किसको सुसमाचार प्रचार का कार्य करना चाहिए?

सुसमाचार प्रचार का कार्य बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है। सुसमाचार प्रचार के विषय में जब हम सुनते हैं, तो प्राय: ये प्रश्न आते हैं कि “कौन सुसमाचार प्रचार का कार्य कर सकता है? क्या सुसमाचार प्रचार का वरदान केवल कुछ विशेष लोगों को दिया गया है? या क्या सब विश्वासी सुसमाचार का प्रचार कर सकते हैं? आइए, हम ध्यान दें कि बाइबल के अनुसार सुसमाचार प्रचार का कार्य किन लोगों को दिया गया है! 

सब विश्वासी सुसमाचार का प्रचार करने के लिए बुलाये गए हैं- सर्वप्रथम हम इस बात पर ध्यान देंगे कि सुसमाचार प्रचार करने वालों के विषय में प्राय: लोगों के क्या विचार हैं! कुछ लोग इस बात को प्रस्तुत करते हैं कि सब विश्वासी सुसमाचार प्रचार का कार्य नहीं कर सकते। इसके सन्दर्भ में दो विचार प्रस्तुत है। पहला विचार– कुछ लोग इस बात पर तर्क करते हैं कि महान आदेश केवल प्रेरितों को दिया गया था इसलिए यह सब विश्वासियों पर लागू नहीं होता है। दूसरा विचार– कुछ लोग कहते हैं कि “सुसमाचार प्रचार का वरदान” सभी को नहीं किन्तु विशेष प्रकार के लोगों को दिया गया है। एक साधारण विश्वासी को यह कार्य नहीं सौंपा गया है! 

सब विश्वासी सुसमाचार का प्रचार करने के लिए बुलाये गए हैं

उपरोक्त दो विचार यह प्रदर्शित करते हैं कि सुसमाचार प्रचार का कार्य कुछ विशेष लोगों को दिया गया है, किन्तु बाइबल स्पष्ट करती है कि सुसमाचार प्रचार का कार्य सभी विश्वासियों का है। यद्यपि यीशु द्वारा दिए गए महान आदेश के प्रथम लोग प्रेरित थे (मत्ती 28:18-20), परन्तु यह केवल उन्हीं तक सीमित नहीं है। अन्य सब विश्वासी भी प्रभु के महान आदेश का पालन करने के लिए बुलाये गए हैं। सुसमाचार प्रचार का उत्तरदायित्व सब विश्वासियों को सौंपा गया है। ख्रीष्ट के सब शिष्य ख्रीष्ट की साक्षी हेतु आदेश पाते हैं। “जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे, और यरूशलेम, सारे यहूदिया और सामरिया में, यहां तक कि पृथ्वी के छोर तक तुम मेरे साक्षी होगे” (प्रेरितों के काम 1:8)। यह पद पुनरुत्थित प्रभु यीशु ख्रीष्ट द्वारा अपने शिष्यों को दिया गया आदेश है। यीशु ख्रीष्ट ने स्वयं मेल-मिलाप किया और उसने मेलमिलाप की सेवा सौंपी है। 

इसलिए हम विश्वासी ख्रीष्ट के राजदूत हैं (2 कुरिन्थियों 5:18-20)। केवल प्रेरितों के पास मेल-मिलाप तथा ख्रीष्ट के राजदूत का कार्य नहीं है। अन्य खण्ड भी इस विचार को प्रकट करते हैं कि साक्षी देने की सेवकाई में सभी विश्वासी सम्मिलित हैं (मत्ती 5:14-16, 1 पतरस 3:15, फिलिप्पियों 2:14-16, कुलुस्सियों 4:5-6 एवं 1 पतरस 2:9)।

