सताव के प्रति हम ख्रीष्टीय कैसे प्रत्युत्तर करें?

“… हमें बड़े क्लेश उठा कर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना है” प्रेरितों के काम 14:22 

क्लेश ख्रीष्टीय जीवन का भाग है। या तो हम क्लेश में से होकर जा चुके हैं, या होकर जा रहे हैं या होकर जाएँगे। जो कि इस बात का प्रमाण है कि अभी नई पृथ्वी और नये आकाश का होना बाकी है जहाँ न तो मृत्यु, दुःख, विलाप और पीड़ा होगी (प्रकाशितवाक्य 21:4)। परन्तु जब तक ऐसा नहीं हो जाता, तब तक सताव के प्रति हम कैसे प्रत्युत्तर करें? 

सताव को आनन्द की बात समझें

“…जब तुम विभिन्न परीक्षाओं का सामना करते हो तो इसे बड़े आनन्द की बात समझो।” याकूब 1:2

परमेश्वर का वचन याकूब की पत्री में हमको बताता है कि हमारा प्रतिउत्तर आनन्द का होगा। यह सुनने में बहुत ही विचित्र लगता है। परीक्षाओं और सताव के मध्य में आनन्द मनाना तो हमारे लिए सोचने वाली सबसे अन्तिम बात होती है। हमारा सबसे पहला प्रतिउत्तर तो कुड़कुड़ाना और दोष लगाना होता है। परन्तु याकूब 1:2 विश्वासियों के लिए एक निर्देश है, न कि एक हमारे लिए एक विकल्प।

इसका अर्थ यह नहीं है कि हमारे पास भावनाएँ नहीं होंगी या हमें दुःख नहीं होगा परन्तु हम उनके मध्य में सताव के कारण जो परिणाम होगा (विश्वास का परखा जाना, धीरज उत्पन्न होना और सिद्ध होना) उसके कारण आनन्दित होंगे। हम हमारी परिस्थितियों के आधार पर अपने आनन्द को खो नहीं बैठेंगे। इसलिए दुःखों के मध्य में भी आनन्द मनाइए क्योंकि जिस बात में आप आनन्दित हैं उसके लिए आप नकारात्मक और पापपूर्ण प्रतिउत्तर नहीं करेंगे। 

सताव को अनुग्रह की बात समझें

“क्योंकि ख्रीष्ट के कारण तुम पर यह अनुग्रह हुआ कि तुम उस पर केवल विश्वास ही न करो वरन् उसके लिए कष्ट भी सहो।” फिलिप्पियों 1:29

हमारे लिए इस बात को स्वीकार करना बहुत ही सरल है कि ख्रीष्ट के कारण अनुग्रह से हम विश्वास करने पाए हैं। परमेश्वर की ओर से यह हमारे लिए एक सौभाग्य है। परन्तु फिलिप्पियों 1:29 के अनुसार हमारे लिए एक अनुग्रह और सौभाग्य की बात यह है कि ख्रीष्ट के नाम के लिए कष्ट भी सहें। प्रेरितों ने यीशु के लिए कष्ट उठाने को सौभाग्य की बात समझा, “…प्रेरित महासभा के सामने से आनन्द मनाते हुए चल दिए कि उसके नाम के लिए वे अपमान सहने के योग्य तो ठहरे” प्रेरितों के काम 5:41। 

पौलुस चाहता है कि हम इस बात को समझे कि ख्रीष्ट के लिए और अपने विश्वास के लिए कष्ट सहना वास्तव में अनुग्रह है। यह तो हमारे लिए परमेश्वर का दान है। यह पाप के दण्ड के कारण या दुर्घटनावश नहीं हुआ है जैसा कि हम प्रायः सोचते हैं।  

सताव के कारण अचम्भित न हो

“यह दुःख-रूपी अग्नि-परिक्षा जो तुम्हारे मध्य इसलिए आई कि तुम्हारी परख हो- इसे यह समझकर अचम्भा न करना कि कोई अनोखी घटना तुम पर घट रही है।” 1 पतरस 4:12

अन्तः हमें सताव के कारण अचम्भा नहीं करना चाहिए। बाइबल हमारी समझ के विपरीत कार्य करती है। 1 पतरस 4:12 एक मायने में कह रहा है कि दुःख-रूपी अग्नि-परीक्षा अर्थात् घोर सताव को आम बात समझो। ऐसा मानो कि ऐसा तो होना ही है। इसमें कोई आश्चर्य करने की बात नहीं है। प्रत्येक विश्वासियों के लिए यह पहले से ही ठहराया गया है कि वह सताव का सामना करें क्योंकि हमारे प्रभु के साथ भी ऐसा ही हुआ है (यूहन्ना 15:20)। कलीसियाई इतिहास में लोगों ने ख्रीष्ट के कारण अपमान सहा, मार खाई यहाँ तक कि उनकी हत्या भी की गई और वे इसके लिए तैयार थे। इसलिए हम ख्रीष्टियों को अपने सताव के कारण अचम्भा नहीं करना चाहिए। 

मेरी प्रार्थना है कि हम बने रहें, लगे रहें और इस आश्वासन को स्मरण रखें, “धन्य हैं वे जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है” (मत्ती 5:9)।     

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आइज़क सौरभ सिंह
आइज़क सौरभ सिंह

सत्य वचन कलीसिया में वचन की शिक्षा देने और प्रचार करने की सेवा में सम्मिलित हैं।

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