हम ख्रीष्ट में पवित्र किए गए हैं।

“और तुम में से कुछ ऐसे ही थे, परन्तु तुम अब प्रभु यीशु ख्रीष्ट के नाम में और हमारे परमेश्वर के आत्मा के द्वारा धोए गए, पवित्र किए गए और धर्मी ठहराए गए” (1 कुरिन्थियों 6:11)।

जब हमारा हृदय परिवर्तन होता है, तो कई सारी अद्भुत बातें तुरन्त हमारे साथ होती हैं, जैसे कि हम अपने पापों से पश्चाताप करते हैं, यीशु पर विश्वास करते हैं, ख्रीष्ट के साथ हमारा मिलन होता है, हम धर्मी ठहरा दिए जाते हैं। एक और बात जो शीघ्र ही हम विश्वासियों के साथ होती है वह है-अवस्थाबोधक पवित्रीकरण। 

जब हमारा उद्धार होता है, उसी क्षण में, हमें पवित्र कर दिया जाता है अर्थात् हम पाप के दण्ड से, पाप के बंधन से मुक्त हो जाते हैं, जो कि अवस्थाबोधक पवित्रीकरण है।

यह पवित्रीकरण के तीन पहलुओं में से एक है। बाइबल पवित्रीकरण के तीन पहलुओं के विषय में बात करती है, वे इस प्रकार से है, अवस्थाबोधक पवित्रीकरण, प्रगतिशील पवित्रीकरण, और अन्तिम पवित्रीकरण। जब हमारा उद्धार होता है, उसी क्षण में, हमें पवित्र कर दिया जाता है अर्थात् हम पाप के दण्ड से, पाप के बंधन से मुक्त हो जाते हैं, जो कि अवस्थाबोधक पवित्रीकरण है। फिर प्रगतिशील पवित्रीकरण आरम्भ होता है, वह प्रक्रिया जिसके द्वारा हम पाप की शक्ति से बचाए जाते हैं। और इस भौतिक जीवन के समाप्त होने के बाद, हम अन्त में पूर्ण रूप से पवित्र किए जाएँगे; अर्थात्, हम पाप की उपस्थिति से बचाए जाएँगे। इस लेख में हम अवस्थाबोधक पवित्रीकरण के विषय में देखने का प्रयास करेंगे। और इस विषय के सम्बन्ध में हम तीन बातों को देखेंगे। 

अवस्थाबोधक पवित्रीकरण केवल परमेश्वर का कार्य है।

अवस्थाबोधक पवित्रीकरण परमेश्वर के बचाने वाले अनुग्रह का तात्कालिक कार्य है, जिसके द्वारा वह हमें पृथक करता है और अपनी दृष्टि में हमें पवित्र मानता है। इसलिए, सबसे पहले यह इस बात को जानने के लिए महत्वपूर्ण है कि अवस्थाबोधक पवित्रीकरण परमेश्वर का कार्य है। पौलुस कुरिन्थुस की कलीसिया के विश्वासियों से कहता है कि, “तुम में से कुछ ऐसे ही थे, परन्तु तुम अब प्रभु यीशु ख्रीष्ट के नाम में और हमारे परमेश्वर के आत्मा के द्वारा धोए गए, पवित्र किए गए और धर्मी ठहराए गए” (1 कुरिन्थियों 6:11)। यह कार्य हमारे हृदय परिवर्तन के समय होता है। यह केवल परमेश्वर का बचाने वाला अनुग्रह है। यदि परमेश्वर की दया हम पर न होती, तो हमारी स्थिति ऐसी कदापि न होती। क्योंकि बाइबल बताती है कि सबने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। बाइबल यह भी बताती है कि मनुष्य पाप में मरा हुआ है। बाइबल मनुष्य की सम्पूर्ण भ्रष्टता, नैतिक अयोग्यता के बारे में बताती है। वह स्वयं को बचा नहीं सकता क्योंकि वह मर चुका है (यहेजकेल 36: 16; इफिसियों 2: 1)। मनुष्य अपने आपको बचाने में असमर्थ है। वह संसार, शरीर, शैतान का दास है ( इफिसियों 2: 1-3)। हम अपने आपको बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकते थे। वास्तव में हमारी स्थिति बहुत ही दयनीय, असहाय थी।

परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, बाइबल बताती है, “जबकि हम अपने अपराधों के कारण मरे हुए थे उसने हमें ख्रीष्ट के साथ जीवित किया- अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है” (इफिसियों 2:5)। “उसने हमें जगत की उत्पत्ति से पूर्व ख्रीष्ट में चुन लिया कि हम उसके समक्ष प्रेम में पवित्र और निर्दोष हों” ( इफिसियों 1:4)। उसने तो हमें अन्धकार के साम्राज्य से छुड़ा कर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया है (कुलुस्सियों 1:13)। इसलिए, अवस्थाबोधक पवित्रीकरण केवल परमेश्वर का कार्य है जिसे सेंतमेत में किया है, इसको अर्जित नहीं किया जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह अतीत में किया गया कार्य है।

अवस्थाबोधक पवित्रीकरण में हमारा कुछ भी योगदान नहीं हैं।

अवस्थाबोधक पवित्रीकरण हमारे लिए सेंतमेंत में भूतकाल में किया गया कार्य है, जिसे कमाया नहीं जा सकता है। बाइबल पवित्रीकरण के तीन काल के विषय में बात करती है। पवित्रीकरण का भूतकाल (अवस्थाबोधक पवित्रीकरण), वर्तमान (प्रगतिशील पवित्रीकरण), भविष्य (पूर्ण पवित्रीकरण) है। हमारे अवस्थाबोधक पवित्रीकरण भूतकाल में है।

पौलुस कुरिन्थुस की कलीसिया को लिखता है कि, “परमेश्वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिन्थ में है, अर्थात् उनके नाम जो ख्रीष्ट यीशु में पवित्र किए गए और उन सब के साथ जो प्रत्येक स्थान पर हमारे प्रभु यीशु के नाम से प्रार्थना करते हैं पवित्र लोग होने के लिए बुलाए गए हैं” (1 कुरिन्थियों 1:2)। परन्तु उसी के कारण तुम ख्रीष्ट यीशु में हो, जो हमारे लिए परमेश्वर की ओर से ज्ञान, धार्मिकता, पवित्रता, और छुटकारा ठहरा (1 कुरिन्थियों 1:30)। हम उसकी मृत्यु और पुनरुत्थान में उसके साथ एक होने के कारण, उसकी स्थिति में पवित्र हैं। दूसरे शब्दों में, हमारे पवित्रीकरण की यह अवस्था ख्रीष्ट की पवित्रता के कारण है। ये हमारे कार्य के कारण नहीं, परन्तु ख्रीष्ट ने जो कार्य क्रूस पर किया है, उसके कार्य के कारण ही है। 

 बाइबल में ख्रीष्टियों के लिए उपयोग किया जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द है जिसमें विशेष रूप से पवित्रता या पवित्रता के इस अवस्थाबोधक पहलू को ध्यान में रखा गया है, वह है- सन्त। इस शब्द का शाब्दिक अर्थ है “पवित्र”। यह कलीसिया के भीतर कुछ विशेष लोगों को सन्दर्भित नहीं करता है, जो असाधारण जीवन जीते हैं, किन्तु प्रत्येक विश्वासी सन्त है। पौलुस विश्वासियों को अपनी पत्रियों में “संत” करके सम्बोधित करता है (इफिसियों 1:1; फिलिप्पियों 1:1; कुलुस्सियों 1:2)। बाइबल में ‘सन्त’ शब्द का अर्थ एक बहुत अच्छा इंसान बनना नहीं है, न ही एक महान पुरुष भी बनना है। सन्त शब्द ‘पवित्र’ शब्द से सम्बन्धित है, जिसका अर्थ होता है ‘पवित्र’। सन्त वह व्यक्ति होता है जो परमेश्वर की दृष्टि में पूर्ण रूप से पवित्र होता है। सन्त वह व्यक्ति है जो यीशु ख्रीष्ट पर विश्वास करता है। यदि आप ख्रीष्ट में हैं, तो आप एक सन्त अर्थात् पवित्र व्यक्ति हैं। 

परमेश्वर अपनी दृष्टि में हमें पवित्र मानता है। परमेश्वर की दृष्टि में हम पवित्र हैं जैसे ख्रीष्ट पवित्र है, क्योंकि हम उसमें हैं और वह हम में हैं। क्योंकि परमेश्वर हमारे कार्य के आधार पर हमको ग्रहण नहीं करता है, कि हम कितने अच्छे है और हमने क्या किया है। वह हमें यीशु ख्रीष्ट के द्वारा ग्रहण करता है।  बाइबल बताती है, क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है और यह तुम्हारी ओर से नहीं वरन् परमेश्वर का दान है, यह कार्यों के कारण नहीं जिससे कि कोई घमण्ड करे (इफिसियों 2:8-9 )। हमारी स्थिति को बदल देने वाली अवस्थाबोधक पवित्रीकरण में हम कुछ भी योगदान नहीं करते हैं। यह हमें सेंतमेंत में दी जाती है, इसको अर्जित नहीं किया जा सकता है।