सभी विश्वासी आरम्भिक कलीसिया से ही सुसमाचार प्रचार के कार्य में सम्मिलित हैं- आरम्भिक कलीसिया पर ध्यान दें तो हम पाते हैं कि प्रेरित मुख्य रूप से सुसमाचार प्रचार और शिष्य बनाने का कार्य कर रहे थे। किन्तु हम साधारण विश्वासियों को भी सुसमाचार का प्रचार करते हुए देखते हैं। प्रेरितों के काम 8:1 में प्रथम ख्रीष्टीय शहीद, स्तिफनुस के पथराव किए जाने के बाद यरूशलेम की कलीसिया पर बहुत बड़ा सताव हुआ और उसके बाद वहाँ के विश्वासी तितर-बितर हो गए। वे पास के अन्य क्षेत्रों यहूदिया और सामरिया में बिखर गए। ध्यान देने योग्य बात यह है कि प्रेरित अभी भी यरूशलेम में ही थे। यरूशलेम से तितर-बितर होने के बाद साधारण विश्वासियों ने क्या किया? प्रेरितों के काम 8:4 प्रमाण देता है कि, “अत: जो तितर-बितर हुए थे, घूम-घूम कर वचन का प्रचार करने लगे।” वे दूसरों के साथ सुसमाचार को बांटने में लगे हुए थे। बहुत ही रोचक बात है कि यहाँ पर प्रेरित भिन्न-भिन्न स्थान पर नहीं हैं, किन्तु वे विश्वासी, साधारण लोग परमेश्वर के उस सुसमाचार के कार्य में लगे हुए हैं। जिनसे भी वे मिले, जहाँ भी वे गए, वे सुसमाचार का प्रचार करते गए। ये वे लोग नहीं थे, जिनको कोई विशेष प्रकाशन मिला हो, किन्तु ये वे लोग जो जिन्होंने ख्रीष्ट के जीवन, मृत्यु और पुनरूत्थान का सुसमाचार सुना और यीशु पर विश्वास किया। जो कुछ भी उन्होंने सीखा था, वे दूसरों के साथ बताते गए। आरम्भिक विश्वासियों के द्वारा सुसमाचार प्रचार के कार्य के उदाहरण से हम सीख सकते हैं और सुसमाचार प्रचार के कार्य में उत्साह के साथ स्वयं लगे रहकर तथा दूसरे विश्वासियों को सुसमाचार प्रचार के लिए उत्साहित कर सकते हैं। 

यह परमेश्वर का अनुग्रह है कि वह हम जैसे साधारण लोगों को सुसमाचार प्रचार के कार्य के लिए उपयोग करता है।

सभी विश्वासी कलीसिया में सुसमाचार प्रचार के लिए तैयार किए जाते हैं – हम सबको सुसमाचार प्रचार का कार्य सौंपा गया है। यह परमेश्वर का अनुग्रह है कि वह हम जैसे साधारण लोगों को सुसमाचार प्रचार के कार्य के लिए उपयोग करता है। इफिसियों 4 में पौलुस कलीसिया में विभिन्न कार्यालयों (प्रेरितों, भविष्यक्ताओं, सुसमाचार प्रचारकों, चरवाहों और शिक्षकों) के विषय में बात करता है। वह इस बात की घोषणा करता है कि परमेश्वर कलीसिया में ऐसे अगुवों को दान के रूप में देता है ताकि “पवित्र लोग सेवा-कार्य के योग्य बनें और ख्रीष्ट की देह उन्नति करे” (इफिसियों 4:12)। और निश्चित ही पवित्र सेवा कार्य में सुसमाचार प्रचार भी है। सुसमाचार के सन्देश को बताने का सरल माध्यम है, प्रभु यीशु ख्रीष्ट के सुसमाचार को दूसरों को बताना। सभी ख्रीष्टीयों को ख्रीष्ट के गवाह (शब्दों एवं कार्यों द्वारा) होने के लिए बुलाया गया है।

आईये हम स्मरण रखें कि हम सभी विश्वासी सुसमाचार प्रचार के कार्य के लिए बुलाए गए हैं। हमें जब भी अवसर मिले, हम अपने पड़ोसियों, मित्रों, साथ के कर्मचारियों के साथ सुसमाचार को बांटें। स्वयं को प्रतिदिन सुसमाचार स्मरण कराएं तथा दूसरों को भी बताएं कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है, जो परमेश्वर के अनन्त योजना के अनुसार हमारे स्थान पर सिद्ध बलिदान होकर क्रूस पर हमारे पापों के बदले मरने के लिए आए, और उसके पुनरूत्थान के द्वारा हमें पापों की क्षमा व अनन्त जीवन मिलता है। यदि हम यीशु के शिष्य हैं तो अवश्य है कि हम सच्चे सुसमाचार को शब्दों एवं अपने सम्पूर्ण जीवन से प्रत्येक जन तक पहुँचाने में लगे रहें।