जब यीशु कहता है ‘मैं तुम से प्रेम करता हूँ’

प्रायः, जिन्होंने हमें सबसे अधिक चोट पहुंचाई है उन्होंने प्रेम के विषय में सबसे अधिक बोला है।

विश्वासघाती पति ने गाया, “मेरी दुल्हन, मेरी हीर, मैं तुमसे प्रेम करता हूँ!”— मात्र इसलिए कि उसके गाल को चूमकर, अपनी रखैल की शय्या पर चला जाए। एक विश्वासयोग्य प्रतीत होने वाले मित्र ने शपथ खाई, “भाई, मैं तुमसे प्रेम करता हूँ!” — मात्र इसलिए कि गले लगाने के बाद आपकी पीठ में छुरा घोंप सके। अति नियन्त्रण करने वाली माँ ने बुदबुदाया, “यह केवल इसलिए है क्योंकि मेरे बच्चे मैं तुझसे प्रेम करती हूँ!”  जब वह अपने साथी को खा जाने वाली मकड़ी के समान उसे निगल (हानि कर) रही थी। 

इसलिए हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि यह घटिया बात है। सुन्दर शब्दों और प्रमाणिकता की भावनाओं की मुद्रास्फीति (अंग्रेजी के) उन तीन छोटे शब्दों को दिवालिया कर देती है जो सबस बहुमूल्य होने चाहिए: मैं तुमसे प्रेम करता हूँ  (I Love You)। बहुत सारे सभ्य शब्द और मीठी बातों के बीच में, हम कैसे — जैसे कि एक मित्र ने मुझसे कुछ दिन पहले पूछा — इन वचनों पर विश्वास कर सकते हैं जब ये हमारे उद्धारकर्ता के होठों से आते हैं?

महानतम ऊंचाई से प्रेम 

काश मेरे मित्र के लिए जो उत्तर तैयार होता, वह यह है: यीशु अपने प्रेम को महानतम ऊँचाइयों से प्रकट करता है । हो सकता है कि आप के प्रेमी ने आप के लिए ऊँचे मीनार से गाकर अपने प्रेम को प्रकट किया हो परन्तु अगली सुबह आप को छोड़ कर चला गया हो। हो सकता है कि आपके पिता ने आपसे अपने प्रेम को प्रकट किया हो जिस समय उन्होंने आप को बिस्तर पर सुलाया हो, केवल घर से बाहर जाने वाली सड़क पर जाने और फिर कभी वापस न आने के लिए। हो सकता है कि आपका साथी आप के साथ कंधे से कंधा मिलकर चला हो, हंसते हुए जिस प्रेम के स्नेह का आभास हो रहा था, वह केवल यात्रा में आगे बढ़ने और आपको पीछे छोड़ने के लिए था। परन्तु यीशु अपने प्रेम की उद्घोषणा आप के घर/महल के नीचे से, आप के बिस्तर/शय्या के पास से, या आपके साथ चलते समय नहीं करता है। वह इसकी उद्घोषणा ऊपर से करता है:

जो उद्धारकर्ता आपसे प्रेम करता है वह तुम्हारे ऊपर से कहता है, 

एक पहाड़ी की ऊंचाई से और एक पेड़ (क्रूस) पर से लटकते हुए। 

जो उद्धारकर्ता आपको प्रेम करता है वह आपके लिए ऊपर से पुकारता है,

उसका खून उस प्रेम की एक तस्वीर को चित्रित करता है जिसे आप देख सकते हैं।

मोमबत्ती के उजाले में रात्रिभोज पर यीशु ने आप के कानों में फुसफुसाया नहीं कि वह तुम से प्रेम करता है। और होटल के ऊपरी कमरे में आपसे नहीं कहा कि वह तुमसे प्रेम करता है। उसने स्वर्ग से कोई पत्र और फूल नहीं भेजे। उसने आपके लिए  बादलों पर कविता नहीं लिखी। परन्तु वह क्रूस पर चढ़ जाने के लिए नीचे आ गया । वह कहता है की वह तुम से प्रेम करता है जैसे तुम्हारा पाप उसके हाथों में कीले ठोकता और उसे क्रूस पर लटका देता है। उसने केवल यह कहा नहीं  कि उसने तुमसे प्रेम किया, वह यह प्रदर्शित करने के लिए मर गया कि उसने सबसे प्रभावशाली रीति से तुम से प्रेम किया जो कल्पना से भी परे है। “परमेश्वर अपने प्रेम को हमारे प्रति इस प्रकार प्रदर्शित करता है कि जब हम पापी ही थे मसीह हमारे लिये मरा” (रोमियों 5:8)।

