परमेश्वर ने मुझे क्यों चुना?

चुनाव के रहस्य का गहन अध्ययन करना

यदि कोई व्यक्ति मुझसे चुनाव को समझाने के लिए कहे, तो मैं उस व्यक्ति से यह पूछने के द्वारा आरम्भ करूँगा कि वह मुझे बताए कि वह बचाया कैसे गया। मुझे बताइए कि आपका हृदय परिवर्तन कैसे हुआ था। अपने प्रश्न को और भी अधिक स्पष्ट करने के लिए, कर्मवाच्य “बचाया गया” का उपयोग करने के स्थान पर, मैं उससे पूछूँगा कि परमेश्वर ने आपको कैसे बचाया? परमेश्वर ने आपको बचाने के लिए इतिहास में क्या किया, और अस्तित्ववादी रूप से, परमेश्वर ने दस वर्ष पूर्व आपके जीवन में क्या किया था, या जब आप छह, या सोलह, या तीस वर्ष के थे? मुझसे वर्णन कीजिए कि कैसे परमेश्वर ने आपको अपने पास लेकर आया। 

मैं इस बात की खोज कर रहा हूँ कि कैसे कोई व्यक्ति अपनी खोई हुई स्थिति का और उसको अन्धेपन से बाहर निकालने में परमेश्वर के कार्य का, उसको मृतक दशा से बाहर निकालकर जीवन में लाने का, तथा उसको आत्मिक बातों के प्रति असंवेदनशीलता से बाहर लाने हेतु परमेश्वर के कार्य का वर्णन करता है। मैं जीवन में इसके प्रभावों का अध्ययन करके ही चुनाव के प्रश्न पर पहुंचता हूं। विरले ही ऐसे लोग हैं जिनसे मैंने इन प्रश्नों को पूछा है जो स्वयं के हृदय परिवर्तन के लिए निर्णायक श्रेय लेना चाहते हैं। 

आप कैसे बचाए गए थे?
क्योंकि अब उनके हृदय उस दिशा में उन्मुख हैं, तो मैं उन्हें बाइबल के उन स्थलों में ले जाता हूंँ जो यह सिखाते हैं कि वास्तव में उनके साथ क्या हुआ था, केवल यह पुष्टि करने के लिए कि उनके मनोविचार, वास्तव में बाइबल में पाए जाते हैं। “क्योंकि परमेश्वर जिसने कहा, “अन्धकार में से ज्योति चमके,”  वही है जो हमारे हृदयों में चमका है कि हमें मसीह के चेहरे में परमेश्वर की महिमा के ज्ञान की ज्योति दे” (2 कुरिन्थियों 4:6)।

एक समय था जब, हमारे पास ज्योति नहीं थी परन्तु परमेश्वर ने इसे सृष्टि के रचे जाने के प्रथम दिन में ही दे दिया। फिर मैं पढ़ूँगा कि, “यद्यपि जब हम अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे, [परमेश्वर] ने हमें जीवित किया” (इफिसियों 2:1,5)। तुम मरे हुए थे, और परमेश्वर ने तुम्हें जीवित किया। इसी रीति तुम बचाए गए हो। “परमेश्वर के दास को झगड़ालू नहीं, वरन सब पर दया करनेवाला, . . .और अपने विरोधियों को नम्रता से समझाने वाला होना चाहिए; क्या जाने परमेश्वर उन्हें पश्चात्ताप का मन दे कि वे भी सत्य को पहिचानें” (2 तीमुथियुस 2:24-25)। आपने कैसे पश्चात्ताप किया? परमेश्वर ने आपको पश्चात्ताप का मन दिया। 

परमेश्वर दृष्टि देता है, परमेश्वर प्रकाश देता है, परमेश्वर पश्चात्ताप का मन देता है, और “कोई भी मेरे पास नहीं आ सकता जब तक कि पिता की ओर से उसे न दिया गया हो” (देखें यूहन्ना 6:44,65)। इस बिन्दु पर, मैं पूछता हूं कि क्या वे देखने पा रहे हैं कि मसीह को सत्य के रूप में, और चाहने योग्य, और उनके आत्मिक जीवन का स्रोत और उनके पश्चात्ताप और यहां तक  कि उनके मसीह के निकट आने के लिए परमेश्वर ही निर्णायक कारक था। 

