कलीसिया के सन्दर्भ में नये वर्ष के लिए योजनाएं

प्रायः संसार भर में लोग नये वर्ष के आने पर अनेक संकल्प लेते हैं। संसार हमें विभिन्न माध्यमों से योजना बनाने के लिए नियमित प्रोत्साहित करता रहता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यवसाय, नौकरी जैसे अनेक क्षेत्रों के लिए हम नई-नई योजनाएं बनाते हैं। किन्तु एक ख्रीष्टीय होने के नाते ध्यान रखें कि हमें परमेश्वर को स्मरण करके सब कार्य करना चाहिए, क्योंकि वही हमारी योजनाओं को सफल बनाता है। अतः परमेश्वर के परिवार कलीसिया को ध्यान में रखते हुए नये वर्ष की योजनाएं बनाने के लिए निम्नलिखित बातों पर विचार करें।

योजना बनाने के महत्व को जानें

परमेश्वर ने हमारे उद्धार के लिए अनन्तपूर्व में योजना बनाई और उसी योजना के अन्तर्गत यीशु ख्रीष्ट आए और हम बचाए गए।

योजना बनाना हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिना योजना के हम कोई भी कार्य ठीक रीति से पूरा नहीं कर सकते हैं। प्रभु यीशु मसीह शिष्यता के मूल्य के विषय में बात करते हुए कहते हैं कि “तुम में से कौन ऐसा है जो गढ़ बनाना चाहता हो पर पहिले बैठकर हिसाब न लगा ले कि मेरे पास पूरा करने के लिए पर्याप्त है या नही” (लूका 14:28)। इतना ही नहीं परमेश्वर ने हमारे उद्धार के लिए अनन्तपूर्व में योजना बनाई और उसी योजना के अन्तर्गत यीशु ख्रीष्ट आए और हम बचाए गए। अतः योजना बनाना महत्वपूर्ण कार्य है।

पिछले वर्ष का अवलोकन करें

नई योजना बनाने से पहले पिछले वर्ष की उपलब्धियों और असफलताओं पर विचार करें। आत्मिक या भौतिक रीति से जो कुछ प्रभु ने आपको दिया है उसके लिए परमेश्वर को धन्यवाद दें। साथ ही आप इन प्रश्नों को पूछें कि क्या आप नियमित रीति से पिछले वर्ष कलीसिया जा पाए? क्या आपने कलीसिया के भाई-बहनों से अपने समान प्रेम किया है? क्या आपने नियमित रूप से प्रभु का भाग कलीसिया में दिया है? क्या आपने दूसरी बातों से बढ़कर कलीसिया को प्राथमिकता दिया है? क्या आपने वर्ष भर परमेश्वर की सुनी है या परमेश्वर से अधिक अपने मन की सुनी है? यदि आप इन बातों में असफल हुए हैं तो परमेश्वर से क्षमा माँगें, क्योंकि वह क्षमा करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है (1यूहन्ना 1:9)। साथ ही उससे नये वर्ष में उसकी इच्छानुसार जीने के लिए सामर्थ्य और बुद्धि माँगिए। 

विशेष और कर पाने योग्य योजनाएं बनाएं

एक सर्वेक्षण के अनुसार संसार भर में लगभग 80 प्रतिशत लोग, नये वर्ष के लिए बनाई गई योजनाओं को फरवरी माह के दूसरे सप्ताह तक छोड़ देते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि उनकी योजनाओं में विशेष या सटीक लक्ष्य नहीं थे। इसके साथ ही उनकी योजनाएं इतनी बड़ी थीं जिनको पूरा कर पाना उनके लिए सम्भव नहीं था। उत्साह में आकर प्रायः लोग ऐसी योजनाएं बनाते हैं जिन्हें वे पूरी नहीं कर सकते हैं। अतः जब आप योजना बनाते हैं तो आपके लक्ष्य वहीं तक सीमित हों जितना कि आप सरलता से पूरा कर सकें। ध्यान रखें कि छोटे लक्ष्य बनाकर उनको पूरा करना, बड़े लक्ष्य बनाकर पूरा न कर पाने से अच्छा है।

अपनी कलीसिया को जानें

कलीसिया आपका आत्मिक परिवार है जहाँ आप उन ख्रीष्टीय भाई-बहनों के साथ जीवन व्यतीत करते हैं जिनके साथ आपको अनन्तकाल तक रहना है।