तो फिर आप यह कैसे जान सकते हैं कि यीशु वास्तव में आपसे प्रेम करता है? आप वास्तव में  कैसे विश्वास कर सकते हैं कि उसका प्रेम आपको दूसरों के समान नहीं छोड़ेगा जिन्होंने आपको छोड़ दिया? उस स्थान की ओर देखिए जहाँ परमेश्वर ने पापियों के प्रति अपना प्रेम प्रकट करता है। प्रत्येक घाव, प्रत्येक पीड़ा, प्रत्येक कील में प्रेम की बिजली चमकती है/उसके प्रेम को प्रदर्शित करती है। प्रत्येक काँटा उसके माथे पर टिका था, प्रत्येक पंजा उसकी पीठ पर नोचने के लिए टिका था, उसके दुख के प्रति प्रत्येक सहनशील उपहास उसके प्रेम भरे शब्दों के पीछे गरजता है। उसने हमेंं लाल गुलाब नहीं दिया; उसने अपने प्रेम को प्रमाणित करने के लिए अपने गहरे लाल रंग के लहू को बहा दिया। 

उसने अपने प्रेम को कहाँ प्रमाणित किया

अनुभव को आपके महान लाल माणिक्य को चोरी न करने दें। पापियों को, जिन्होंने इसके लहू के प्रेम को पिया है, आपको यीशु के प्रेम से दूर न रखने दें जो उसके लहू द्वारा प्रमाणित है। यीशु आपका पूर्व प्रेमी नहीं है। वह आपकी लापरवाह माँ या गाली देने/शोषण करने वाला पिता नहीं है।  वह यहूदा इस्करियोती नहीं है —जो एक मित्र के जैसे आया किन्तु एक शत्रु के जैसे चूमा। यीशु उनके जैसा नहीं है — और न ही वह हमारे जैसा है। उसने विश्वासघाती के चुम्बन को स्वीकार किया — हमारा चुम्बन — और उन श्रापित कीलों को गले लगाया — हमारी कीलें। 

और उसने कीलों की पीड़ा से भी अधिक दुःख सहा। वह अपने पिता के द्वारा त्याग दिया गया था जब उसने हमारे पापों को अपने ऊपर लिया। वह क्रूस पर से चिल्लाया “हे मेरे परमेश्वर, हे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया?” (मत्ती 27:46)। केवल मनुष्य यह पीड़ा नहीं पहुंचा सकते थे। इससे पहले कि हजार खूनी क्रॉस ले लाओ। इसके आगे दस हजार कंटीले मुकुट और कोड़े ले आओ। यीशु, संसार द्वारा त्यागा गया, अपने लोगों द्वारा त्यागा गया, अपने शिष्यों द्वारा त्यागा गया, अब अपने पिता द्वारा त्याग दिया गया है।  

अब विचार करें: क्या उसने यन्त्रणा के कारण क्रूस पर पीड़ा सही, अपना जीवन दे दिया, आपके न्याय का प्याला पी लिया ताकि बाद में आपको त्याग दे जैसे पापियों ने आपके अतीत में किया?  क्या उसने प्रकोप के रेगिस्तान को पार किया, उस बड़े अजगर को घात किया, और अपनी दुल्हन को इस मंशा से जीता ताकि अंत में उसे तलाक दे?

ओह वह कैसे प्रेम करता है 

हम क्रूस पर दृष्टि डालने और एक विश्वासघाती मानव प्रेम को देखने के द्वारा उसका अपमान करते हैं। हो सकता है दूसरों ने आपको छोड़ दिया हो; (किन्तु) उसने नहीं। हो सकता है दूसरों ने प्रतिज्ञाएं तोड़ी हो; उसने नहीं। दूसरों का प्रेम समाप्त हो गया या मृत्यु के कारण टूट गया हो, परन्तु उसका कभी समाप्त नहीं होगा। 

खोई हुई आत्मा, परमेश्वर के प्रेम के पास घर वापस आती है। प्रिय संत, इस प्रेम की ज्वाला से अपने आप को सरगर्म करो। 

उद्धारकर्ता ने एक अपनी मृत्यु में पहाड़ी के ऊपर प्रेम का एक चिरस्थायी स्मारक बनाया। इन ऊँचाइयों से उसने अपनी विश्वासयोग्यता प्रमाणित की। उसने अपने प्रेम के वचन को ऊँचा किया अपने घायल शरीर को उठाने के द्वारा। उसका वचन पूछताछ से उतना ही बाहर/पर है जितना कि अब उसका शरीर रोमी भाले की पहुँच से बाहर है। 

वह असीम रूप से भरोसेमन्द है — यहां तक कि हमारे प्रेम के साथ भी।