प्रभावशाली बुलाहट क्या है?

सम्भवतः आप किसी व्यक्ति के अन्तिम संस्कार में गए होंगे और आपने एक मृतक शरीर देखा होगा। मेरा आपसे एक प्रश्न है, “क्या मरा हुआ व्यक्ति कुछ कर सकता है?” इस प्रश्न के बारे में सोचिए…तब तक मैं आपको एक घटना के बारे में बताता हूँ – यीशु मसीह का प्रिय मित्र लाज़र मर गया था (यूहन्ना 11)। जब यीशु लाज़र के गाँव में पहुँचे तो उसे कब्र में रखे, चार दिन हो गए थे। यीशु कब्र के पास जाते हैं और ऊँचे स्वर से पुकार कर कहते हैं, “लाज़र, बाहर निकल आ!” और मृतक लाज़र बाहर आ जाता हैं। मैं फिर से वही प्रश्न दूसरी रीति से पूछता हूँ। “क्या मृतक लाज़र यीशु मसीह की आवाज़ को सुन सकता था?” इस प्रश्न का उत्तर हमें प्रभावशाली बुलाहट को समझने में सहायता करेगा। एक तरह से हम इसे ऐसे कह सकते हैं, कि लाज़र स्वयं की क्षमता में यीशु मसीह की आवाज़ नहीं सुन सकता है, परन्तु यीशु मसीह के शब्दों के साथ ही एक सामर्थ्य गई जिसने लाज़र को आवाज़ सुनने के योग्य बनाया।

 जब परमेश्वर ने हमें बुलाया तो हम आत्मिक रीति से जीवित हो गए और लाज़र के समान कब्र से बाहर आ गए।

प्रभावशाली बुलाहट
संक्षिप्त में प्रभावशाली बुलाहट को ऐसे परिभाषित कर सकते हैं – जब एक प्रचारक, वचन का प्रचार कर रहा है, सुसमाचार का प्रचार करके पश्चाताप एवं विश्वास के लिए बुला रहा है तो अनेकों बार उसकी आवाज़ के साथ में परमेश्वर उसे बुलाता है और वह व्यक्ति आता है, अर्थात् वह पश्चाताप करता है और यीशु के जीवन एवं कार्य पर भरोसा करता है।
ये ऐसा है मानो कि लाज़र की कब्र के सामने खड़े होकर हम या आप पुकारते कि – लाज़र! बाहर आ जाओ! और आप जानते हैं क्या होता? वह नहीं आता। परन्तु जब यीशु मसीह ने कहा तो वह आया। वैसे ही जब कोई व्यक्ति सच्चे सुसमाचार को सुना रहा है तो परमेश्वर अपने समय में सामान्य बुलाहट के साथ प्रभावशाली बुलाहट देता है। परमेश्वर उसे आत्मिक रीति से जीवित करता है कि वह उस बुलाहट का प्रतिउत्तर कर सके।

इसी बात को पौलुस इफिसियों 2 अध्याय में सिखाता है।

प्रभावशाली बुलाहट की आवश्यकता क्यों है?
हमने इस बात को ऊपर थोड़ा सा देखा था और इफिसियों 2:1-3 पद में पौलुस दिखाता है कि इफिसियों के विश्वासियों की पहले की आत्मिक स्थिति एक मृतक के समान थी। परमेश्वर का वचन हम मनुष्यों की आत्मिक स्थिति को उस मृतक लाज़र के समान ही वर्णित करता है। यह उस बात की ओर भी संकेत देता है जो परमेश्वर ने कही थी कि उस फल को मत खाना नहीं तो मर जाओगे (उत्प. 2)। आदम और हव्वा ने फल खाया और वे मर गए— शारीरिक रीति से नहीं परन्तु आत्मिक रीति से (उत्प. 3)।

