पारिवारिक वचन अध्ययन आत्मिक उन्नति हेतु उपयोगी है।

सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और शिक्षा, ताड़ना, सुधार और धार्मिकता की शिक्षा के लिए उपयोगी है। (2 तीमुथियुस 3:17)

परमेश्वर ने सबसे पहले पुरुष और स्त्री को एक परिवार के रूप में अदन की वाटिका में रखा था। इस परिवार को परमेश्वर द्वारा दी गई आज्ञा का पालन करना था। और जब उन्होंने सृष्टिकर्ता परमेश्वर की बातों से बढ़कर उसके द्वारा बनाई गई सृष्टि अर्थात् सर्प की बातों पर मन लगाया, तब उन्होंने परमेश्वर की आज्ञा को तोड़ा। इस बात को हम आज अनेक परिवारों में भी देख सकते हैं, जहाँ वे परमेश्वर के वचन से बढ़कर अन्य बातों पर मन लगाते हैं। और अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर के वचन के स्थान पर सृष्टि की बातें सुनते और पाप की ओर अग्रसर होते हैं। प्रभु के एक दास डी.एल. मूडी ने कहा था कि या तो “बाइबल तुम्हें पाप से दूर रखेगी, या फिर पाप तुम्हें बाइबल से दूर रखेगा।” इसीलिए हमें परिवार की आत्मिक उन्नति के लिए परिवार के साथ वचन अध्ययन करना चाहिए।

वचन अध्ययन आत्मिक जीवन में बढ़ने के लिए उपयोगी है

परमेश्वर ने हमें अपने स्वरूप और समानता में बनाया था किन्तु पाप के कारण वह स्वरूप बिगड़ गया था। जिसके कारण हमें परमेश्वर से अधिक संसार की बातों में मन लगाना अच्छा लगता है। किन्तु यीशु ख्रीष्ट में होने कारण हमारा नया जन्म हुआ है। और नई सृष्टि होने के कारण हम प्रभु के तेजस्वी रूप में अंश-अंश करके बदलते जा रहे हैं (2 कुरिन्थियों 3:16-18)। इसलिए जैसे एक नये जन्मे बालक को दूध की और फिर ठोस भोजन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार हमें भी परमेश्वर के वचन की आवश्यकता है। जिस प्रकार हम शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिदिन परिवार के साथ शारीरिक भोजन खाते हैं, वैसे ही हमें परिवार के साथ आत्मिक भोजन भी करना चाहिए। क्योंकि जीवन बदलने और उद्धार देने की सामर्थ्य केवल परमेश्वर के वचन में पाई जाती है।

वचन अध्ययन बच्चों के समुचित पालन-पोषण के लिए उपयोगी है

अधिकाँश परिवारों में बच्चे होते हैं और उनका पालन-पोषण करना माता-पिता का उत्तरदायित्व है। किन्तु विडम्बना यह है कि अनेक माता-पिता बच्चों की शिक्षा और उनके शारीरिक विकास पर तो ध्यान देते हैं परन्तु उनके आत्मिक जीवन को अनदेखा करते हैं। जबकि उनका हृदय परिवर्तन उनके अनन्तकाल के गन्तव्य को निर्धारित करता है, क्योंकि जीवन का मूल-स्रोत्र वही है (नीतिवचन 4:23)। इसीलिए आदम-हव्वा ने अपने बच्चों को परमेश्वर के विषय में सिखाया। अब्राहम ने इसहाक को परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के विषय में बताया था। इस्राएलियों को आज्ञा दी गई थी वे अपने बच्चों को यत्नपूर्वक परमेश्वर के वचन की शिक्षा दें (व्यवस्थाविवरण 6:4-9)। और हमें भी बच्चों का पालन पोषण प्रभु की शिक्षा और अनुशासन में करने की आज्ञा दी गई है (इफिसियों 6:4)। अतः परिवार के साथ वचन का अध्ययन करना उन्हें आत्मिक रूप से बढ़ाने का एक साधन है। 

वचन अध्ययन सही दृष्टिकोण (विश्वदर्शन) रखने के लिए उपयोगी है

प्रत्येक व्यक्ति के पास संसार को देखने की अपनी समझ होती है। बचपन से ही हमें परमेश्वर, संसार, मनुष्य, जीवन और मृत्यु, पाप, उद्धार, स्वर्ग और नरक आदि के बारे में अनेक प्रकार की शिक्षाएँ दी जाती हैं। किन्तु अनेक शिक्षाएँ हमारी संस्कृति या महान् गाथाओं पर आधारित होती हैं जो कि परमेश्वर के वचन के अनुसार सत्य नहीं हैं। इसलिए हमें अपने विश्व-दर्शन अर्थात् संसार को देखने का दृष्टिकोण वचन पर आधारित करना चाहिए। क्योंकि परमेश्वर सृष्टि के आरम्भ से लेकर अन्त की सभी बातों को अपने वचन में बताया है, जिससे कि हमें संसार की सही समझ प्राप्त हो सके। इसलिए हमें अपने परिवार के साथ वचन का अध्ययन करना चाहिए तथा परमेश्वर और इस विश्व में जो कुछ भी उसकी सही समझ प्राप्त करना चाहिए। यदि हम अपने परिवार को वचन से नहीं सिखाएँगे तो संसार हमें सिखाएगा। और संसार हमें जीवन के मार्ग की ओर नहीं ले जा सकता है। यीशु ने कहा “तुम संसार के नहीं हो क्योंकि मैंने तुम्हें संसार से चुनकर निकाल लिया है” (यूहन्ना 15:19)।

परमेश्वर के दास बिली ग्राहम ने कहा था “यदि आप परमेश्वर के वचन से अनभिज्ञ हैं, तो आप सदैव परमेश्वर की इच्छा से अनभिज्ञ रहेंगे।” और यदि हम परमेश्वर से अनभिज्ञ हैं तो फिर हमारे पास अनन्त जीवन नहीं हो सकता है, क्योंकि जीवन तो केवल परमेश्वर ही दे सकता है। जैसा कि यीशु ने यूहन्ना 17:3 में कहा है “और अनन्त जीवन यह है कि वे तुझे जो एकमात्र सच्चा परमेश्वर है और यीशु ख्रीष्ट को जानें जिसे तू ने भेजा है।” और उसे हमारा परिवार तभी जानने पाएगा जब हम परिवार के साथ उसके वचन का अध्ययन करेंगे। अतः परिवार के साथ वचन अध्ययन करना हमारे परिवार की आत्मिक उन्नति के लिए उपयोगी है।

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प्रेम प्रकाश
प्रेम प्रकाश

सत्य वचन सेमिनरी के अकादिम डीन के रूप में सेवा करते हैं।

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