जब मैं चिन्तित होता हूँ

… अपनी समस्त चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि वह तुम्हारी चिन्ता करता है। (1 पतरस 5:7)

प्रत्येक उस पाप के लिए जिसे करने के लिए आप प्रलोभित होते हैं, और हर प्रकार के अविश्वास के लिए, जो अचानक आता है और आपको चिन्तित कर देता है, उन सब परिस्थितयों के लिए कोई न कोई उपयुक्त प्रतिज्ञा है। उदाहरण के लिए:

जब मैं अस्वस्थ होने की सम्भावना के विषय में चिन्तित होता हूँ, तो मैं इस प्रतिज्ञा के साथ अविश्वास से लड़ता हूँ, “धर्मी पर बहुत सी विपत्तियाँ आती तो हैं, परन्तु यहोवा उसको उन सब से छुड़ाता है” (भजन 34:19)। और मैं काँपते हुए इस प्रतिज्ञा को स्मरण करता हूँ: “यह जानते हुए कि क्लेश में धैर्य उत्पन्न होता है, तथा धैर्य से खरा चरित्र, और खरे चरित्र से आशा उत्पन्न होती है; आशा से लज्जा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है, उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे हृदयों में उण्डेला गया है” (रोमियों 5:3-5)।

जब मैं वृद्ध होने के विषय में चिन्तित होता हूँ, तो मैं इस प्रतिज्ञा के साथ अविश्वास से लड़ता हूँ, “तुम्हारे बुढ़ापे में भी मैं वैसा ही बना रहूँगा, और तुम्हारे बाल पकने के समय तक तुम्हें उठाए रखूँगा। मैंने ही तुम्हें बनाया और मैं तुम्हें लिए फिरूँगा। मैं तुम्हें उठाए रहूँगा और छुड़ाता रहूँगा” (यशायाह 46:4)।

जब मैं मरने के विषय में चिन्तित होता हूँ, तो मैं इस प्रतिज्ञा के साथ अविश्वास से लड़ता हूँ, “हम में से न तो कोई अपने लिए जीता है और न कोई अपने लिए मरता है। क्योंकि यदि हम जीवित हैं तो प्रभु के लिए जीवित हैं या यदि हम मरते हैं तो प्रभु के लिए मरते हैं; इसलिए चाहे हम जीवित रहें या मरें, हम प्रभु ही के हैं। इसी कारण ख्रीष्ट मरा और फिर जी भी उठा कि वह मृतकों और जीवितों दोनों का प्रभु हो” (रोमियों 14:7-9)।

जब मैं चिन्तित होता हूँ कि मैं अपने विश्वास-रूपी जहाज़ को डुबाकर परमेश्वर से दूर चला जाऊँगा, तो मैं इन प्रतिज्ञाओं के साथ अविश्वास से लड़ता हूँ, “जिसने तुम में भला कार्य आरम्भ किया है, वही उसे ख्रीष्ट यीशु के दिन तक पूर्ण भी करेगा” (फिलिप्पियों 1:6); और “जो उसके द्वारा परमेश्वर के समीप आते हैं, वह उनका पूरा पूरा उद्धार करने में समर्थ है, क्योंकि वह उनके लिए निवेदन करने को सर्वदा जीवित है” (इब्रानियों 7:25)।

अतः आइए हम अन्य लोगों से नहीं, वरन् अपने अविश्वास से युद्ध करें। परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर अविश्वास ही चिन्ता की जड़ है, जो कि अन्य कई पापों की जड़ है।

इसलिए, आइए हम परमेश्वर की बहुमूल्य और अति महान प्रतिज्ञाओं पर अपनी दृष्टि लगाए रहें। अपनी बाइबल को लें, पवित्र आत्मा से सहायता माँगें, अपने हृदय में प्रतिज्ञाओं को रखें, और अच्छी कुश्ती लड़ें—भविष्य-के-अनुग्रह पर विश्वास के साथ जीने के लिए।

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जॉन पाइपर
जॉन पाइपर

जॉन पाइपर (@जॉन पाइपर) desiringGod.org के संस्थापक और शिक्षक हैं और बेथलेहम कॉलेज और सेमिनरी के चाँसलर हैं। 33 वर्षों तक, उन्होंने बेथलहम बैपटिस्ट चर्च, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में एक पास्टर के रूप में सेवा की। वह 50 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं, जिसमें डिज़ायरिंग गॉड: मेडिटेशन ऑफ ए क्रिश्चियन हेडोनिस्ट और हाल ही में प्रोविडेन्स सम्मिलित हैं।

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