“सुसमाचार प्रचार” क्या है?

अधिकांशतः ख्रीष्टीय लोग इस बात से अवगत हैं कि उन्हें सुसमाचार प्रचार के कार्य में अपने हांथ बटाना चाहिए परन्तु विडम्बना यह है कि वे इस बात को नहीं जानते हैं कि सुसमाचार प्रचार क्या है। वे अपने मनों में सुसमाचार प्रचार के विषय में भ्रमित हैं। तो अन्ततोगत्वा सुसमाचार प्रचार क्या है। आइए हम सुसमाचार प्रचार के अर्थ और परिभाषा तथा विषयवस्तु और सुसमाचार प्रचार के प्रति अपने उत्तरदायित्व को जानें: 

‘सुसमचार प्रचार’ का शाब्दिक अर्थ
सुसमाचार प्रचार अर्थात् Evangelism शब्द यूनानी भाषा के ευαγγελιον (इवांग्गेलियान) शब्द से लिया गया है जिसका शाब्दिक अर्थ – एक शुभ सन्देश अर्थात् सुसमचार है जिसे हम मरकुस 1:14-15 में देख सकते हैं और ευαγγελιζω (इवांग्गेलिज़ो)- यह शब्द एक क्रिया है जिसका तात्पर्य उद्घोषणा करना, सुसमचार का प्रचार करना, शुभ सन्देश को लोगों तक लाना और सुनाना या बताना है (रोमियों 10:15)। जो सुसमाचार का प्रचार करता है वह एक सन्देश को देता है वह सुसमाचार प्रचारक कहलाता है।

प्रत्येक विश्वासी को स्वयं में एक सुसमाचार प्रचारक होना चाहिए। क्योंकि हम यीशु में बचाए गए लोग यीशु के गवाह होने के लिए ठहराए गए हैं।

‘सुसमाचार प्रचार’ की परिभाषा
“सुसमाचार प्रचार” शब्द स्वतः स्पष्ट है कि “सुसमाचार प्रचार” सुसमाचार के संचार करने या प्रचार करने का कार्य है। दूसरे शब्दों में, सुसमाचार प्रचार यीशु ख्रीष्ट के सुसमाचार (शुभ सन्देश) को उदघोषित करने का कार्य है जिसका परम उद्देश्य कलीसिया के भीतर और कलीसिया के बाहर लोगों को प्रभावित करना है ताकि वे लोग यीशु ख्रीष्ट पर विश्वास करें, अपने पापों से पश्चाताप करें और उसका अनुसरण करें।

सुसमाचार प्रचार इस प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है कि – सुसमाचार प्रचार करना, पवित्र आत्मा की सामर्थ्य की सहायता से ख्रीष्ट यीशु(यीशु का व्यक्ति और उसके कार्य) को लोगों के समक्ष प्रदर्शित करना है, ताकि लोग ख्रीष्ट यीशु में आएँ और यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करें, और अपने जीवन के प्रभु के रूप में उसकी सेवा करें।

विश्वास करने हेतु यह आवश्यक है कि लोगों को कोई सुसमाचार सुनाए और उनके सुनने के लिए किसी न किसी को सुसमाचार का प्रचार करना होगा (रोमियों 10:17)। एक ख्रीष्टीय होने के कारण सुसमाचार को सुनाने या प्रचार करने, चेला बनाने हेतु हम उत्तरदायी हैं। क्योंकि हमारे प्रभु ख्रीष्ट यीशु ने चेला बनाने के विषय में हमें एक महान आदेश दिया है कि जाओ और चेला बनाओ… (मत्ती 28:18-20)। सुसमाचार प्रचार ही चेला बनाने का द्वार है अर्थात् शिष्यता करने का प्रथम कदम है। इसलिए हमें सुसमाचार प्रचार करने की आवश्यकता है।

‘सुसमाचार प्रचार’ की विषयवस्तु
सुसमाचार प्रचार की विषय-वस्तु को मुख्य चार बातों में सारांशित किया जा सकता है: परमेश्वर – मनुष्य – ख्रीष्ट यीशु – हमारा प्रतिउत्तर। सुसमाचार प्रचार को करने से पहले हमें इस बात को सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि हमारे सन्देश या प्रचार या वार्तालाप की विषय-वस्तु क्या है। सुसमाचार प्रचार की सही विषय वस्तु – यीशु का सिद्ध जीवन, हमारे लिए उनकी त्यागपूर्ण मृत्यु व बलिदान और तीसरे दिन पुनः जी उठने पर आधारित है (प्रेरितों के काम 2:22-24)। यीशु के सुसमाचार पर आधारित है।

