परिवर्तन सम्भव है

November 17, 2025

परिवर्तन सम्भव है

नए मनुष्यत्व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुरूप सत्य की धार्मिकता और पवित्रता में सृजा गया है। (इफिसियों 4:24)

ख्रीष्टीयता का अर्थ है कि परिवर्तन सम्भव है। गहरा, आधारभूत परिवर्तन। यद्यपि एक समय आप कठोर और असंवेदनशील थे, फिर भी करुणामय बनना सम्भव है। कड़वाहट और क्रोध द्वारा नियन्त्रित होने को रोका जाना सम्भव है। एक प्रेमी जन बनना सम्भव है, भले ही आपकी पृष्ठभूमि कुछ भी रही हो।

बाइबल यह मानकर चलती है कि जो हमें होना चाहिए, वह बनने में परमेश्वर  निर्णायक कारक है। बाइबल अद्भुत स्पष्टता के साथ कहती है, “सब प्रकार के क्रोध . . . दूर किए जाएँ” और “करुणामय बनो” (इफिसियों 4­­­­­­:31-32)। वह यह नहीं कहती है, “यदि आप कर सकते हैं तो. . . ” या, “यदि आपके माता-पिता करुणामय थे तो . . .” या, “यदि बुरी रीति से आपका शोषण नहीं किया गया है तो . . .।” वह तो कहती है, “करुणामय बनो।”

यह हमें अद्भुत रीति से स्वतन्त्र करती है। यह हमें उस भयानक नियतिवाद (fatalism) से स्वतन्त्र करती है जो कहता है कि मेरे लिए तो परिवर्तन असम्भव है। यह बात मुझे उन दृष्टिकोणों से स्वतन्त्र करती है जो मेरी पृष्ठभूमि को मेरी नियति बनाते हैं।

और परमेश्वर की आज्ञाएँ सदैव विश्वास करने के लिए मुक्तिदायक, जीवन परिवर्तित करने वाले सत्य  के साथ आती हैं। उदाहरण के लिए, 

  • परमेश्वर ने हमें अपनी सन्तान के रूप में गोद लिया। हमारे पास नया पिता और नया परिवार है। यह इस विचारधारा को तोड़ता है कि हमारा “मूल परिवार” (family-of-origin) हमें अभी भी संचालित करता है। “पृथ्वी पर किसी को अपना पिता न कहना, क्योंकि तुम्हारा एक ही पिता है, जो स्वर्ग में है” (मत्ती 23:9)।
  • परमेश्वर हमसे अपनी सन्तान के जैसे प्रेम करता है।  हम “प्रिय बालक” हैं (इफिसियों 5:1)। परमेश्वर के प्रेम का अनुकरण करने की आज्ञा हवा में नहीं, वरन् सामर्थ्य के साथ आती है: “प्रिय बालकों के सदृश  परमेश्वर का अनुकरण करने वाले बनो।” यद्यपि “प्रेम करो” आज्ञा है किन्तु इसको पालन करने की सामर्थ्य आती है परमेश्वर द्वारा प्रेम किये जाने के कारण।
  • परमेश्वर ने हमें ख्रीष्ट में क्षमा किया है। करुणामय बनो, और परमेश्वर ने ख्रीष्ट में जैसे तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो (इफिसियों 4:32)। ख्रीष्ट में परमेश्वर द्वारा किया गया कार्य सामर्थी है। यह परिवर्तन को सम्भव बनाता है। करुणामय बनने की आज्ञा इस बात से अधिक सम्बन्धित है कि परमेश्वर ने आपके लिए क्या किया, इसकी अपेक्षा कि आपके माता या आपके पिता ने आपके साथ  क्या किया। इस प्रकार की आज्ञा का अर्थ है कि आप परिवर्तित हो सकते हैं।
  • ख्रीष्ट ने आपसे प्रेम किया और उसने स्वयं को आपके लिए दे दिया। “प्रेम में चलो, जैसे ख्रीष्ट ने भी [तुम] से प्रेम किया” (इफिसियों 5:2)। यह आज्ञा, जीवन-परिवर्तित करने वाले सत्य के साथ आती है। “ख्रीष्ट ने तुमसे प्रेम किया है।” ऐसे समय में जब प्रेम करने का अवसर होता है, और कोई वाणी आपसे कहती है कि “तुम एक प्रेमी व्यक्ति नहीं हो,” तो आप कह सकते हैं कि “मेरे प्रति ख्रीष्ट का प्रेम मुझे एक नए प्रकार का व्यक्ति बनाता है। प्रेम करने की उसकी आज्ञा मेरे लिए उतना ही निश्चित रूप से सम्भव है जितना कि प्रेम करने की उसकी प्रतिज्ञा मेरे लिए सत्य है।”

नियतिवादी (fatalist) न बनें। ख्रीष्टीय बनें। परिवर्तन सम्भव है। परमेश्वर जीवित है। ख्रीष्ट जी उठा है। उसकी प्रतिज्ञाएँ सच्ची हैं।

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जॉन पाइपर
जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।

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