-15)।

यीशु हमारा सच्चा मित्र है जो हमारी भलाई के लिए स्वयं बलिदान हो गया, ताकि हम अनन्त काल के लिए उसकी मित्रता का अनुभव कर सकें।

उसने स्वयं को हमारे लिए दे दिया।

हमारे जैसे शत्रुओं के लिए यीशु क्रूस पर बलिदान होकर हमें अपना मित्र बनाता है। उसके पास मित्र सा हृदय है। यीशु उत्तम मित्र है, क्योंकि उसने अपने मित्रों के लिए सब कुछ दिया। उसने परमेश्वर सम्बन्धित ज्ञान को उनको बताया, उसने उन्हें अनन्त जीवन का मार्ग बताया और उसने स्वयं को उनके लिए दे दिया। वह इस संसार में आ गया ताकि वह हमारे लिए मरे। वह हमारे लिए आ गया ताकि हमें न मरना पड़ा। उसने सीमाओं से परे हमसे प्रेम किया, जितना कि हम सोच भी नहीं सकते थे। उसने वह सब कुछ उनके साथ बांटा जो उसके पास था। वह हमारा मित्र है जिसके द्वारा परमेश्वर पिता के विषय में सही रीति से जान पाते हैं और उसके प्रेम का अनुभव करते हैं। उसकी मित्रता में हमें आशीष मिली है। वह हमारे जैसे मित्रहीन को अपना प्राण देने के द्वारा मित्र बनाता है। “इस से महान प्रेम और किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिए अपना प्राण दे” (यूहन्ना 15:13)। क्रूस उसकी मित्रता का सर्वश्रेष्ठ प्रमाण देता है।

वह हमें पूर्ण रीति से समझता है।

केवल वही आपको पूर्णता समझता है। वह आपके विषय में सब कुछ जानता है और वह है जो आपकी स्थिति को समझता है। जब हम ऐसी परिस्थिति में होते हैं जब हमें आभास होता है कि हम अकेले हैं, कोई हमें समझ नहीं सकता तो, यीशु की ओर निहारिए। यीशु की मित्रता को देखिए! यीशु जो हमारा सच्चा मित्र है उसने गरीबी में जीवन जिया, विरोधियों का सामना किया, सबके द्वारा त्याग दिया गया, उसने अपने मित्र को खोया, अपने मित्र की मृत्यु पर वह रोया, वह परिवार में किसी के खोने के दर्द जानता है, वह धोखे का अर्थ जानता है, पीड़ा से उसकी जान पहचान थी। और वह काठ पर लटकाया जाकर हमारे लिए श्रापित बना! इसलिए जब हम अपने संघर्षों, पीड़ाओं, विपरीत परिस्थितियों में से होकर जाते हैं, तो स्मरण रखिए, वह हमारी भावनाओं एव पीड़ाओं को समझता है। वह हमारी निर्बलताओं में हमसे सहानुभूति रखता है (इब्रानियों 4:15)। वह हमारी मन की वास्तविक स्थिति को समझता है। 

वह सदा तक हमारे साथ रहेगा।

यीशु वर्तमान में स्वर्ग में विराजमान हैं और एक दिन वह हम सबको जो उसके मित्र हैं उन सबको लेने के लिए आएगा। वह अभी परमेश्वर पिता के दाहिने विराजमान है और हमारे लिए मध्यस्थता करता है। वह अपने साथ सदा के लिए हमें रहने का सौभाग्य देता है। वह हमें नहीं छोड़ेगा। वह जीवन के अन्त तक हमारे साथ होगा। यहाँ तक कि मृत्यु के बाद भी वह हमारा साथ नहीं छोड़ेगा वरन अपने साथ सदा काल तक अपने पिता के साथ रखेगा। वह हमें अपनी मित्रता का आनन्द उठाने का सौभाग्य देता है। यह है सच्चा मित्र जो हमें कभी नहीं भूलता और न ही कभी छोड़ता है! जो उस पर विश्वास करते हैं, उनको वह अपने साथ अपनी उपस्थिति में अनन्त काल तक रहने का सौभाग्य देता है। इस संसार के मित्र भले ही हमें कभी छोड़ दें किन्तु वह ऐसा मित्र नहीं है जो हमें हमारी विपरीत परिस्थितियों में छोड़ दे! संसार के सब मित्र हमारे लिए जो कुछ भी कर सकते हैं वह केवल इसी पृथ्वी के जीवन तक कर सकते हैं, वे हमारी मृत्यु के बाद हमारे लिए कुछ नहीं कर सकते, किन्तु यीशु ऐसा मित्र है जो मृत्यु के बाद भी हमारा साथ देगा।

यीशु हमारा सच्चा मित्र है जो हमें कभी नहीं भूलता और न ही कभी छोड़ता है! यहाँ तक कि मृत्यु के बाद में वह हमारा साथ नहीं छोड़ेगा।

अन्त में, अपने जीवन के विषय में सोचिए: क्या आप मित्रहीन हैं? क्या आप टूटे हुए हैं? क्या आप अकेले हैं? क्या आप सोचते हैं कि कोई आपको नहीं समझता? क्या आप सोचते हैं कि कोई आपकी भावनाओं को, आपकी पीड़ाओं को नहीं समझ सकता? क्या आपको वैसे मित्र की आवश्यकता है जो आपको समझ सकें? क्या आप जीवन में थके हैं? क्या आप पाप के बोझ से दबे हैं? यदि हाँ, तो यीशु के पास आइये। जो कलवरी से बुलाता है। क्रूस उसके प्रेम का सर्वश्रेष्ठ प्रमाण है। यदि आप यीशु के मित्र हैं तो अवश्य ही अपने मित्रों को यीशु के पास लाइये, क्योंकि वही है जो मृत्यु के बाद भी हमें नहीं छोड़ेगा वरन अपने साथ अनन्त काल तक रखेगा। 

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