पौलुस ने यीशु ख्रीष्ट के एक आदेश पाया हुआ प्रतिनिधि के रूप में सुसमाचार प्रचार करता है। इसलिए वह 1कुरिन्थियों 1:17 में स्वयं कहता है कि “क्योंकि ख्रीष्ट ने मुझे सुसमाचार प्रचार करने के लिए भेजा है।” वह अपने आप को ख्रीष्ट का राजदूत करके मानता है। उसने प्राथमिक रूप से सुसमाचार प्रचार में प्रभु ख्रीष्ट यीशु के विषय में सत्य को सिखाया। ताकि लोग सुसमाचार प्रचार के द्वारा ख्रीष्ट में विश्वास करें और लोगों के जीवन परिवर्तित हों। इसलिए पौलुस जीवन पर्यन्त सुसमाचार का प्रचार करता रहा। वह हमारे लिए सुसमाचार प्रचार तथा सुसमाचार के भण्डारी होने का उत्तम उदाहरण है।

‘सुसमाचार प्रचार’ ही शिष्य बनाने का प्रथम चरण है, इसलिए प्रत्येक कलीसिया को तथा प्रत्येक विश्वासी को व्यक्तिगत रीति से शिष्य बनाने के उद्देश्य से सुसमाचार प्रचार के समर्पित होना चाहिए।

‘सुसमाचार प्रचार’ के प्रति हमारा उत्तरदायित्व
प्रत्येक विश्वासी को स्वयं में एक सुसमाचार प्रचारक होना चाहिए। क्योंकि हम यीशु में बचाए गए लोग यीशु के गवाह होने के लिए ठहराए गए हैं। उसके गवाह को न केवल अपने जीवन व कार्यों के द्वारा गवाही देने वाला होना चाहिए, परन्तु इससे बढ़कर उसे सक्रीय रूप से यीशु के वचन अर्थात् सुसमाचार का प्रचार करने वाला, सुसमाचार को सुनाने या बताने वाला होना चाहिए। यीशु ने शिष्य बनाने का महान आदेश दिया है। सुसमाचार प्रचार ही शिष्य बनाने का प्रथम चरण है, इसलिए प्रत्येक कलीसिया को तथा प्रत्येक विश्वासी को व्यक्तिगत रीति से शिष्य बनाने के उद्देश्य से सुसमाचार प्रचार समर्पित होना चाहिए।

अतः “सुसमाचार प्रचार” सुसमाचार की उदघोषणा करने का कार्य है जो लोगों को प्रभावित करने के उद्देश्य किया जाता है ताकि पाप से ग्रसित लोग सुसमाचार पर विश्वास करें और अनन्त जीवन को प्राप्त करें तथा यीशु का अनुसरण करें। प्रिय पाठक, मैं आपको उत्साहित करना चाहता हूँ कि यीशु के सुसमाचार का प्रचार निरन्तर कीजिए, क्योंकि एक विश्वासी होने के कारण सुसमाचार प्रचार का उत्तरदायित्व हमारे कंधो पर है चाहे कलीसिया के भीतर हो या कलीसिया से बाहर गैर विश्वासी लोगों के मध्य में हो। इस कार्य को बड़े बोझ और प्रार्थना के साथ करें कि सुसमाचार प्रचार के द्वारा बहुत से लोगों के जीवनों को परिवर्तित करे और बचाए। जितना बाहर के लोगों को सुसमाचार सुनाए जाने की आवश्यकता है उतना ही हम विश्वासियों को भी सुसमाचार के सत्यों स्मरण दिलाए जाने की आवश्यकता है। ताकि हम सुसमाचार को थामें रह अनन्त जीवन का मुकुट को प्राप्त कर सकें और अपने उद्धारकर्ता और राजा यीशु की आराधना कलीसिया में सकें। इसलिए प्रिय भाइयो और बहनो, जब आप एक दूसरे से मिलते हैं, घर जाते हैं, एक दूसरे के साथ भोजन करते हैं और एक-दूसरे से बातचीत करते हैं तो अवश्य ही एक दूसरे को सुसमाचार स्मरण दिलाएं। जब आप गैर विश्वासी से मिलते-जुलते हैं और उनसे वार्तालाप करते हैं, तो उन्हें जीवन के वचन अर्थात सुसमाचार को अवश्य सुनाएं / प्रचार करें।