अवस्थाबोधक पवित्रीकरण में हमारी अवस्था तथा स्थिति में परिवर्तन होता है।

क्योंकि अवस्थाबोधक पवित्रीकरण सम्पूर्ण रीति से परमेश्वर का कार्य है इसलिए परमेश्वर के द्वारा यह कार्य हमारी स्थिति को बदल देता है। पहले हम पापी थे, पर अब हम यीशु ख्रीष्ट के कारण धर्मी ठहरा दिए जाते हैं। बाइबल बताती है, “जो पाप से अनजान था, उसी को उसने हमारे लिए पाप ठहराया कि हम उसमें परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएँ” ( 2 कुरिन्थियों 5:21)। मार्टिन लूथर ने इस कार्य को ‘महान आदान-प्रदान’ कहा। हम अपना पाप यीशु को देते हैं और वह उसके लिये पाप के दण्ड को लेकर क्रूस पर बलिदान होता है, और इसके बदले में वह हमें अपनी सिद्ध धार्मिकता, पवित्रता देता है। अब हम यीशु पर विश्वास करने के द्वारा न केवल पाप-मुक्त हो जाते हैं, परन्तु हमें यीशु की सिद्ध धार्मिकता भी मिलती है। हमारे पाप ख्रीष्ट पर डाल दिए गए हैं और उसकी धार्मिकता हमें दे दी गई है। अब जब परमेश्वर हमें देखता है, वह केवल  यीशु की धार्मिकता में हमें देखता है।

अवस्थाबोधक पवित्रीकरण में देखते हैं कि पहले हम कौन थे और अब क्या बन गए हैं। पहले हमारी स्थिति बहुत ही बेकार थी। हम अपने आपको को बचा नहीं सकते थे। हम परमेश्वर के क्रोध के योग्य थे। हम अपने आपको बचाने में असमर्थ थे। हम पाप को हरा नहीं सकते थे। हम कुछ नहीं कर सकते थे। हम पूरी तरह से निष्क्रिय थे। हम पूरी तरह से असहाय थे। हम दो तरह से अलग थे – हम परमेश्वर से अलग थे और उसके लोगों से अलग थे, हमारे लिए कोई आशा नहीं थी (इफिसियों 2:11-12)। परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो कि अब स्थिति अलग है। यीशु ख्रीष्ट के कारण सब कुछ बदल गया है। पिता परमेश्वर ने यीशु के द्वारा अपने महान प्रेम को प्रदर्शित किया जब हम पापी थे ख्रीष्ट हमारे लिए मरा। एक समय हम तो प्रजा न थे। पर अब हम परमेश्वर की प्रजा है, राजकीय याजकों के समाज, एक पवित्र प्रजा और परमेश्वर की निज सम्पत्ति है (1 पतरस 2:9-10)। एक समय हमारे लिए कोई आशा नहीं थी पर अब यीशु पर भरोसा रखने के द्वारा हमें अनन्त जीवन मिलता है और हमारे पास एक आशा है कि हम मरेंगे और फिर से जी उठेंगे, और हम उसके साथ हमेशा रहेंगे (प्रकाशितवाक्य 21:3)।

इसलिए प्रियों, यदि आज हम ख्रीष्ट में हैं, तो हम 100% सुनिश्चित हो सकते हैं कि परमेश्वर हमसे प्रेम करता है और वह हमें पूर्ण रूप से ग्रहण करता है। स्मरण रखें कि हमारा उद्धार हो चुका है, हमारा उद्धार हो रहा है, एक दिन हमारा उद्धार होगा। एक बार जब हमें अवस्थाबोधक रूप से पवित्र कर दिया जाता है, तो प्रगतिशील पवित्रीकरण की प्रक्रिया आरम्भ हो जाती है। परमेश्वर हमें अपने वचन के द्वारा पवित्रता में बढ़ाता है (यूहन्ना 17:17)। परमेश्वर की इच्छा है कि हम पवित्र बनें (1 थिस्सलुनीकियों 4:3)। यह हमारे जीवन के अन्त तक चलने वाली प्रक्रिया है। क्या आज हमारा उद्धार हुआ है? क्या आज हम प्रगतिशील पवित्रीकरण में बढ़ रहे हैं ? क्या हम पवित्रता में बढ़ रहे हैं?

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