कलीसिया में सन्देश कैसे सुनें (भाग 2)

परमेश्वर के वचन से सुनना हमारे लिए आनन्द और सौभाग्य की बात है क्योंकि हम जीवित परमेश्वर के वचन को सुनते हैं। परन्तु अधिकाँशत: हम में से बहुत लोग प्राय: कलीसिया में देह में उपस्थित तो होते हैं, किन्तु वचन प्रचार के समय हमारा ध्यान वचन से भटक कर अन्य बातों की ओर खींच जाता है। हम वचन को समझने एवं लागू करने में अपना हृदय न लगाकर, वचन के प्रति सही प्रतिक्रिया न दिखाते हुए इधर-उधर की बातों में ध्यान लगाते हैं या त्रुटियों को ढूँढ़ने में अपना मन अधिक लगाते हैं। आइये हम कुछ बातों पर ध्यान दें जिससे हम सन्देश को बेहतर रीति से समझ सकें।

खण्ड को समझने के लिए अपना सर्वोत्तम दें। स्मरण रखें कि परमेश्वर अपने वचन को विभिन्न व्यक्तित्व के लोगों द्वारा हम तक पहुँचाता है तथा प्रभु जी उस खण्ड से आपको आपके परिस्तिथियों के अनुसार कुछ सिखाना चाहता है। जब प्रचार हो रहा है तो अच्छा होगा कि हम प्रचारक की ओर देखें और उसके शब्दों पर ध्यान दें और खण्ड को समझते रहें। हमें उत्साहित होकर सन्देश सुनना चाहिए। यदि सम्भव है तो मोबाइल को बन्द कर दें या शान्त मुद्रा में डाल दें ताकि सन्देश के समय हम अपना हृदय और कान वचन की ओर लगा सकें। जब प्रचारक प्रचार कर रहा हो तो जहाँ से प्रचार कर रहा है उस खण्ड पर अपनी दृष्टि लगाए रहें। इसके साथ ही हम यह खण्ड को समझने पर ध्यान लगाएँ, अपनी बाइबल में देखते रहें कि प्रचारक खण्ड से क्या दिखा रहा है कैसे उसकी व्याख्या कर रहा है!  

प्रचार में केवल कमी ढूँढ़ने वाली आत्मा के साथ सन्देश न सुनें वरन अपने जीवन में परमेश्वर की इच्छा जानने के भाव से सन्देश सुनें।

अपनी वास्तविक स्थिति को जाँचते हुए सुनें। हम और आप सन्देश सुनते हैं तो परमेश्वर का वचन जो कह रहा है उस पर ध्यान दें। हमें ध्यान देना है कि हम प्रचार के विषय में सोचें न कि प्रचारक के विषय में। प्रचार में केवल कमी ढूँढ़ने वाली आत्मा के साथ सन्देश न सुनें वरन अपने जीवन में परमेश्वर की इच्छा जानने के भाव से सन्देश सुनें। हो सकता है कि आपके कुछ पसंदीदा प्रचारक हों जिनको सुनना आपको अच्छा लगता है। परन्तु जब अन्य कोई प्रचार करता है तो उसके सन्देश पर ध्यान दें और सीखने का प्रयास करें। उसकी कमियों पर विचार करने से आप वहीं पर उलझे रहेंगे और प्रभु के वचन पर ध्यान नहीं दे पाएंगे। स्मरण रखें, परमेश्वर का वचन जीवित, प्रबल और दोधारी तलवार से तेज़ है, जो हमारे प्राण और आत्मा, जोड़ों और गूदे, दोनो को आरपार बेधता और मन के विचारों तथा भावनाओं को परखता है (इब्रा 4:12)। 

प्रचारक के परिश्रम का सम्मान करते हुए सुनें। नम्र और प्रार्थनापूर्ण हृदय के साथ सन्देश को सुनना हमारे लिए एवं दूसरों के लिए फलदायी होता है। वचन के प्रति विश्वासयोग्य प्रचारक पुलपिट पर प्रचार करने से पहले घण्टों उस खण्ड के पदों का अध्ययन करने, मनन करने, टीकाओं को पढ़ने तथा प्रार्थना में समय व्यतीत करता है। अच्छा है यदि आप प्रचार द्वारा उत्साहित होते हैं और कोई नई बात आपने सीखी है तो आराधना के बाद प्रचारक को उसके परिश्रम के लिए प्रोत्साहित करें। यदि आप कोई नया विचार सुनते हैं, जो सम्भवता आप नहीं जानते हों परन्तु वचन के आधार पर सही हो, तो उसको लिख लें और बाद में आप प्रचारक से उस बात को समझने का प्रयास करें। प्रचारक में कमी ढूँढ़ने की भावना से मत सुनें। प्रचारक को अनुसुना करके वचन का तिरस्कार मत करें। यह मानकर न चलें कि आप सब जानते हैं या आप अपने मनपसंद प्रचारक से यदि सन्देश नहीं सुन रहे हैं तो प्रचार बढ़िया नहीं होगा। 

आप प्रचार द्वारा उत्साहित होते हैं और कोई नई बात आपने सीखी है तो आराधना के बाद प्रचारक को उसके परिश्रम के लिए प्रोत्साहित करें।

परमेश्वर की महिमा के लिए सुने। परमेश्वर हमारा राजा है और हम उसकी अपनी प्रजा हैं। इसलिए जब हम उसके वचन को सुनते हैं तो हम आदर भाव से सुनते हैं और उसकी आज्ञा का पालन करने के लिए बाध्य हैं। जब हम रविवार को उसके वचन से सुनते हैं तो हम उसके वचन का आदर करने के द्वारा उसकी महिमा करते हैं। जब हम प्रचार में परमेश्वर के गुण तथा हमारे जीवन में उसके द्वारा किए गए कार्यों के विषय में सुनते हैं, तो उसकी महिमा करें!

अत: आइये हम जब आराधना के लिए कलीसियाई रूप से इकट्ठे हों तो सन्देश सुनने के लिए स्वयं को तैयार करें। परमेश्वर से प्रार्थना करें कि परमेश्वर अपने वचन को हम पर स्पष्ट रूप से प्रकट करे, हमारी बुद्धि को खोले ताकि हम उसकी इच्छा को जान सकें। अपने पापों को देख सकें, और प्रचार को सही रीति से सुनने और उस के अनुसार चलने के द्वारा उसकी महिमा करें। 

साझा करें:

अन्य लेख:

यदि आप इस प्रकार के और भी संसाधन पाना चाहते हैं तो अभी सब्सक्राइब करें

"*" indicates required fields

पूरा नाम*