पौलुस भी यही विचार बताता है कि इफिसियों के विश्वासी पहले वे शरीर में जीवित परन्तु आत्मिक रीति से मरे हुए थे। वे संसार, शरीर एवं शैतान के अनुसार चल रहे थे। आप और हम कल्पना कर सकते हैं कि जैसा कि कुछ फिल्मों में दिखाते हैं कि एक वायरस लोगों को मार देता है और फिर वे लोग उस वायरस से नियन्त्रित भी होने लगते हैं। वे जीवित रूप से चलते-फिरते हुए शवों के समान होते हैं जो मरे हुए हैं परन्तु चल रहे हैं।

प्रभावशाली बुलाहट किससे आती है?
इफिसियों 2:4, “परन्तु” शब्द से आरम्भ होता है और पौलुस कहता है, “परन्तु परमेश्वर….” यहाँ पर हम देख रहे हैं कि परिस्थिति, अपेक्षा के विपरीत होने जा रही है। ये लोग मरे हुए हैं परन्तु परमेश्वर ने उन्हें जीवित किया है (पद 5)। परमेश्वर ही है जो प्रभावशाली रीति से बुलाता है। रोमियों 8:30 सीधी रीति से हमें बताता है कि परमेश्वर पिता प्रभावशाली बुलाहट देता है[1]। हम स्वयं को नहीं बुलाते हैं। कोई प्रचार हमें नहीं बुलाता है। परन्तु परमेश्वर हमें बुलाता है और हम जो आत्मिक रीति से मरे हुए थे, जब परमेश्वर ने हमें बुलाया तो हम आत्मिक रीति से जीवित हो गए और लाज़र के समान कब्र से बाहर आ गए। हमारी आत्मिक आँखें खुल गई। हम अपनी पापी स्थिति को समझ गए और हमने अपने पापों से पश्चाताप किया और यीशु मसीह के द्वारा क्रूस पर सम्पन्न किए गए कार्य पर विश्वास किया। 

तो क्या इसका अर्थ है कि हमें सुसमाचार बाँटने से कोई लाभ नहीं होगा। या क्या हमें प्रचार में ढ़िलाई करनी चाहिए? कदापि नहीं!!

मैं आपको उत्साहित करना चाहता हूँ कि जब आप अपने गै़र-मसीही मित्रों को देखते हैं, अपने सम्बन्धियों को देखते हैं तो आप इस बात को स्मरण रखिए कि वह आत्मिक रीति से मरे हुए हैं। मेरे और आपके प्रयास उन्हें आत्मिक रीति से जीवित नहीं कर सकते हैं। परन्तु क्योंकि परमेश्वर ने लोगों को चुना है और यीशु मसीह उन लोगों के लिए मरा है, इसलिए हमारे पास यह आश्वासन है कि उसकी भेंड़े उसकी आवाज़ सुनेगी, वे लोग पवित्र आत्मा के द्वारा नया जन्म पायेंगे। और यीशु मसीह पर विश्वास करेंगे। तो मेरा और आपका उत्तरदायित्व यह है हम लोगों के साथ बिना लालच दिए, लोगों को बिना भावनात्मक रीति से तोड़े मरोड़े, उन्हें विश्वासयोग्यता के साथ सच्चे सुसमाचार बांटते रहें जैसा कि पौलुस रोमियों की पत्री में कहता है कि,  “फिर वे उसे क्यों पुकारेंगे जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया? और वे उस पर कैसे विश्वास करेंगे जिसके विषय में उन्होंने सुना ही नहीं? भला वे प्रचारक के बिना कैसे सुनेंगे?” हमें सच्चाई से सुसमाचार पर विश्वास के लिए बुलाहट देना है परन्तु परमेश्वर अपनी सुइच्छा में लोगों को आत्मिक रीति से जीवित करेगा। 


[1] John Murray, Redemption Accomplished and Applied (Grand Rapids, Michigan: William B. Eerdmans Publishing Company, 2015), 93.

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