सुसमाचार प्रचार करने का उद्देश्य क्या है?

सुसमाचार प्रचार करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि लोग उद्धार प्राप्त करें, विश्वासी यीशु के स्वरूप में बनते चले जाएं, और अन्ततः परमेश्वर को महिमा मिले। इस लेख में हम इन तीन उद्देश्यों पर विचार करने का प्रयास करेंगे – 

1 खोए हुए लोग उद्धार प्राप्त करें

सम्पूर्ण मानव जाति पाप में खोई हुई है। पाप के कारण मनुष्य परमेश्वर से अलग है। बाइबल बताती है कि “सब ने पाप किया और सब परमेश्वर की महिमा से रहित हैं” (रोमियों 3:23)। इस कारण मनुष्य के पास कोई आशा नहीं है कि वह स्वयं पाप से बचा सके या अपना उद्धार कर सके।

परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो जिसने सम्पूर्ण मानव जाति के उद्धार के लिए एक मार्ग का उपाय किया है। सुसमाचार जो कि सम्पूर्ण मानव जाति के लिए शुभ सन्देश है। यीशु ख्रीष्ट यूहन्ना 14:6 में कहते हैं, “मार्ग, सत्य और जीवन मैं ही हूं, बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता ”। यीशु ख्रीष्ट ही उद्धार के लिए सच्चा मार्ग है जो हमें अनन्त जीवन दे सकता है। सुसमाचार ही लोगों को उनके पापों से मुक्ति दे सकता है। इसलिए हमारा और आपका उत्तरदायित्व है कि हम इस शुभ सन्देश को लोगों तक ले जाएं अर्थात् सुसमाचार सुनाएं। ताकि परमेश्वर पवित्र आत्मा उनके हृदयों को परिवर्तित करे और वे विश्वास करके प्रभु यीशु ख्रीष्ट में अनन्त जीवन पाएं। 

2 कलीसिया ख्रीष्ट के जैसे बनती चली जाए

सुसमाचार केवल अविश्वासियों के लिए ही नहीं, परन्तु विश्वासियों के लिए भी है। सुसमाचार ही हमारे विश्वास की जड़ है अर्थात् सुसमाचार ही हमारे विश्वास का आधार है। इसलिए हम विश्वासियों को निरन्तर सुसमाचार पर विचार करने की आवश्यकता है। हम विश्वासी लोग कभी भी अपने इस जीवन में सुसमाचार की आवश्यकता से परे नहीं हो सकते हैं और न ही सुसमाचार प्रचार की आवश्यकता से परे हो सकते हैं। क्योंकि सुसमाचार ही हमें भक्तिपूर्ण जीवन जीने की उर्जा प्रदान करता है। सुसमाचार ही हमें परमेश्वर के पुत्र यीशु ख्रीष्ट के स्वरूप में बनने हेतु नित्य प्रेरित करता है। इसलिए सुसमाचार का प्रचार सब के लिए अति महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें प्रतिदिन इस बात को स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर अति प्रेमी और दयालु है। इसलिए हम जो ख्रीष्ट के द्वारा बचाए गए हैं, हमें परमेश्वर के प्रेम, पवित्रता में बढ़ना है।

केवल सुसमाचार ही है जो हमें सुसमाचार चलित/प्रेरित जीवन जीने के योग्य बनाता है। इसलिए आपस में एक दूसरे को सुसमाचार स्मरण दिलाएं।

सुसमाचार प्रचार का उद्देश्य न केवल लोगों यीशु के स्वरूप में परिवर्तित होने के लिए बुलाहट देना है, परन्तु इसका उद्देश्य विश्वासी लोगों को उत्साहित करना भी है कि उनका आचरण ख्रीष्ट के सुसमाचार के योग्य बने। इसीलिए प्रेरित पौलुस विश्वासियों सेआग्रह करता है कि “केवल इतना करो कि तुम्हारा आचरण ख्रीष्ट के सुसमाचार के योग्य हो… (फिलिप्पियों 1:27)। केवल सुसमाचार ही है जो हमें सुसमाचार चलित/प्रेरित जीवन जीने के योग्य बनाता है। इसलिए आपस में एक दूसरे को सुसमाचार स्मरण दिलाएं, उसके विषय में वार्तालाप करें और साथ ही कलीसिया से बाहर के लोगों को भी सुसमाचार का प्रचार करें। 

3 परमेश्वर को महिमा मिल सके

सुसमाचार प्रचार करना यीशु ख्रीष्ट में परमेश्वर की महिमा का प्रकटीकरण करना है। सुसमाचार प्रचार में हम अपने परमेश्वर की महिमा की घोषणा करते हैं कि कैसे पवित्र, न्यायी, धर्मी परमेश्वर पापी मनुष्य को बचाता है। वह अपने प्रेम में होकर अपने प्रिय पुत्र यीशु ख्रीष्ट के जीवन, बलिदान, और पुनरुत्थान के द्वारा बचाता है।

सुसमाचार प्रचार करना यीशु ख्रीष्ट में परमेश्वर की महिमा का प्रकटीकरण करना है।

यीशु ख्रीष्ट ने अपने सिद्ध जीवन के द्वारा परमेश्वर पिता को महिमान्वित किया, न केवल इतना परन्तु उसने क्रूस पर बलिदान होने के द्वारा परमेश्वर के प्रेम, न्याय, धार्मिकता को प्रदर्शित करने के द्वारा परमेश्वर की महिमा को सम्पूर्ण जगत के समक्ष प्रदर्शित किया।

उसने लोगों को सुसमाचार प्रचार करने के द्वारा परमेश्वर की महिमा को प्रदर्शित किया ताकि लोग अपने पापों से फिरें और विश्वास तथा पश्चाताप करके परमेश्वर के राज्य में सम्मिलित हों और यीशु ख्रीष्ट में उसकी महिमा का दर्शन कर सकें। जब सुसमाचार प्रचार के द्वारा लोग उद्धार प्राप्त करके परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करते हैं तो उससे परमेश्वर को महिमा मिलती है। इसलिए प्रत्येक विश्वासी को सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए ताकि परमेश्वर के नाम ऊंचा उठाया जाए, उसके नाम को महिमा मिले।  

अतः सुसमाचार प्रचार करना और सुसमाचार के अनुसार जीवन जीना इन दोनों बातों से परमेश्वर को महिमा मिलती है। इसलिए प्रिय भाईयो और बहनो, जब हम सुसमाचार का प्रचार का कार्य करते हैं तो हमें यह सोचना है कि हमारा उद्देश्य खोए हुए लोगों को परमेश्वर के पास आते देखना है। हमारा उद्देश्य कलीसिया में एक-दूसरे  को ख्रीष्ट के जैसे बनने में सहायता करना है। जिससे कि सब कुछ के द्वारा परमेश्वर के नाम को महिमा मिले। परमेश्वर हमारी सहायता करे कि हम और आप सुसमाचार प्रचार के लिए और भी प्रोत्साहित हों, प्रभु हमें लोगों को परमेश्वर के निकट लाने के लिए बोझ दे और अवसर प्रदान करे। प्रभु हमारे हृदय में उनके लिए प्रेम दे ताकि हम उन्हें सुसमाचार प्रचार कर सकें, उनके लिए निरन्तर प्रार्थना कर सकें।