खजूर का रविवार (Palm Sunday) एक महत्वपूर्ण ख्रीष्टीय पर्व है, जो प्रभु यीशु ख्रीष्ट के यरूशलेम में विजयपूर्ण प्रवेश की स्मृति में मनाया जाता है। यह घटना बाइबल के नए नियम में वर्णित है और यीशु की सेवकाई का एक अत्यंत निर्णायक क्षण प्रस्तुत करती है, जहाँ वे मसीहा और उद्धारकर्ता के रूप में प्रकट होते हैं।
बाइबल के अनुसार, जब यीशु अपने शिष्यों के साथ यरूशलेम के निकट पहुँचे, तो उन्होंने दो शिष्यों को आगे भेजकर एक गधे और उसके बच्चे को लाने का निर्देश दिया। तब यीशु उस गदहे के बच्चे पर सवार होकर नगर में प्रवेश किया। लोगों ने उनके स्वागत में अपने वस्त्र और खजूर की डालियाँ मार्ग में बिछाईं और जयजयकार करते हुए कहा:
“दाऊद के पुत्र को होशन्ना! धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है! सर्वोच्च स्वर्ग में होशन्ना!” (मत्ती 21:9)
उस समय यरूशलेम के लोग अत्यंत उत्साहित थे। वे विश्वास करते थे कि यीशु वही प्रतिज्ञात मसीहा हैं जो उन्हें रोमी शासन से मुक्त करेंगे। किन्तु यीशु का गधे पर सवार होकर प्रवेश करना केवल एक साधारण घटना नहीं था—यह पुराने नियम की भविष्यवाणी की स्पष्ट पूर्ति थी। जकर्याह 9:9 में लिखा है:
“देख, तेरा राजा तेरे पास आता है… वह दीन है और गदहे पर सवार है।”
यह दृश्य दर्शाता है कि यीशु एक युद्ध करने वाले राजा के रूप में नहीं, वरन् शान्ति और नम्रता के राजा के रूप में आए।
जब फरीसियों ने इस जयजयकार को देखकर आपत्ति की और भीड़ को चुप कराने को कहा, तब यीशु ने उत्तर दिया:
“यदि ये चुप रहेंगे, तो पत्थर चिल्ला उठेंगे।” (लूका 19:40)
यह कथन इस सच्चाई को प्रकट करता है कि यीशु का आगमन परमेश्वर की महान योजना का भाग था—ऐसी घटना जिसे रोका या दबाया नहीं जा सकता।
खजूर का रविवार पवित्र सप्ताह (Holy Week) की शुरुआत को चिन्हित करता है, जो ईस्टर रविवार तक चलता है। इस दिन प्रयुक्त खजूर की डालियाँ विजय, आनन्द और शान्ति का प्रतीक हैं। आज भी ख्रीष्टीय विश्वभर में इस दिन को स्मरण करते हुए जुलूस निकालते हैं और प्रभु की स्तुति करते हैं।
सुधारवादी दृष्टिकोण से देखें, तो यीशु का यह प्रवेश केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, अपितु परमेश्वर की सम्प्रभु योजना की पूर्ति है। यह दर्शाता है कि कैसे परमेश्वर ने पूर्व में दी गई भविष्यवाणियों को पूर्ण किया और अपने उद्धार के कार्य को आगे बढ़ाया।
साथ ही, यह हमें क्रूस की ओर भी संकेत करता है। जिस भीड़ ने “होशन्ना” पुकारा, वही आगे चलकर यीशु के मिशन को समझ नहीं सकी। यीशु भली-भाँति जानते थे कि उनका मार्ग उन्हें क्रूस तक ले जाएगा—जहाँ वे सम्पूर्ण मानवता के पापों के लिए अपने आप को बलिदान करेंगे।
इस प्रकार, खजूर का रविवार हमें यह स्मरण दिलाता है कि यीशु केवल एक राजनीतिक उद्धारकर्ता नहीं, वरन् सम्पूर्ण संसार के एकमात्र सच्चे उद्धारकर्ता हैं। उनका राज्य इस संसार का नहीं, किन्तु अनन्त और आत्मिक है।





