कलीसिया जाने के पांच बुरे कारण

मैं एक पास्टर को जानता हूं जिसकी कलीसिया में छत के रंग को लेकर विभाजन हो गया था। 

वहाँ कुछ लोगों का यह मानना था कि किसी भी भले  ख्रिष्टीय को पता होना चाहिए कि काला रंग बुराई का रंग है। शैतान यद्दिप स्वयं एक ज्योतिर्मय स्वर्गदूत का छद्मवेश धारण कर सकता है, परन्तु वह निश्चित रूप से अपने कार्यालय को भयानक रंग से रंगे रहता है। “तो क्या हम धर्मियों की मण्डली में शैतान का रंग चढ़ा दें? ऐसा कभी न हो !” उस दल ने घोषणा की। और जब मांगें नहीं मानी गईं, तो वे छोड़ कर चले गए। वह देह इस रीति के रंगीन समझौते को सहन नहीं कर सकी। 

जब एक कलीसिया छत के रंग को लेकर विभाजित होती है, तो किसी न किसी को तो आश्चर्य होता होगा कि अंततः हम कलीसिया जाते ही क्यों हैं? परमेश्वर की आराधना करने के लिए? या फिर मनोरंजित होने के लिए? या फिर अपनी सभी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को पूरी करने के लिए? 

आप आराधना करने क्यों जाते हैं?
यीशु ने अपने समय में लोगों से यही बात पूछी जब वे यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के उपदेश को सुनने के लिए गए थे।  

यीशु भीड़ के लोगों से यूहन्ना के विषय में कहने लगा, “तुम जंगल में क्या देखने गए थे? हवा से हिलते हुए सरकण्डे को? फिर तुम क्या देखने गए थे? कोमल वस्त्र पहने हुए मनुष्य को? देखो, कोमल वस्त्र पहिनने वाले राजभवनों में रहते हैं। फिर तुम क्यों गए थे? किसी नबी को देखने के लिए? हां, और मैं तुम से कहता हूं, नबी से भी बड़े व्यक्ति को। यह वही है जिसके विषय में लिखा है, ‘देख, मैं अपने दूत को तेरे आगे भेजता हूं, जो तेरा मार्ग तेरे आगे तैयार करेगा।’” (मत्ती 11: 7-10) 

जब हम यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले की सेवकाई और यीशु द्वारा भीड़ से पूछे गया प्रश्नों का सर्वेक्षण करते हैं, तो हम पाते हैं कि परमेश्वर हमें कलीसिया जाने के पांच बुरे कारण देता है।  

1. आरामदायक होने के लिए 
तुम जंगल में क्या देखने गए थे? (मत्ती 11:7)

यदि हम सावधान नहीं हैं, तो कलीसिया उन लोगों के लिए एक उचित विकल्प बन सकती है जो एक महंगे क्लब का व्यय वहन नहीं कर सकते हैं। नि:शुल्क शिशु देखभाल, सुन्दर लोग, प्रेरणादायक सन्देश, सदस्यता के लिए एक आकर्षक स्थान, कॉफी, डोनट्स, और सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएं किसी भी ऐसे व्यक्ति को आकृषित कर सकती हैं जो परमेश्वर से प्रेम नहीं करता है। ऐसी सुविधाएं बुरी नहीं हैं यदि वे हमें सोने के लिए न फुसलाएं अथवा हमारे उत्साह की धार को कम न करें।  

यीशु इस्राएलियों को स्मरण दिलाता है कि वे यूहन्ना की बात सुनने के लिए जंगल  में गए। वे परमेश्वर का वचन सुनने के लिए अभी बनी कॉफी के साथ भव्य सभागारों में अपनी सुविधानुसार नहीं बैठे थे। वे परमेश्वर से सुनने के लिए असुविधा को सहने के लिए तैयार थे। क्या हम सन्तों के साथ आराधना करने और परमेश्वर के उद्घोषित वचन को सुनने के लिए जंगल में जाएंगे, असुविधाजनक कुर्सियों में बैठेंगे, कम कुशल संगीतकारों (या बच्चों की सेवकाई) को सहेंगे? वे तो यूहन्ना को सुनने के लिए जंगल में गए थे। 

पार्टी, कृत्रिम धुएं, झिलमिलाती ज्योति और महल ने उन्हें आकर्षित नहीं किया था। वे एक ऐसे स्थान पर गए जहां वे वैसे तो कभी नहीं जाते थे — जब तक कि वहाँ नबी न हो।  

2. डांवाडोल विचारों को सुनने के लिए 
तुम जंगल में क्या देखने गए थे? हवा से हिलते हुए सरकण्डे को? (मत्ती 11:7) 

