यीशु हमारे लिए प्रार्थना करता है
जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन

जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन

संस्थापक और शिक्षक, desiringGod.org

अतः जो उसके द्वारा परमेश्वर के समीप आते हैं, वह उनका पूरा पूरा उद्धार करने में समर्थ है, क्योंकि वह उनके लिए निवेदन करने को सर्वदा जीवित है। (इब्रानियों 7:25)

यहाँ पर लिखा है कि ख्रीष्ट सम्पूर्णतः से उद्धार करने में समर्थ्य है — सर्वदा तक — क्योंकि वह हमारे लिए निवेदन करने को सर्वदा जीवित है। दूसरे शब्दों में, यदि वह सर्वदा हमारे लिए मध्यस्थता नहीं करता, तो वह सर्वदा के लिए हमें उद्धार नहीं दिला पाता।

इसका अर्थ यह है कि हमारा उद्धार उतना ही सुरक्षित है जितना कि ख्रीष्ट का याजकीय पद अविनाशकारी है। इसीलिए हमें ऐसा याजक चाहिए जो मानवीय याजक से कहीं अधिक बढ़कर हो। ख्रीष्ट का ईश्वरत्व और मृतकों में से उसका पुनरुत्थान उसके अविनाशी याजकपन को हमारे लिए सुरक्षित बनाते हैं।

इसका अर्थ यह है कि हमें अपने उद्धार के विषय में स्थिर शब्दों में बात नहीं करनी चाहिए जैसा कि हम प्रायः करते हैं — जैसे मानो कि मैंने एक बार कुछ निर्णय लेते हुए किया था, और ख्रीष्ट जब एक बार मरा था और फिर से जी उठा था तो उसने कुछ किया था, और बस केवल इतना ही है। इसमें केवल इतनी ही बात नहीं है।

ठीक आज ही के दिन भी मुझे स्वर्ग में यीशु की शाश्वत मध्यस्थता द्वारा बचाया जाता है। यीशु हमारे लिए प्रार्थना करता है और यह हमारे उद्धार के लिए आवश्यक है।
अपने महायाजक के रूप में हम स्वर्ग में यीशु की शाश्वत प्रार्थनाओं (रोमियों 8:34) और सहायता (1 यूहन्ना 2:1) के द्वारा अनन्तकाल के लिए बचाए जाते हैं। वह हमारे लिए प्रार्थना करता है और उसकी प्रार्थनाओं का उत्तर दिया जाता है क्योंकि वह अपने सिद्ध बलिदान के आधार पर सिद्ध रीति से प्रार्थना करता है।