स्त्रियाँ कैसे सेवा कर सकती हैं?

कलीसियाई सन्दर्भ में स्त्री और पुरूष की भूमिका पर ध्यान दें, तो इस बात को पाते हैं कि पुरूष लोग ही मुख्यतः सक्रीय रूप से भूमिका को निभा रहे होते हैं और कई बार स्त्रियाँ मात्र श्रोता के जैसे दिखाई देती हैं। कई बार बहनें इस बात को लेकर बहुत ही उलझन में रहती हैं कि वे कलीसिया में व्यवहारिक रीति से कैसे सेवा में सहयोग कर सकती है? आइये हम 6 बातों पर विचार करें जिसके द्वारा कलीसिया में बहने सक्रीयता के साथ सेवा में सहयोग कर सकती हैं –  

1. कलीसिया के लोगों के लिए प्रार्थना करें: बहनें जब घर के कार्यों में व्यस्त रहती हैं तो ऐसे समय में कलीसिया के विश्वासियों के लिए वे महत्वपूर्ण कार्य कर सकती हैं। वह यह है – लोगों के लिए प्रार्थना करना। लोगों के जीवनों के लिए धन्यवाद दें और कलीसिया के अगुवों, तथा सब विश्वासियों के लिए प्रार्थना करें। जिनके साथ आप मिलती हैं, जिनके साथ आप सुसमाचार सुनाती हैं, जो आवश्यकता में हैं, उन लोगों के लिए प्रार्थना करें।

2. सुसमाचार-प्रचार का कार्य करें: प्रत्येक विश्वासी सुसमाचार के कार्य के लिए बुलाया गया है। यह कार्य केवल विशेष रूप से प्रचारक से सम्बन्धित नहीं है, या केवल पुरुषों से के लिए नहीं है। उद्धार का सन्देश सभी लोगों के लिए, स्त्री और पुरुष दोनों के लिए है। कलीसिया में जब नये लोग आते हैं तो उन्हें सुसमाचार सुना सकती हैं। पौलुस सभी विश्वासियों को निर्देश देता है कि ‘मसीह के वचन को उनको अपने हृदय को बसने देना है और समस्त ज्ञान सहित एक दूसरे को शिक्षा और चेतावनी दो’ (कुलुस्सियों 316)। यह कलीसिया के सन्दर्भ में प्रतिदिन के जीवन में होने वाला कार्य है जो विश्वासी करते हैं।

3.अतिथि-सत्कार करें: यह ख्रीष्टीय जीवन में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है जिसे विश्वासी करते हैं और अपने प्रेम को प्रकट करते हैं। चाहे आप अविवाहित हों, या विवाहित हों आप सब अपने घरों को कलीसिया के लोगों के लिए खोलिए। यदि आप अविवाहित हैं और अविवाहित बहनों के साथ रह रही हैं, तो आप योजना बना कर कलीसिया के लोगों को आमन्त्रित कर सकती हैं और उनके साथ समय व्यतीत कर सकती हैं। यदि विवाहित हैं तो अपनी पति के साथ अवश्य ही योजना बनाएँ, लोगों को अपने घरों में बुलाएँ और अपने धन, समय और भावनाओं को उनके लिए खर्च करें।

4. शिष्यता करें (लोगों के जीवन में निवेश कीजिए, अपने बच्चों के जीवन में भी): जिन बहनों के बच्चे हैं, वे प्राय: घर के कार्य और बच्चों की देखभाल में व्यस्त होती हैं और उन्हें बहुत कार्य करने होते हैं। इसलिए अच्छा है कि वे अपने बच्चों को बाइबल के बारे में सिखाएँ। उनको बचपन से ही यीशु की ओर देखने में सहायता करें। उदाहरण: तीमुथियुस को उसकी नानी लोइस और माता यूनीके ने बचपन से पवित्रशास्त्र की शिक्षा दी (1 तीमुथियुस 1:5)। अविवाहित बहनें कलीसिया में अन्य बहनों के साथ वचन पढ़ें, प्रार्थना करें, बाइबलीय परामर्श दें और यीशु के पीछे चलने में बहनों की सहायता करें। 

5. कलीसिया में व्यवहारिक कार्यों में सहयोग दें: जब रविवार को विश्वासी इकट्ठे होते हैं तो उस दिन बहुत सारे कार्य हैं जिसमें कलीसिया के सभी लोग किसी न किसी प्रकार से सहयोग कर सकते हैं। कलीसिया हमारा आत्मिक परिवार है इसलिए इसमें स्त्रियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। यद्यपि पुलपिट से प्रचार के लिए परमेश्वर ने पुरुषों को अधिकार दिया है किन्तु स्त्रियाँ इन व्यवहारिक कार्यों को करने के द्वारा सहायता कर सकती हैं जैसे: आराधना स्थल की तैयारी कराना, लोगों का स्वागत करना, लोगों को बिठाना, गीत गाने में सहयोग करना, वचन पढ़ने, प्रार्थना करने, खाने-पीने की वस्तुओं को लोगों तक पहुँचाने, सण्डे स्कूल में बच्चों को पढ़ाने एवं सम्भालने, प्रभु-भोज तैयार करने तथा बाँटने इत्यादि।

6. बहनों को वचन सिखाएँ: ऐसा नहीं है कि बहनें कभी-भी किसी को सिखा नहीं सकती हैं। किन्तु बहनों की सभा में, या सप्ताह के मध्य छोटे समूह में किसी आत्मिक पुस्तक को पढ़ने के लिए अगुवाई कर सकती हैं। यह अच्छा है कि कलीसिया में जो परिपक्व बहने हैं, विवाहित बहने हैं, वचन सिखा सकती हैं, उन्हें अवश्य ही कलीसिया में आने वाली बहनों को वचन सिखाना चाहिए। कलीसिया में स्त्रियाँ का चाल-चलन पवित्र हो, अच्छी बातें सीखाने वाली हों, युवा स्त्रियों, बहनों को प्रोत्साहित करनी वाली हों (तीतुस 2:3-4)।

अतः इस बात को स्मरण रखें कि परमेश्वर ने हम सबको अपनी सेवा के लिए बुलाया है। चाहे वे स्त्री हों या पुरुष, परमेश्वर सबसे अपनी महिमा चाहता है और उसने स्त्री-पुरुष को भिन्न उत्तरदायित्व दिए हैं। किन्तु कलीसिया में जब महिलाएँ हैं, तो ऐसा नहीं है कि वे केवल कलीसिया में आएँ, बैठें और चले जाएँ वरन् वे भी प्रभु की सेवा के लिए स्वयं को खर्च कर सकें। कलीसिया में जब हम मिलते हैं, तो हमारे पास समय रहता है कि हम कई प्रकार से स्वयं को कलीसिया की सेवा के लिए दें। 

इसलिए मैं बहनों को उत्साहित करना चाहूँगा कि इन बातों को स्मरण रखें और सक्रीयता के साथ सेवा के कार्य में लगी रहें। उपर्युक्त 6 बातें को करना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। यह एक कलीसिया के लिए स्वास्थ्यवर्धक हैं। 

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नीरज मैथ्यू
नीरज मैथ्यू
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