आप क्यों बचाए गए थे?
यदि वे पीछे हटते हैं और इस शिक्षा को अस्वीकार करते हैं — यदि वे इस बात पर बल देते हैं कि उनके पास अन्तिम आत्म-निर्धारण है और कि वे अपने हृदय परिवर्तन के लिए स्वयं निर्णायक रूप से उत्तरदायी हैं — तो मैं वहीं ठहरूँगा और चुनाव पर नहीं जाऊँगा, क्योंकि उन्होंने पहले से मूल बातों को अस्वीकार कर दिया है। यदि उन्हें अपने हृदय परिवर्तन के अन्तिम कारण के रूप में आत्म-निर्धारण को रखना ही है, तो चुनाव को पहले ही उन्होंने दुर्बल कर दिया है और बाइबल उनको यह स्पष्ट नहीं करेगी। वे खण्ड स्वयं में अत्यधिक स्पष्ट हैं जिन्हें मैंने अभी इस विषय पर दिया था कि कैसे उनका हृदय परिवर्तन हुआ था । 

चुनाव के रहस्य के विषय में समझाने के लिए मेरा उद्देश्य यह है कि हम दोनों में आश्चर्य की एक बड़ी भावना जागृत हो कि हम बचा लिए गए हैं, और इन सब के लिए हम परमेश्वर के ऋणी हैं।

परन्तु यदि वे सहमत हैं कि “हाँ, परमेश्वर ने मुझे बचाया है। परमेश्वर  ही निर्णायक कारक था।” तब मैं उनसे पूछुंगा कि, “परमेश्वर ने ऐसा करने का निर्णय कब लिया?” और बाइबलीय उत्तर पाने के लिए मैं सम्भवतः सबसे पहले प्रेरितों के काम 13:48 को देखूंगा: “और जितने अनन्त जीवन के लिए ठहराए गए थे, उन्होंने विश्वास किया”। वहाँ पर एक पूर्व निर्णय लिया गया था — एक पहिले से नियुक्ति, एक चुनाव — और फिर विश्वास आया। परमेश्वर ने आपको विश्वास में लाने, आपकी आँखों को खोलने तथा पश्चात्ताप का मन देने का पूर्व समय में निर्णय लिया था। 

और फिर मैं इफिसियों 1:4 में जाऊँगा: “यहाँ तक कि उसने हमें जगत की उत्पत्ति से पूर्व मसीह में चुन लिया।” इससे पहले कि परमेश्वर हमें बचाता, उसने बचाने के लिए पहले ही से निर्णय ले लिया था। परमेश्वर अपने निर्णयों में अस्थिर नहीं है। वह आश्चर्य से भौंचक्का नहीं होता है। उसके पास कोई दूसरी योजना नहीं है। उसने संप्रभुतापूर्वक आपको बचाया है क्योंकि उसने पहिले से ही ऐसा निर्धारित किया था। इस रीति से मैं चुनाव के विषय में किसी को समझाऊंगा। 

मैं इस व्यक्ति के लिए चुनाव के विषय में कुछ और स्थलों को लिखूंगा ताकि वह इसे घर ले जाकर स्वयं अध्ययन करें: रोमियों 8:30, रोमियों 9:11, रोमियों 11:5, और 1 कुरिन्थियों 1:23–24।
चुनाव के रहस्य के विषय में समझाने के लिए मेरा उद्देश्य यह है कि हम दोनों में आश्चर्य की एक बड़ी भावना जागृत हो कि हम बचा लिए गए हैं, और इन सब के लिए हम परमेश्वर के ऋणी हैं — कि उससे अलग होकर हम कुछ नहीं कर सकते हैं और, इसलिए हमारा सम्पूर्ण जीवन इस नित्य आश्चर्य में व्यतीत होना चाहिए कि हम बचा लिए गए हैं और वह हमारे लिए मारा गया। मेरा उद्देश्य यह है कि हम नम्र हों और पूरी रीति से परमेश्वर को महिमा दें।

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।
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