(इस पद को विपदा के समय में कैसे समझ सकते हैं)  तेरे निकट हजार और तेरे दाहिने हाथ दस हजार गिरेंगे, पर वह तुझ तक नहीं पहुँचेगा। (भजन 91:7) आज संसार भर में अनेक ख्रीष्टीय (मसीही) लोग भजन 91:7 की प्रतिज्ञा के आधार पर यह आशा कर रहे हैं
आज संसार में अनेक लोग कहते हैं कि जो संसार में आया है वह एक दिन इस संसार से जाएगा, यही मनुष्य की नियति है। किन्तु यह बात यहीं तक सीमित नहीं है। हमारे वर्तमान के जीवन का समाप्त होना ही हमारी नियति नहीं है। यद्यपि ऐसा प्रतीत होता
पिछले दो हज़ार वर्षों से ख्रीष्टीयता की नींव यीशु के क्रूस पर मरने और पुनः जी उठने पर टिकी हुई है। आरम्भ से ही ख्रीष्टियों के लिए यीशु के जी उठने की घटना एक चट्टान के समान अटल रही है। ख्रीष्टीय अपने आराधना के गीतों और विश्वास वचनों में
पिछले दो हज़ार वर्षों से क्रूस ख्रीष्टियता का मुख्य चिन्ह रहा है। इसके बाद भी आज संसार में कुछ लोग इस बात पर संदेह करते हैं कि, ‘क्या सच में यीशु क्रूस पर मारा गया था’? इस बात को नकारने के लिए लोग विभिन्न प्रकार के विचार भी रखते
हम अपनी प्रार्थना में प्रायः परमेश्वर की स्तुति करते हैं, उसे धन्यवाद देते हैं या फिर कुछ माँगते हैं। स्तुति, निवेदन या धन्यवाद जैसी प्रार्थना करने के सम्बन्ध में बाइबल स्वयं हमारी अगुवाई करती है। यद्यपि बाइबल को अपनी प्रार्थना में उपयोग करना बहुत सरल है, फिर भी हम
“देखो, एक कुंंवारी गर्भवती होगी, वह एक पुत्र को जन्म देगी, उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा,” जिसका अर्थ है, ‘परमेश्वर हमारे साथ’” मत्ती 1:23 Tweet क्रिसमस के अवसर पर मसीही घरों या कलीसियाओं में इम्मानुएल से सम्बन्धित अनेक गीत सुनने को मिलते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पुराने नियम
“परमेश्वर का पुत्र मनुष्य बना ताकि मनुष्यों को परमेश्वर का पुत्र बनने के योग्य कर सके।” -सी. एस. लुईस क्रिसमस सदियों से मसीही तथा गैर-मसीही लोगों के द्वारा संसार भर में मनाया जाता है। क्रिसमस की घटना परमेश्वर के पृथ्वी पर मनुष्य बनकर आने का वर्णन करती है। इसके