यीशु उस बात का विरोध करता है जो इन दिनों अत्यन्त प्रचलित प्रतीत होती है: अनिश्चित शिक्षा। वह नबी आज के समय का लोकप्रिय बाइबल शिक्षक नहीं था, जो कि उन भागों की व्याख्या नहीं करता है जिन्हें वह समस्याग्रस्त पाता है या शास्त्रसम्मत विश्वास पर प्रश्न उठाते हुए अपना नाम कमाता है। वह सन्देहवाद या शंका पर अपनी सत्यता को प्रमाणित करने और निम्नलिखित बातों को प्राप्त करने के लिए निर्भर नहीं था। उसने मात्र चर्चा ही नहीं की; किन्तु उसने प्रचार किया। उसने मात्र प्रश्न ही नहीं किया; किन्तु उसने उत्तर दिया। वह हवा के साथ बह नहीं गया; किन्तु वह चट्टान पर दृढ़ रहा। 

यीशु के श्रोता परमेश्वर के जन की सुनने गए जो परमेश्वर की ओर से बोलता है। यूहन्ना, जन्म से ही आत्मा से परिपूर्ण था, तथा प्रज्वलित था। हमें उन इस्राएलियों के समान ऐसे नम्र लोगों की बात सुनने के लिए लालायित रहना चाहिए जिनकी “विनम्रता” उन्हें प्रकाशित सत्य के विषय में अनिश्चित नहीं बनाती है, परन्तु उन्हें इन पर और अधिक निर्भर होने का कारण देती है। स्वयं के विषय में कोई भी फुसफुसाहट नष्ट हो जाती है जैसे ही वह छत पर से प्रचार करता है (मत्ती 10:27)। स्व-घोषित सन्देहवादी, जिनके पास हममें से अधिकांश के समान “ज्ञान नहीं है,” इसलिए उनको हम में से अधिकांश के समान सिखाना भी नहीं चाहिए।

3. मनोरंजन करने के लिए
वे ऐसे पास्टर से पीछे नहीं हटे जो उन्हें सच्चाई से घायल करने और झूठी शिक्षा का विरोध करने के लिए तैयार था। वे यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले को सुनने के लिए गए जो कहता है, 

“हे सांप के बच्चों, तुम्हें किसने सचेत कर दिया कि आने वाले प्रकोप से भागो? इसलिए अपने पश्चाताप के योग्य फल भी लाओ; और अपने मन में यह न सोचो, ‘हमारा पिता इब्राहीम है,’ क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि परमेश्वर इन पत्थरों से भी इब्राहीम के लिए सन्तान उत्पन्न कर सकता है (मत्ती 3:7-9)। 

उनके पास खुजलाहट वाले कान नहीं थे जो इस बात की खोज कर रहे थे कि “अपनी अभिलाषाओं के अनुसार ही अपने लिए बहुत से गुरु बटोर लें” (2 तीमुथियुस 4:3)। वे ऐसे व्यक्ति को देखने नहीं गए जो उनके प्राणों के भले के लिए  कठिन बातों को बोलने से डरता हो। उसने उनकी चापलूसी नहीं की। उसने किसी दूसरे लोगों की मूर्तियों पर प्रहार नहीं किया। किन्तु उसने इब्राहीम वंश के विषय में उनकी झूठी आशाओं, और फरीसियों और सदूकियों की आशाओं को चुनौती दी। 

बहुत से उन लोगों के विपरीत जो सरल-विश्वासवाद और सस्ते अनुग्रह की अपनी योजना में फल का कोई स्थान नहीं देखते हैं, यूहन्ना ने अपने सुनने वालों को केवल क्षमा मांगने के लिए ही नहीं, परन्तु उन्हें “पश्चात्ताप के योग्य फल भी लाने” के लिए भी बुलाया था। वह अपने पाप से प्रेम करने वाले व्यवस्था-विरोधियों द्वारा व्यवस्थावादी धर्म का बढ़ावा देने के आरोपों से नहीं डरता था। उसके श्रोता आराम से बैठकर स्टारबक्स काफी की चुस्की नहीं लेते उन प्रेरणादायक उपदेशों को सुनने के लिए जो उत्साहवर्द्धक कहानियों से भरे होते, और फिर बिना प्रभावित हुए चले जाते। निष्क्रिय रूप से मनोरंजित किये जाने के लिए जंगल में नबी के साथ होना एक अनुपयुक्त स्थान था। यह नबी से सुनने, विश्वास करने, पापों को अंगीकार करने, पश्चात्ताप करने और बपतिस्मा लेने का स्थान था। 

4. वास्तविकता से बचने के लिए 
कुल्हाड़ा अब भी पेड़ों की जड़ पर रखा हुआ है, और प्रत्येक पेड़ जो अच्छा फल नहीं लाता, काटा और आग में झोंका जाता है। (मत्ती 3:10)

परमेश्वर ने बार बार यह कथन पुराने नियम में अपने झूठे नबियों और याजकों के लिए कहा,  

उन्होंने यह कह कर ‘शान्ति है शान्ति’ मेरी प्रजा के घावों को ऊपर से चंगा किया परन्तु शान्ति तो है ही नहीं। (यिर्मयाह 6:14)

यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने प्रमाणित किया कि वह ऐसा नबी नहीं है। उसने चेतावनी दी कि यदि उन में पश्चात्ताप के योग्य कोई फल नहीं है, तो “उन्हें काटा और आग में झोंक दिया जाएगा” — एक “न बुझने वाली आग में” (मत्ती 3:12)। उसने अपने लोगों के घाव को सहजता से चंगा नहीं किया। वह न्याय के विषय में बुदबुदाया नहीं और न ही उसने फुसफुसाते हुए विनाशवाद की कल्पित कथाओं के माध्यम से नरक को अमान्य ठहराया। उसने परमेश्वर से अधिक प्रेममय और क्षमाशील होने का ढोंग नहीं किया। उसने अनन्त वास्तविकताओं या अविनाशी आत्माओं से ढिलाई से व्यवहार नहीं किया।

यीशु के अग्रदूत ने लोगों को परमेश्वर के मेमने के लिए तैयार रहने हेतु पुकार कर आवाज़ दी। क्योंकि, जैसा कि पवित्रशास्त्र में यह स्पष्ट होना चाहिए, यह जीवन ही अनन्तकाल के लिए मार्ग निर्धारित करता है। छिद्रयुक्त नाव में अभी डूबेंगे, तो आप अनन्तकाल के लिए खो जाएंगे। यदि वह ऐसे प्रचार करता है जैसे कि कुछ भी दांव पर नहीं लगा है — जैसे कि नरक का मुंह नहीं खुला है या स्वर्ग हमारे सामने खड़ा होकर हमें नहीं बुला रहा है, यदि वह प्रचार-मंच में बुराई के विषय में खिलखिलाता है या श्रेष्ठतर जीवन जीने हेतु प्रेरित करने के लिए सुखदायक कहानियां सुनाता है किन्तु उन गुप्त प्रेमों को कभी सम्बोधित नहीं करता जो हमें अथवा ख्रीष्ट को नाश करने की धमकी देते हैं जो हमें बचाने का प्रस्ताव रखता है — तो वह अपने पद के लिए एक कलंक है।

5. मुख्यतः स्वयं के विषय में सुनने के लिए 
फिर तुम क्यों गए थे? किसी नबी को देखने के लिए? हां, और मैं तुम से कहता हूं, नबी से भी बड़े व्यक्ति को। यह वही है जिसके विषय में लिखा है, ‘देख, मैं अपने दूत को तेरे आगे भेजता हूं, जो तेरा मार्ग तेरे आगे तैयार करेगा।’ (मत्ती 11:9-10)

यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले की सेवकाई अन्य सभी सच्चे ख्रिष्टीय सेवाओं का प्रतीक है: वे नित्य ख्रीष्ट की ओर संकेत करती रहती हैं। वे स्वयं ज्योति नहीं हैं, परन्तु वे ज्योति के लिए साक्षी के रूप में खड़ी होती हैं ताकि सब उस पर विश्वास कर सकें। वे यूहन्ना के साथ कहती हैं, “देखो, परमेश्वर का मेमना जो जगत का पाप उठा ले जाता है” (यूहन्ना 1:29) और, “अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं” (यूहन्ना 3:30)। वे ख्रीष्ट को सब बातों में प्राथमिकता देती हैं जिसके जूती के बंध खोलने के भी वे योग्य नहीं हैं।

वे मनुष्य की महिमा की उद्घोषणा नहीं करती हैं, परन्तु ख्रीष्ट की महिमा की उद्घोषणा करती हैं। वे हमारी ओर नहीं परन्तु ख्रीष्ट की ओर संकेत करती हैं। वे पवित्रशास्त्र को स्वीकार्ययोग्य बनाकर प्रचार नहीं करते हैं, परन्तु क्रूसित ख्रीष्ट का प्रचार करते हैं। यूहन्ना के सुनने वाले परमेश्वर से सुनने के लिए गए थे और उन्होंने आने वाले मसीहा के विषय में सुना। मनुष्यों में जो सबसे बड़ा था उसने दूसरे के सन्देशवाहक के रूप में जीवन जिया (मत्ती 11:11)।

यदि परमेश्वर का जन साहसपूर्वक ख्रीष्ट की उत्कृष्टता का प्रचार करता है, तो चाहे छत को काले रंग से रंगिये, या बैठने के लिए पेड़ों के ठूँठ दीजिये, या पाप के विषय में कठोर शब्दों को प्रेम में होकर बोलिए — वह सब कुछ जिससे कि हमारे पास वह और अधिक पाया जाए।

ग्रेग मोर्स desiringgod.org के लिए एक कर्मचारी लेखक हैं और बेथलहम कॉलेज और सेमिनरी के स्नातक हैं। वह और उसकी पत्नी, अबीगैल, सेंट पॉल में अपने बेटे और बेटी के साथ रहते हैं।
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