कलीसिया आपका आत्मिक परिवार है जहाँ आप उन ख्रीष्टीय भाई-बहनों के साथ जीवन व्यतीत करते हैं जिनके साथ आपको अनन्तकाल तक रहना है। इस वर्ष योजना बनाएं कि आप कलीसिया के प्रत्येक सदस्य को जानेंगे। इसके लिए आप उनके घर जाने या उन्हें अपने घर बुलाने के लिए सप्ताह का कोई समय निश्चित करें। साथ ही सम्पूर्ण कलीसिया की आवश्यकताओं को जानने के लिए आप अपने पास्टर से बात कीजिए कि आप इस आत्मिक परिवार की कैसे सहायता कर सकते हैं। कलीसिया के सदस्यों के लिए नियमित प्रार्थना करें, उनसे बात करने के लिए उनके नाम व मोबाइल नम्बर के साथ एक सूची तैयार करें। नियमित भेंट और दशमांश देने के अतिरिक्त कुछ बजट बनाएं जिससे कि अन्य सभाएँ और प्रशिक्षण, भवन निर्माण का निर्माण या रख-रखाव तथा दूसरे सदस्यों की सहायता जैसे कार्य किए जा सकें। यह सब करने के लिए कलीसिया को जानें और दूसरों में निवेश करें (इब्रानियों 10:23-25)।

कलीसियाई वाचा को स्मरण करें

किसी भी कलीसिया में जुड़ने पर आप औपचारिक या अनौपचारिक रीति से कलीसिया के साथ वाचा बाँधते हैं। क्योंकि एक ख्रीष्टीय होने के नाते आप परमेश्वर की सन्तान तथा ख्रीष्ट के सह-उत्तराधिकारी और परमेश्वर के परिवार के सदस्य  हैं (1 तीमुथियुस 3:15)। यदि आपके पास लिखित रूप में कलीसियाई वाचा है तो आप उसे पढ़ें और अपने उत्तरदायित्वों को स्मरण करें। यदि आपके पास लिखित वाचा नहीं है तो आप अपने पास्टर से इसके सम्बन्ध में बात करें या आप स्वयं बाइबल में इसके विषय में खोजें। इसके लिए आप रोमियों 12, इफिसियों 4, इब्रानियों 13, कुलुस्सियों 3, मत्ती 18, 28,  कुरिन्थियों 9 जैसे खण्डों को पढ़ें। क्योंकि ख्रीष्ट की देह में जुड़ने के कारण आप कलीसिया से अलग होकर जीवन नहीं जी सकते हैं (1 कुरिन्थियों 12:12-26)। साथ ही आप अपनी वैवाहिक वाचा को स्मरण करें कि क्या आप अपने विवाह के द्वारा पिछले वर्ष मसीह और कलीसिया के सम्बन्ध को संसार के सामने प्रदर्शित किया है?

अंतिम गन्तव्य को ध्यान रखते हुए योजना बनाएं

इस पृथ्वी पर अपने समय और संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करें और साथ ही अपने अनन्त जीवन में भी निवेश करना न भूलें, क्योंकि वही आपका अन्तिम गन्तव्य है। मात्र अपने आरामदायक जीवन के लिए ही योजनाएं न बनाएं, परन्तु दूसरों के जीवन में भी आनन्द लाने के लिए योजना बनाएं। यदि आप केवल इस संसार में ही अच्छा जीवन जीने के लिए योजनाएं बनाते हैं और आने वाले जीवन को अनदेखा करते हैं, तो आप उस चौड़े मार्ग पर चल रहे हैं जो विनाश की ओर जाता है (मत्ती 7:13)। 
अतः हम योजनाओं को प्रार्थना के साथ बनाएं और उन्हें पूर्ण करने के लिए प्रत्यनशील रहें। परमेश्वर का वचन कहता है कि, “मनुष्य अपने हृदय में युक्तियाँ बनाता है, परन्तु उनका सफल होना यहोवा की ओर से होता है” (नीतिवचन 16:1)। अतः हमें अपनी योजनाओं के लिए परिश्रम करना है, किन्तु उनकी सफलता के लिए परमेश्वर पर निर्भर रहना है।

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